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लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़
रिपोर्टर असीम पाल ब्यूरो
दंतेवाड़ा
बचेली-किरंदुल मार्ग धांधली (भाग-2):
खबर के बाद भी बेखौफ ठेकेदार, 1 KM तक ढाल दिया घटिया कंक्रीट; अधिकारी का बेतुका तर्क मौखिक आदेश पर चल रहा काम!"
बचेली/दंतेवाड़ा।
लोक निर्माण विभाग (PWD) के बचेली-किरंदुल मार्ग पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण में भ्रष्टाचार का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रथम भाग में खबर उजागर होने के बाद भी न तो ठेकेदार के हौसले पस्त हुए और न ही प्रशासनिक अधिकारियों की नींद खुली।
विभागीय शह पर ठेकेदार ने नियमों को धता बताते हुए लगभग 1 किलोमीटर लंबी कंक्रीट ढलाई का काम लीपापोती कर पूरा कर दिया है—और यह सब गुणवत्ता में बिना कोई सुधार किए किया गया।
अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना बयान: "मौखिक चर्चा पर हो रहा काम"
जब इस गंभीर भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी पर संबंधित विभागीय अधिकारी से सीधी बात की गई, तो उनका जवाब तंत्र की लाचारी और मिलीभगत को साफ बयां करता है। अधिकारी का कहना है:
वर्क ऑर्डर में इस विशिष्ट कार्य का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है; इसे उच्च अधिकारियों के साथ मौखिक चर्चा के आधार पर कराया जा रहा है।"
दावों का खोखलापन: उच्च अधिकारियों ने खोली पोल
सरकारी ढर्रे में अधिकारी का यह 'मौखिक तर्क' पूरी तरह से गले से नीचे नहीं उतरता। जब इस संबंध में विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"शासकीय कार्य कभी भी 'मौखिक' नहीं होते। शासन का हर काम लिखित प्रक्रिया और स्वीकृत वर्क ऑर्डर के तहत ही होता है। ठेकेदार को लिखित में निर्देश दिए गए हैं।"
उच्चाधिकारियों के इस बयान ने निचले अमले और ठेकेदार के बीच की गहरी साठगांठ को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि यदि उच्चाधिकारी लिखित काम का दावा कर रहे हैं, तो मौके पर मौजूद अधिकारी ठेकेदार को 'मौखिक आदेश' का बहाना बनाकर घटिया निर्माण की खुली छूट क्यों दे रहे हैं?
दक्षिण बस्तर में जनता के पैसे की खुली डकैती
यह पूरा मामला स्पष्ट करता है कि ठेकेदार पर विभागीय अधिकारियों का कोई प्रशासनिक जोर या पकड़ नहीं है। जिस तंत्र पर शासकीय राशि की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वही तंत्र इस भ्रष्टाचार में संलिप्त नजर आ रहा है।
1 किलोमीटर तक घटिया कंक्रीट और रॉड की चोरी करके ढांचा तैयार कर दिया गया, लेकिन अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। यह सीधे तौर पर दक्षिण बस्तर में विकास के नाम पर आ रही शासन की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग है।
यक्ष प्रश्न: क्या जागेगा जिला प्रशासन?
कागजी खानापूर्ति या कार्रवाई? जब उच्चाधिकारी लिखित आदेश की बात कह रहे हैं, तो क्या मौखिक आदेश का ढोंग रचने वाले अधिकारी और ठेकेदार पर FIR दर्ज होगी?
1 KM घटिया कंक्रीट का क्या? क्या इस 1 किलोमीटर तक किए गए स्तरहीन कंक्रीट निर्माण को ध्वस्त कर ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाई जाएगी?
कौन भरेगा शासकीय खजाने का नुकसान? बिना मानकों के तैयार की जा रही यह सड़क कुछ ही महीनों में टूट जाएगी; इसका जिम्मेदार कौन होगा?
अब देखना यह होगा कि दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और PWD का शीर्ष नेतृत्व इस संगठित फर्जीवाड़े पर कड़ा रुख अपनाते हुए ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करता है या दक्षिण बस्तर में भ्रष्टाचार का यह 'कंक्रीट मॉडल' यूं ही फलता-फूलता रहेगा।



















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