एक गमला शहीदों के नाम : नन्हे हाथो के द्वारा देश को प्रणाम
बिलाईगढ़ :- शासकीय प्राथमिक विद्यालय बांसउरकुली में स्वतंत्रता दिवस पर अभिनव पहल
स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का दिन नहीं, बल्कि उन वीर शहीदों को स्मरण करने का अवसर भी है, जिनके त्याग और बलिदान से हमें आजादी मिली। इसी भावना को जीवंत करते हुए शासकीय प्राथमिक विद्यालय बांसउरकुली में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आजादी के 80वें वर्ष की स्मृति में अभिनव कार्यक्रम “एक गमला शहीदों के नाम” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधान पाठक एवं राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक *विनोद कुमार डड़सेना* ने पौधारोपण कर किया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि “शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनके सपनों के भारत को हरा-भरा, स्वच्छ और सुंदर बनाना है।”
कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ सहभागिता की। प्रत्येक पौधा उनके लिए केवल एक पौधा नहीं, बल्कि देश के वीर सपूतों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और संकल्प का प्रतीक बना। बच्चों के नन्हे हाथों से लगाए गए इन पौधों ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को एक नया अर्थ और यादगार पहचान दी।
विद्यालय के इको क्लब प्रभारी शिक्षक जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी के विशेष सहयोग एवं प्रेरणा से इस पहल को साकार रूप मिला। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा— *“शहीदों की याद में लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता का मूल्य और प्रकृति का महत्व, दोनों सिखाएगा।”* उनकी पहल से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ी और पौधों की देखभाल का भाव भी विकसित हुआ।
इस अनूठी पहल की ग्रामवासियों ने मुक्तकंठ से सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों के माध्यम से शहीदों को याद करने और स्वतंत्रता दिवस को पौधारोपण से जोड़ने का यह प्रयास निश्चित रूप से अनुकरणीय है। यह आयोजन न केवल विद्यालय तक सीमित रहा, बल्कि पूरे गांव में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश लेकर पहुंचा।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक शिव कुमार बंजारे एवं सरिता कहार, शाला विकास समिति की अध्यक्षा यशोदा बाई पटेल, उपाध्यक्ष प्रमिला मानिकपुरी एवं सदस्यगण, सरपंच हेमीन बाई सूर्यवंशी, पंचायत के अन्य प्रतिनिधिगण, शाला के रसोइया एवं सफाई कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
विद्यालय द्वारा शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बाल सहभागिता और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे ऐसे प्रयास विद्यालय की सकारात्मक उपलब्धियों को दर्शाते हैं। “एक गमला शहीदों के नाम” ने बच्चों को यह सीख दी कि देशप्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सार्थक कार्यों में भी दिखाई देता है।
आज लगाए गए ये पौधे जब कल वृक्ष बनेंगे, तब उनकी छांव में आने वाली पीढ़ियां शायद इन नन्हे हाथों की कहानी याद करेंगी—कि बांसउरकुली के बच्चों ने स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों को फूल नहीं, भविष्य की हरियाली समर्पित की थी।
यह पहल संदेश देती है—
“शहीदों की स्मृति को दिल में सजाइए,
एक पौधा लगाइए और भारत को हरा-भरा बनाइए।”
विद्यालय की यह छोटी-सी पहल निश्चित ही बड़े बदलाव की नींव है और अन्य विद्यालयों तथा समुदायों के लिए प्रेरणा का सुंदर उदाहरण बन सकती है।


















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