राधा-कृष्ण चरित्र कथा में बही भक्ति और प्रेम की अविरल धारा
राधे-राधे के जयघोष से गुंजायमान हुआ श्री नारायण धाम, कथा श्रवण कर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
"राधा और कृष्ण दो नहीं, एक ही दिव्य स्वरूप हैं" — पंडित अर्पित भाई शर्मा
राजनांदगांव। संस्कारधानी राजनांदगांव में श्री सत्यनारायण मंदिर समिति द्वारा आयोजित 16 दिवसीय पुरुषोत्तम मास श्री नारायण महामहोत्सव के तृतीय दिवस भक्ति, प्रेम और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्री नारायण धाम स्थित श्री सत्यनारायण धर्मशाला, कामठी लाइन में आयोजित राधा-कृष्ण चरित्र कथा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा के दौरान पूरा परिसर "राधे-राधे" के जयघोष और भक्ति रस से सराबोर रहा।
श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के विष्णु लोहिया, नरेंद्र गोयल एवं संतोष सिंघल ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन धर्म, अध्यात्म, संस्कार और सेवा की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है, जिसका लाभ लेने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
कथा प्रारंभ पूर्व हुआ व्यासपीठ का स्वागत
राधा-कृष्ण चरित्र कथा प्रारंभ होने से पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार, पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष सूरज बुद्धदेव एवं अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल महासभा के राष्ट्रीय युवा संयोजक शरद खंडेलवाल कथा स्थल पहुंचे। उन्होंने व्यासपीठ पर विराजमान पंडित अर्पित भाई शर्मा का पुष्पहार एवं श्रीफल भेंटकर स्वागत किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर विजय हरिहरनो, अशोक लोहिया एवं हरीश अग्रवाल ने भी पंडित अर्पित भाई शर्मा का सम्मानपूर्वक स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के मार्मिक प्रसंगों ने किया भाव-विभोर
व्यासाचार्य पंडित अर्पित भाई शर्मा ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण कथावाचन में राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं, प्रेम, समर्पण और भक्ति के अद्भुत प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के दौरान कई ऐसे मार्मिक क्षण आए जब श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और भक्ति भाव अश्रुधारा बनकर बह निकला। भक्तजन मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसपान करते रहे।
राधा नाम है अनमोल
कथावाचन के दौरान पंडित अर्पित भाई शर्मा ने कहा कि "राधा नाम स्वयं में अनमोल है। राधा और कृष्ण दो नहीं, बल्कि एक ही दिव्य चेतना के दो स्वरूप हैं। राधा में कृष्ण और कृष्ण में राधा का वास है।" उन्होंने बताया कि जहां प्रेम है, वहां राधा हैं और जहां करुणा है, वहां कृष्ण हैं।
मनोहारी झांकियों ने मोह लिया मन
कथा के साथ प्रस्तुत राधा-कृष्ण की मनोहारी झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। रासलीला के दृश्य इतने जीवंत प्रतीत हो रहे थे कि मानो प्रत्येक भक्त स्वयं वृंदावन की रास में सम्मिलित होकर श्रीकृष्ण के साथ नृत्य कर रहा हो। पूरे पंडाल में भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण बना रहा।
सेवा में जुटे स्वयंसेवक
आयोजन में सर्व समाज, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा महिला मंडलों की उल्लेखनीय भागीदारी बनी हुई है। स्वयंसेवक के रूप में अरविंद गुप्ता, महेश शर्मा, धर्मशाला प्रबंधक आनंद वासनिक, गुलशन सिनहा सहित अनेक कार्यकर्ता एवं बाहर से पधारे श्रद्धालु निस्वार्थ भाव से सेवाएं दे रहे हैं।
पुरुषोत्तम मास का लाभ लेने का आह्वान
श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के अध्यक्ष हरीश अग्रवाल ने समस्त श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास के इस पुण्यदायी अवसर का लाभ उठाने तथा अधिक से अधिक संख्या में श्री नारायण महामहोत्सव में शामिल होकर धर्म लाभ एवं पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
उपरोक्त जानकारी श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के सचिव सौरभ खंडेलवाल एवं उत्सव प्रभारी लक्ष्मण लोहिया ने दी।
राधा-कृष्ण का प्रेम, समर्पण और भक्ति मानव जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग दिखाते हैं। धार्मिक आयोजनों में सहभागिता समाज में संस्कार, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ बनाती है।





















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