बिलाईगढ़ में विकास पर सियासी जंग: कल तक खामोशी, अब शिकायतों की बौछार
बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ में पूर्व सीएमओ सुशील कुमार चौधरी के तबादले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान तेज हो गया है। नए सीएमओ के पदभार ग्रहण करने के बाद रुके विकास कार्यों को गति मिलने के बीच अचानक शिकायतों और विरोध का दौर शुरू होने से सवाल उठ रहा है—आखिर विरोध विकास का है या बदली व्यवस्था से प्रभावित कथित हितों का?
आरोप लगाने वाले पक्ष के अनुसार चौधरी 3 सितंबर 2024 से स्थानांतरण तक नियमित कार्यालय नहीं आते थे तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज निजी निवास में रखकर कार्यालयीन कार्य संचालित करते थे। तब शिकायतकर्ता खामोश क्यों रहे? परिषद एवं पीआईसी की बैठकें नहीं होने पर भी सवाल क्यों नहीं उठाया गया?
इसी तरह प्लेसमेंट ठेके में कथित ओवरराइटिंग, करीब ₹16.62 लाख पुराने सीसी रोड भुगतान, ₹75 लाख गौरव पथ अग्रिम, ₹27.68 लाख पोल-ट्रांसफार्मर भुगतान, वार्ड 7 के कथित अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पेवर ब्लॉक, अटल परिसर, ₹19.25 लाख नाला कार्य तथा ₹25.97 लाख महिला स्व-सहायता समूहों के भुगतान को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
सवाल: यदि ये अनियमितताएं थीं तो पहले शिकायत क्यों नहीं?
जवाब: क्या अब नई व्यवस्था आते ही नियम और भ्रष्टाचार दोनों याद आ गए?
महिला समूहों को कथित राजनीतिक लड़ाई का मोहरा बनाए जाने की चर्चा भी है। वहीं पूर्व पदस्थापना में चौधरी पर कार्रवाई/निलंबन का हवाला देकर उनके पक्ष में खड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा है—निष्पक्ष जांच होगी या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बिलाईगढ़ का विकास फिर पिसेगा


















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