ब्रेकिंग बडेकमेली
लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़
रिपोर्टर। असीम पाल ब्यूरो
चीफ दंतेवाड़ा
कलेक्टर के आदेश के 14 साल बाद भी नहीं मिला मकान, पैतृक संपत्ति के लिए संघर्ष कर रही आदिवासी महिला
ग्राम पंचायत बडेकमेली की रीता मरकाम का आरोप—पिता की जमीन पर बने मकान में रह रहे ठेकेदार नहीं कर रहे खाली; मामला एसडीएम न्यायालय में लंबित
दंतेवाड़ा जिले के बडेकमेली पंचायत में अपनी ही पैतृक संपत्ति का अधिकार पाने के लिए बडेकमेली गांव की आदिवासी महिला रीता मरकाम वर्षों से संघर्ष कर रही हैं। रीता मरकाम का आरोप है कि उनके दिवंगत पिता की जमीन पर बने मकान में ठेकेदार साजी पेरुमल किराए पर रह रहे हैं, लेकिन अब मकान खाली नहीं कर रहे हैं। महिला के मुताबिक, वर्ष 2012 में कलेक्टर की ओर से जमीन खाली करने संबंधी आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक मकान खाली नहीं हो सका।
रीता मरकाम के पिता की मृत्यु हो चुकी है। महिला का कहना है कि पिता की जमीन पर बने मकान का अधिकार उन्हें मिलना चाहिए, लेकिन वर्षों से चल रहे विवाद के कारण वह अपनी ही पैतृक संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रही हैं। वर्तमान में मामला एसडीएम न्यायालय में लंबित है।
2012 के आदेश के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
महिला के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2012 में कलेक्टर की ओर से जमीन खाली करने संबंधी आदेश जारी किया गया था। इसके बाद भी मकान खाली नहीं होने को लेकर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर कलेक्टर के आदेश के बाद संबंधित विभाग ने क्या कार्रवाई की? यदि कार्रवाई हुई तो मकान आज तक खाली क्यों नहीं हुआ? और यदि मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में चला गया था, तो इतने वर्षों में इसकी स्थिति क्या रही?
दयनीय स्थिति में जीवन गुजार रही महिला
रीता मरकाम का कहना है कि पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद के कारण उनकी स्थिति लगातार कठिन होती गई है। पिता की मृत्यु के बाद भी उन्हें अपनी जमीन और मकान का अधिकार हासिल करने के लिए प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। महिला आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन गुजार रही हैं और उन्हें अब एसडीएम न्यायालय से न्याय मिलने की उम्मीद है।
ठेकेदार ने बयान देने से किया इनकार
मामले में ठेकेदार साजी पेरुमल से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। उनसे जमीन, मकान में रहने और वर्ष 2012 के कलेक्टर आदेश के संबंध में जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने इस मामले में बयान देने से इनकार कर दिया।
अब प्रशासन से जवाब की उम्मीद
मामला अब एसडीएम न्यायालय में लंबित है। ऐसे में वर्ष 2012 के कलेक्टर आदेश, राजस्व अभिलेख और वर्तमान न्यायालयीन स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। वर्षों से अपनी पैतृक संपत्ति के लिए संघर्ष कर रही रीता मरकाम को आखिर कब न्याय मिलेगा, यह अब प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर है।
सवाल यह है कि यदि वर्ष 2012 में जमीन खाली करने का आदेश जारी हुआ था, तो 14 साल बाद भी उस आदेश का प्रभाव जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है?


















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