डीए/डीआर में विलंब : कर्मचारी संगठनों की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं कर्मचारी और पेंशनर्स
रायपुर, 25 जुलाई 2026।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ ने राज्य के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को महंगाई राहत (डीआर) का लाभ समय पर नहीं मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। महासंघ का कहना है कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों की उदासीनता का नुकसान आम कर्मचारी तो उठा रहे है लेकिन सबसे अधिक खामियाजा सेवानिवृत्त पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है।
पेंशनर्स महासंघ का कहना है कि कर्मचारी संगठनों में आपसी मतभेद और कई गुटों में बटे होने के कारण दमदार आंदोलन राज्य में संभव नहीं हो रहा है। मंत्रालय निर्गुट होकर भी सरकार को दबाव में लाने के लिये कोई उपक्रम कभी नहीं करते वे केवल अपनी पदोन्नति और मंत्रालय में अपनी दबदबा से खुश रहना पसंद करते हैं। पेंशनर्स संगठन भी बिखरे हुए हैं वैसे पेंशनरों के आंदोलन से सरकार कोई असर नहीं होता जबकि कर्मचारियों और अधिकारी यदि काम बंद करके सरकार के नाक में दम कर सकते हैं।
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से महंगाई राहत की घोषणा किए जाने के बावजूद छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स आज भी उसके लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च और दैनिक आवश्यकताओं की कीमतों में वृद्धि ने वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। ऐसे समय में समय पर डीआर का भुगतान उनकी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार भी है।
उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि अधिकांश पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपने वैध एरियर के लिए महीनों या वर्षों तक प्रतीक्षा कर सकें। इसके विपरीत, मध्यप्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) का एरियर भी प्रदान कर रही है, जबकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारी और पेंशनर्स अभी तक महंगाई राहत के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह स्थिति कर्मचारी और पेंशनर्स दोनों के साथ न्यायसंगत व्यवहार नहीं है।
महासंघ के प्रदेश महामंत्री द्वय अनिल गोल्हानी एवं प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने कहा कि जब कर्मचारी संगठनों को अपने कर्मचारियों के हितों की प्रभावी पैरवी करनी चाहिए थी, तब उनकी उदासीनता का प्रतिकूल प्रभाव पेंशनर्स पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशनर्स भी इसी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और उन्हें भी कर्मचारियों के समान समय पर महंगाई राहत एवं अन्य वित्तीय लाभ मिलना चाहिए।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री से मांग की है कि केंद्र के समान जनवरी 2026 से देय महंगाई राहत (डीआर) तत्काल स्वीकृत कर आदेश जारी किया जाए तथा बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए। महासंघ ने यह भी मांग की है कि भविष्य में डीए/डीआर के आदेश कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक साथ जारी किए जाएं, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
अंत में महासंघ के संभागीय अध्यक्ष आर एन ताटी बस्तर, राजेन्द्र कश्यप बिलासपुर, बी एल गजपाल दुर्ग, शैलेन्द्र सिन्हा रायपुर तथा गुरुचरण सिंह अंबिकापुर आदि ने कहा है कि "पेंशन बख्शीश नहीं, हमारा अधिकार है।" पेंशनर्स के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन निरंतर संघर्ष करता रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।


















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