ऋषि पंचमी व्रत आज यह व्रत ऋषियों के निस्वार्थ परिश्रम को समर्पित है।
सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी।
हिंदू संस्कृति में ऋषि पंचमी भाद्रपद के महीने में शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। यह त्योहार गणेश चतुर्थी के अगले ही दिन पड़ता है। इस साल ऋषि पंचमी मंगलवार, 15 सितम्बर, 2026 को है। ऋषि पंचमी का पर्व गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद होता है। यह दिन सप्त ऋषि यानी कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम महर्षि, जमदग्नि और वशिष्ठ की पूजा का दिन है। केरल में इस दिन को विश्वकर्मा पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। ऋषि पंचमी व्रत में मुख्य रूप से उन महान संतों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता व्यक्त की जाती है, जिन्होंने समाज के कल्याण में बहुत योगदान दिया।
ऐसा माना जाता है कि ऋषि पंचमी व्रत का व्रत सभी के लिए लाभकारी होता है, लेकिन इस व्रत को महिलाओं द्वारा विशेष रूप से किया जाता है। ऋषि पंचमी का त्योहार एक महिला के लिए पति के प्रति अपनी आस्था, कृतज्ञता, विश्वास और सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है।
इस पर्व पर व्रत करने से अनजाने में किए गए पापों का भी नाश होता है।
ऋषि पंचमी को भाई पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। माहेश्वरी समाज में इस दिन बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं। इस दिन बहनें व्रत रखती हैं और अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
जैनियों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है। चूंकि जैन धर्म में दो संप्रदाय हैं, श्वेतांबर पंथ, जो ऋषि पंचमी को परशुजन (पर्युषण) महापर्व के अंत के रूप में मनाते हैं, जबकि दिगंबर पंथ इस दिन को महा पर्व की शुरुआत के रूप में मानते हैं।
इस प्रकार ऋषि पंचमी व्रत ऋषियों के निस्वार्थ परिश्रम को समर्पित है। यह एक ऐसा दिन है, जो भक्तों को अपने तन-मन और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर देता है।


















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