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Wednesday, June 3, 2026

’जब मुख्यमंत्री रुके एक छोटी-सी किराना दुकान पर... और सामने थी बदलाव की बड़ी कहानी’ ’कभी बंदूक थामने वाले मासा तामो और जयमोती आज चला रहे हैं अपनी दुकान’ ’मुख्यमंत्री श्री साय ने पानी की बोतल खरीदकर बढ़ाया हौसला, कहा- यही है नए बीजापुर की तस्वीर’

 ’जब मुख्यमंत्री रुके एक छोटी-सी किराना दुकान पर... और सामने थी बदलाव की बड़ी कहानी’



’कभी बंदूक थामने वाले मासा तामो और जयमोती आज चला रहे हैं अपनी दुकान’


’मुख्यमंत्री श्री  साय ने पानी की बोतल खरीदकर बढ़ाया हौसला, कहा- यही है नए बीजापुर की तस्वीर’


सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।

छ.ग.प्रदेश-प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। 



चौपाल के लिए जा रहे मुख्यमंत्री का काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य दुकान थी, लेकिन उसके भीतर संघर्ष, साहस और बदलाव की एक असाधारण कहानी छिपी थी।यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी।


    मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे, दोनों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और दोनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।


’बंदूक से रोजगार तक का सफर’


मासा तामो का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। बचपन में पिता का साया उठ गया और पढ़ाई का अवसर कभी नहीं मिला। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया। उधर जयमोती की कहानी भी संघर्षों से भरी रही। बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया। लेकिन समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है। अक्टूबर 2025 में उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।


’पुनर्वास केंद्र बना नई जिंदगी का आधार’

बीजापुर पुनर्वास केंद्र पहुंचने के बाद दोनों के जीवन में नया अध्याय शुरू हुआ ।        मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह बदलते बस्तर की तस्वीर है और इस बात का प्रमाण है कि अवसर, विश्वास और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकता है।

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