जगन्नाथ पुरी धाम पहुंचे छत्तीसगढ़ के श्रृद्धालु दर्शन कर लिया भगवान जगन्नाथ स्वामी का आशीर्वाद
सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी। छत्तीसगढ़ के श्रृद्धालु पहुंचे भगवान जगन्नाथ के दरबार, मांगी भगवान श्री जगन्नाथ से परिवार एवं प्रदेश के सुख-समृद्धि की कामना।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का ह्रदय आज भी जगन्नाथ भगवान की काठ की मूर्ति में बसा हुआ है। और धड़कता रहता है।
भगवान जगन्नाथ मंदिर की सफाई सोने से बने हुए झाड़ू से होती है।
भगवान जगन्नाथ को कलियुग का भगवान भी माना जाता है। उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ जी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ विराजमान है। परन्तु भगवान जगन्नाथ से जुड़े हुए बहुत से ऐसे भी रहस्य है जिसका आज तक कोई पता नहीं कर सका।
जगन्नाथ भगवान की प्रतिमा हर 12 वर्ष बाद बदल दी जाती है। और जब प्रतिमा को बदलना होता है तो पुरी में हर जगह की लाइट बंद कर दी जाती है मंदिर के चारों तरफ CRPF सेना लगा दी जाती है ताकि कोई भी व्यक्ति मंदिर में घुस न पाए।
मंदिर में भी पुरी तरह से अँधेरा रहता है और पुजारी के आँखों पर भी एक पट्टी बांध दी जाती है और पुजारी अपने दोनों हाथों में दस्ताने पहन कर पुरानी मूर्ति में से एक ब्रह्म पदार्थ निकाल कर नई मूर्ति में स्थापित करते है। ये पदार्थ क्या है आज तक कोई पता नहीं लगा सका है और हजारों वर्षों से एक मूर्ति से दूसरी मूर्ति में परिवर्तित करते रहते है।
इसका संबंध भगवान श्री कृष्ण से है।
जब जगन्नाथ भगवान की प्रतिमा बदली जाती है तो उसके साथ साथ मंदिर के हर प्रतिमा को बदल दिया जाता है।
प्रतिमा तभी बदला जाता है की जब आषाढ़ के दो महीने आते है वैसे ऐसा 12 से 14 सालों में एक बार होता है। जब ऐसा होता है तो इसे नव कलेवर कहते हैं। छत्तीसगढ़ के भाटापारा से दर्शन के लिए आए जितेंद्र शर्मा ने बताया कि वे अपने परिवारजनों के साथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के दर्शन के लिए आए हैं।





















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