एक शाम तीजन बाई के नाम — साल्हेवारा में पंडवानी की गूंज
पंडवानी की गूंज से भावविभोर हुआ साल्हेवारा, याद आईं लोकगाथा की महान साधिका तीजन बाई
‘एक शाम तीजन बाई के नाम’ कार्यक्रम में बालोद की रानू निषाद ने बांधा समां, महाभारत के प्रसंगों की सशक्त प्रस्तुति ने मोहा मन
खैरागढ़ । धार्मिक सामाजिक ग्रुप ‘पहल’ साल्हेवारा के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति एवं पंडवानी की महान साधिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई की स्मृति में “एक शाम तीजन बाई के नाम” भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन बस्तीपारा साल्हेवारा में किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, लोकपरंपरा और पंडवानी की जीवंत झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बालोद से पधारीं सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका सुश्री रानू निषाद की मनमोहक प्रस्तुति रही। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, ओजपूर्ण गायन शैली और प्रभावी भाव-भंगिमाओं के माध्यम से महाभारत के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया। पंडवानी की ओजपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
रानू निषाद की प्रस्तुति में पंडवानी की पारंपरिक शैली के साथ लोकभावना और कथा की प्रभावशीलता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की समृद्ध कला परंपरा और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की स्मृतियां एक बार फिर जीवंत हो उठीं।
इस अवसर पर क्षेत्र के नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने डॉ. तीजन बाई के छत्तीसगढ़ी लोककला एवं पंडवानी के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके योगदान ने प्रदेश की लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
कार्यक्रम की संपूर्ण संध्या छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति, परंपरा और लोकगाथाओं के प्रति सम्मान एवं श्रद्धा का भावपूर्ण अवसर बन गई। पंडवानी की गूंज के बीच उपस्थित लोगों ने लोककला की इस महान परंपरा को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।
सामूहिक प्रयास से तय हुई कार्यक्रम की रूपरेखा
‘एक शाम तीजन बाई के नाम’ कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा धार्मिक सामाजिक ग्रुप ‘पहल’ साल्हेवारा से जुड़े सदस्यों द्वारा सामूहिक विचार-विमर्श से तय की गई। कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने में सुरेन्द्र भाई (बाबा), राजेंद्र साहू (पटवारी) — विशेष सलाहकार, राजकुमार श्रीवास, नोहर जायवाल — मुख्य संयोजक, प्रतीक अग्रवाल (मोंटू), दशरथ पटेल — सरपंच ग्राम पंचायत साल्हेवारा, कान्हा, लाला भैया, राकेश, केवल जायसवाल, रिंकू भाई, सोनू, बरकत भाईजान, लाला, शिव टेकाम, राजेश पटेल, गोलू, बंटी भैया, सुमित एवं राजेश पटेल सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के सामूहिक प्रयास और सहयोग से यह आयोजन लोककला एवं लोक संस्कृति के प्रति सम्मान का यादगार अवसर बना।



















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