महासमुंद : वैश्विक महामारी कोरोना के कारण इस बार महा मुहुर्त माना जाने वाले दिन अक्षय तृतीया पर में शादियां नहीं होगी। न तो शहनाई की धुन सुनाई देगी और न ही बैंड बाजे की। भले ही विवाह के बंधन में युवक-युवती नहीं जुड़ पाएंगे लेकिन बच्चे अपने मिट्टी के गुड़िया-गुड्डा का विवाह घर-घर रचाएंगे। प्रदेश में अक्ती के नाम से मशहूर अक्षय तृतीया पर छोटे-छोटे बच्चे अपने घर में पुतरा-पुतरी का ब्याह रचाने की तैयारी में जुट गए हैं। पर्व के एक दिन पहले हालांकि बाजार में सन्नाटा पसरा था। इसके बावजूद कुछ जगहों पर गुड्डा-गुड़ियां बिकते नजर आए, अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए पुतरा-पुतरी की खरीदारी की। कई घरों में छत्तीसगढ़ की परंपरा के अनुसार छोटे बच्चे अपने गुड्डा-गुड़िया का ब्याह रचाने की रस्म निभाएंगे। इस साल घर से बाहर नहीं निकलना है इसलिए बच्चे तालाब से मिट्टी नहीं लाएंगे बल्कि घर पर ही सादगी से फेरे करवाएंगे। छोटे बच्चे अपनी संस्कृति से अवगत हो सकें इसके लिए माता-पिता भी रस्म निभाने में सहयोग करेंगे। लाॅकडाउन कि स्थिति मे बड़े लोग भी घर पर रहने से गुड्डे-गुड़िया के खेल में शामिल होकर, बच्चों के साथ मस्ती भी कर रहे हैं। ऐसे ही गुड्डे-गुड़िया का शादी करते हुए, बच्चों के साथ घर के बड़े लोग चुलमाटी, तेल हल्दी, बारात स्वागत, तिलक प्रथा का भरपूर आनंद ले रहे हैं। आज अक्ती में गुड्डा-गुड़िया का विवाह करते काव्या गोस्वामी, तनुजा साहू, दुर्गा साहू, तारणी गोस्वामी, कांति साहू, ज्योति, नव्या गोस्वामी, रिया, जिया साहू ने बड़ी ही धूम-धाम से गुड्डे-गुड़िया का विवाह कराया।



















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