हज़रत बाबा ताजुद्दीन औलिया (1861-1925) भारत के महान सूफी संतों में से एक थे।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी। नागपुर (महाराष्ट्र)- नागपुर के ताजबाग में स्थित उनका मकबरा हिंदू और मुसलमानों दोनों के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र है। उन्हें "शहंशाह-ए-हफ्त-ए-अकलीम" (सात दुनिया के बादशाह) भी कहा जाता है।
बाबा ताजूद्दीन
का जन्म 21 जनवरी 1861 को नागपुर के पास कामठी में हुआ था। वे हज़रत इमाम हसन और इमाम हुसैन के वंश से थे। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के बाद उनका पालन-पोषण उनके नाना-नानी और मामा ने किया।
आध्यात्मिक दीक्षा
अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनकी मुलाकात हज़रत अब्दुल्ला शाह कादरी से हुई, जिन्होंने उन्हें आध्यात्मिक मार्ग में दीक्षित किया।
सूफी संत की कृपा से ताजुद्दीन बाबा को ईश्वरीय ज्ञान (मज़ज़ूब अवस्था) की प्राप्ति हुई और वे अक्सर ध्यान में लीन रहने लगे। बाबा ताजूद्दीन के भक्तों में आम लोगों के अलावा बड़े -बडे़ राजा -महाराजा शामिल हैं, बाबा ताजूद्दीन के दरबार में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त पहुंच कर श्रृद्धा से शीष नंवाते है।





















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