सेवानिवृत्त कर्मचारियों की GPF में गड़बड़ियों पर चिंता – सुधार की मांग तेज ।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर- सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि (GPF) से संबंधित गंभीर समस्याओं को लेकर व्यापक असंतोष सामने आ रहा है। जीवन भर वेतन से कटौती कर संचित की गई यह राशि, जो कर्मचारियों की सुरक्षित भविष्य निधि मानी जाती है, सेवानिवृत्ति के समय अनेक तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियों के कारण विवाद और परेशानी का कारण बन रही है।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि अनेक प्रकरणों में कर्मचारियों के वेतन से नियमित GPF कटौती तो होती रही, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा उसका सही लेखा-जोखा समय पर संधारित या अग्रेषित नहीं किया गया। परिणामस्वरूप, सेवानिवृत्ति के समय खातों में कम राशि अथवा “ऋणात्मक शेष” दर्शाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में कर्मचारियों पर अनावश्यक वसूली का दबाव बनाया जा रहा है, यहाँ तक कि दण्डात्मक ब्याज भी जोड़ा जा रहा है, जबकि इसमें कर्मचारियों की कोई त्रुटि नहीं होती। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, बल्कि न्याय और कानून की भावना के भी विरुद्ध है।
नामदेव ने स्पष्ट किया कि GPF खाते का सही संधारण विभाग और लेखा कार्यालय की जिम्मेदारी है। केवल रिकॉर्ड की त्रुटियों के आधार पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर आर्थिक भार डालना पूरी तरह अनुचित है। जिन मामलों में किसी प्रकार का कपट या गलत आचरण नहीं हुआ है, वहाँ वसूली और दण्डात्मक ब्याज का कोई औचित्य नहीं बनता।
उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे सेवा-काल के दौरान अपने GPF खातों का वार्षिक मिलान अवश्य करें तथा किसी भी त्रुटि की स्थिति में तत्काल लिखित आपत्ति दर्ज कर प्रमाण सुरक्षित रखें। यदि सेवानिवृत्ति के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो विधिक उपाय अपनाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
महासंघ की ओर से राज्य सरकार से निम्न प्रमुख मांगें की गई हैं कि GPF रिकॉर्ड का समयबद्ध मिलान एवं पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए। प्रत्येक विभाग में GPF सत्यापन हेतु जिम्मेदार प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए। सेवानिवृत्ति से 1–2 वर्ष पूर्व विशेष “GPF सत्यापन अभियान” चलाया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जीवन भर की कमाई पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या अन्याय स्वीकार्य नहीं है। कर्मचारियों की भविष्य निधि पर आंच, उनकी गरिमा पर आंच के समान है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।


















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