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Friday, May 22, 2026

बागरेकसा धान उपार्जन केन्द्र में 52.57 लाख रूपए के धान गबन का भंडाफोड़ फर्जी सूखत दिखाकर 1696 क्विंटल धान की अफरा तफरी समिति प्रबंधक और ऑपरेटर की सुनियोजित धोखाधड़ी उजागर

 राजनांदगांव 


बागरेकसा धान उपार्जन केन्द्र में 52.57 लाख रूपए के धान गबन का भंडाफोड़



फर्जी सूखत दिखाकर 1696 क्विंटल धान की अफरा तफरी


समिति प्रबंधक और ऑपरेटर की सुनियोजित धोखाधड़ी उजागर




राजनांदगांव  कलेक्टर  जितेन्द्र यादव के निर्देशन में आज शासकीय धान खरीदी में एक बड़े फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। डोंगरगढ़ विकासखंड के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बागरेकसा (धान उपार्जन केन्द्र बागरेकसा)  में प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त दल द्वारा औचक निरीक्षण और सघन जांच की कार्रवाई की गई। जिसमें 52 लाख 57 हजार 786 रूपए मूल्य के कुल 1696.06 क्विंटल धान का गबन पाया गया है। समिति के कर्मचारियों द्वारा सुनियोजित तरीके से रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार संयुक्त जांच दल द्वारा उपार्जन केंद्र बागरेकसा का विस्तृत भौतिक सत्यापन एवं रिकॉर्ड मिलान किया गया। निरीक्षण के दौरान मौके पर केंद्र प्रभारी  नीलकंठ साहू, डाटा एंट्री ऑपरेटर  ओम कुमार यादव सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। जांच दल द्वारा जब ऑनलाइन रिपोर्ट एवं वास्तविक रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्र द्वारा कुल 164169 बोरियों में कुल 65627.60 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया था। इसमें से 29501.46 क्विंटल धान राइस मिलर्स को तथा 34430.08 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों को परिदान किया गया। इस प्रकार कुल 63931.54 क्विंटल धान का प्रदाय किया गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 1696.06 क्विंटल धान शेष होना अनिवार्य था, परंतु भौतिक सत्यापन में उपार्जन केंद्र परिसर के भीतर न तो धान से भरी बोरियों में और न ही खुले में एक किलोग्राम भी धान पाया गया।

समिति प्रबंधक  नीलकंठ साहू एवं आपरेटर द्वारा भौतिक रूप से उपलब्ध नहीं पाये गये धान को सूखत होना बताया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि मिलर्स को धान देते समय रैंडम वजन नहीं किया गया। जबकि जांच में पाया गया कि सुनियोजित तरीके से, धर्मकांटा में प्राप्त वास्तविक वजन की एन्ट्री न करते हुए काल्पनिक एवं फर्जी आकड़ों की ऑनलाइन प्रविष्टि कर 1696.06 क्विंटल धान को सूखत दिखाए जाने का प्रयास किया गया है।

जांच दल द्वारा जब धर्मकांटा से प्राप्त वास्तविक वजन पत्रकों की तुलना समिति के कम्प्यूटर मॉड्यूल में की गई प्रविष्टियों से की गई, तो एक बड़े और सुनियोजित डिजिटल घोटाले की पुष्टि हुई। समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर द्वारा वास्तविक वजन की प्रविष्टि न करके, प्रत्येक वाहन में काल्पनिक रूप से प्रति बोरा 2 किलोग्राम की कमी दर्ज की गई थी। धोखाधड़ी का पैटर्न पाया गया। 875 बोरों वाले वाहनों में वास्तविक वजन को छुपाकर काल्पनिक रूप से 17.50 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई। 800 बोरो वाले वाहनों में सीधे 16.00 क्विंटल धान की फर्जी कमी दिखाई गई। 700 बोरों वाले वाहनों में 14.00 क्विंटल तथा 600 बोरों वाले वाहनों में 12.00 क्विंटल धान की मनगढ़ंत कमी दर्ज की गई। इसी प्रकार 500 बोरों वाले वाहनों में भी 10.00 क्विंटल धान की फर्जी कमी कंप्यूटर मॉड्यूल में दर्ज की गई। 

विशेष बात यह है कि जांच दल ने जब संग्रहण केंद्रों को भेजे गए धान की जावक पर्चियों का मिलान किया, तो वहां वास्तविक वजन ही दर्ज पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि समिति प्रबंधक और ऑपरेटर द्वारा राइस मिलर्स को भेजे जाने वाले धान में जानबूझकर, कूटरचित तरीके से प्रति बोरा 2 किलो की काल्पनिक कमी दिखाकर कुल 1696.06 क्विंटल धान को कागजों पर गायब कर दिया गया। इस गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और शासकीय संपत्ति के गबन (मूल्य 52 लाख 57 हजार 786 रूपए) के मामले में दोषी समिति प्रबंधक  नीलकंठ साहू, ऑपरेटर  ओम कुमार यादव एवं अन्य संलिप्त कर्मचारियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


सी एन आई न्यूज़ के लिए संतोष सहारे की रिपोर्ट

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