जिला सिवनी मध्यप्रदेश
अहंकार घटाओ आत्मचिंतन बढाओ -----
मुनि श्री निर्बेग साग़र जी
दशलक्षण महापर्व — आज का उत्तम आकिंचन्य धर्म
सी एन आई न्यूज सिवनी/ लखनादौन
जैन मंदिर में
मुनि श्री १०८ निर्वेगसागर जी महाराज पाठशाला प्रणेता संसंघ के पावन सान्निध्य में*श्रावक संस्कार शिविर — चल रहे है जिस पर
आज मुनि श्री ने विशाल जनसमूह को उत्तम आकिंचन्य धर्म का अत्यंत गहरा अर्थ समझाते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में बार-बार यह प्रश्न करना चाहिए
जिसे मैंने अपना माना है, क्या वास्तव में वह मेरा है,
जिस शरीर को हम कहते हैं “मेरा शरीर”, क्या यह वास्तव में हमारा है?जिस धन, घर, परिवार, पद और प्रतिष्ठा को हम “मेरा” कहते हैं, क्या इनमें से कोई वस्तु हमारे साथ सदा रहने वाली है*
उत्तम आकिंचन्य का अर्थ है—अकिंचन होना, ममत्व को कम करना और “मेरा-मेरा” के भाव से ऊपर उठना
भगवान बाहुबली का प्रेरक प्रसंग
प्रवचन में भगवान बाहुबली के मस्तकाभिषेक का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि विशाल प्रतिमा पर बड़े-बड़े स्वर्ण कलशों और घड़ों से अभिषेक किया गया, लेकिन जल की धारा चरणों तक नहीं पहुँच रही थी। तभी एक साधारण माँ अपने बच्चे के साथ थोड़े से जल से भगवान का अभिषेक कराने पहुँची। बच्चे ने निर्मल भावना से जैसे ही भगवान के मस्तक पर जल अर्पित किया, जल की धारा चरणों तक पहुँच गई
संदेश यह है कि भगवान को वस्तु की विशालता नहीं, भावना की निर्मलता प्रिय है।इसी प्रकार जीवन में हम कितना रखते हैं, कितना छोड़ते हैं या कितना करते हैं—इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि हमारे भीतर ममत्व और अहंकार कितना है।
आकिंचन्य जीवन में बढ़ाएँ
आकिंचन्य केवल प्रवचन सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का धर्म है
आज से अपने जीवन में थोड़ा-थोड़ा आकिंचन्य बढ़ाएँ
वस्तुओं का अनावश्यक संग्रह कम करें।
यह मेरा है” इस भावना पर चिंतन करें।
धन का सदुपयोग धर्म और सेवा में करें।
प्रतिष्ठा और दिखावे की चाह कम करें।
शरीर और बाहरी पदार्थों के प्रति ममता कम करें।
सामायिक में बैठकर आत्मा के स्वरूप का चिंतन करें।
आज का मुख्य संदेश
“मेरा क्या है?” इस प्रश्न से आत्मचिंतन शुरू होता है।
धन मेरा नहीं
घर मेरा नहीं
पद मेरा नहीं
शरीर भी स्थायी रूप से मेरा नहीं
तो फिर वास्तविक मेरा क्या है?यही प्रश्न हमें बाहरी पदार्थों से हटाकर आत्मा की ओर ले जाता है।
उत्तम आकिंचन्य धर्म कहता
परिग्रह घटाओ,
ममता घटाओ,
अहंकार घटाओ
और आत्मचिंतन बढ़ाओ।
आकिंचन्य को केवल दस दिनों तक नहीं, अपने पूरे जीवन में धीरे-धीरे बढ़ाने का संकल्प ले,,
जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.