HomeChhattisgarhRaipurछत्तीसगढ़रायपुरमुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र : उधार की सीमा जीएसडीपी के 6 प्रतिशत और वित्तीय घाटा 5 प्रतिशत रखने का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र : उधार की सीमा जीएसडीपी के 6 प्रतिशत और वित्तीय घाटा 5 प्रतिशत रखने का किया अनुरोध
तालाबंदी के कारण राज्य को हो रही वित्तीय कठिनाईयों से कराया अवगत
पंकज शर्मा, रायपुर 01 मई 2020 : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर 22 मार्च से लागू तालाबंदी के कारण राज्य के सामने आ रही वित्तीय कठिनाईयों की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है। श्री बघेल ने प्रदेश में जरूरतमंद लोगों को राहत देने सहित राज्य के कामकाज के संचालन और विकास गतिविधियों के लिए अधिक आर्थिक संसाधन जुटाने के उद्देश्य से राज्य को इस वर्ष उधार की सीमा जीएसडीपी के 6 प्रतिशत तक शिथिल करने और राज्य का वित्तीय घाटा भी इस वर्ष अपवाद के रूप में जीएसडीपी का 5 प्रतिशत के बराबर रखने की सहमति प्रदान करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र में लिखा है कि कोरोना वायरस रोग 19 महामारी के प्रसार को रोकने के प्रभावी कदम के रूप में 22 मार्च 2020 से छत्तीसगढ़ सहित देश में की गई सम्पूर्ण तालाबंदी के कारण सभी आर्थिक गतिविधियां बंद है, जिससे राज्य के राजस्व में हानि हुई है। संपूर्ण तालाबंदी ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सबसे अधिक प्रभावित किया है, जिनमें विशेषकर दैनिक आय अर्जित करने वाले, श्रमिक, छोटे दुकानदार एवं अधिकांश ग्रामीण परिवार शामिल है।
यह फसलों की कटाई का भी समय है, जिनमें किसानों को फसल काटने तथा उसे बेचकर जीवन यापन में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ में समाज के इन वर्गाें की जनसंख्या अधिक है, अतः उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा राहत प्रदान करने के लिए की गई पहल के अलावा राज्य द्वारा कई प्रकार के सामाजिक एवं आर्थिक उपायों के माध्यम से उचित राहत प्रदान करना एक कठिन कार्य है। श्री बघेल ने लिखा है कि राज्य के सभी विभागों को वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए बजट आवंटन जारी किया जा चुका है एवं मूलभूत आवश्यकताओं के लिए व्यय हेतु आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता है। वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्य को इस वित्तीय वर्ष के प्रथम 9 माह के लिए राज्य की शुद्ध उधार सीमा के 50 प्रतिशत के बराबर 5375 करोड़ रूपए के बाजार ऋण की सहमति प्रदान की गई है। जो कि इस अवधि में व्यय की पूर्ति के लिए अपर्याप्त है। चूंकि इस वर्ष राज्य की राजस्व प्राप्तियों में कमी की आशंका है, अतः राज्य की शुद्ध उधार सीमा तथा राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित वित्तीय घाटे की सीमा (राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3 प्रतिशत) में शिथिलीकरण आवश्यक है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय से ही वित्तीय अनुशासन का कड़ाई से पालन करने वाला राज्य रहा है तथा वर्तमान में यह सबसे कम ऋण भार (जीएसडीपी का 19.2 प्रतिशत) तथा सबसे कम ब्याज भुगतान (कुल राजस्व प्राप्तियों का 7.4 प्रतिशत) करने वाला राज्य है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा है कि आपदा के समय असाधारण उपायों की आवश्यकता होती है, अतः राज्य को इस वर्ष उधार की सीमा जीएसडीपी के 6 प्रतिशत तक शिथिल करते हुए सहमति दी जाए। साथ ही राज्य का वित्तीय घाटा भी इस वर्ष अपवाद के रूप में जीएसडीपी का 5 प्रतिशत के बराबर रखे जाने की भी सहमति प्रदान की जाए। वित्तीय आपदा की इस घड़ी में राज्य द्वारा यथासंभव मितव्ययता के लिए उठाए जा रहे अन्य कदमों के साथ-साथ इन शिथिलताओं से कुछ राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि सम्पूर्ण देश तथा छत्तीसगढ़ में आयी इस आपदा के कठिन समय में केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की इन न्यायोचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। यह उपाय चालू वित्तीय वर्ष में हमारे आवश्यक व्ययों की पूर्ति करने में काफी सहायक होंगे।
No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.
गुरु सियाग सिद्धयोग : निःशुल्क
"गुरु सियाग सिद्धयोग" के सभी साधक ध्यान के साथ साथ एक मन्त्र का जाप करते है जिसे गुरुदेव ने संजीवनी मंत्र कहा है।
संजीवनी मंत्र की यह विशेषता है की यदि कोई मनुष्य किसी रोग पीड़ित है या काल ग्रसित होने वाला है उसके कान में यदि गुरुदेव की आवाज में संजीवनी मंत्र सुना दे और वो उसी समय उसका जाप आरम्भ कर दे तो वह उस रोग या कष्ट से नही मर सकता।
यह कैसे संभव है ?
इसका उत्तर है की यह मानवीय काया वास्तव में प्रकाश और उसके स्पंदनो से बनी है। ये स्पंदन मानवीय काया में उपस्थित सप्त चक्रों द्वारा नियंत्रित किये जाते है। जब किसी चक्र के प्रकाश- स्पंदन कम हो जाते है तो उस चक्र से सम्बंधित रोग या कष्ट से मनुष्य पीड़ित हो जाता है। जब सिद्धयोग का साधक संजीवनी महामंत्र का जाप और ध्यान करता है तो मूलाधार में प्राण- प्रवाह सक्रिय हो जाता है । मूलाधार इस शरीर रूपी यंत्र का मेन स्विच है जब यहाँ बिजली पहुचती है तो ऊपर के सभी चक्र अपने आप प्रकाशित हो जाते है और स्पंदित होने लगते है।
जिस चक्र के स्पंदन कम होते है वो इस अतिरिक्त प्राण ऊर्जा को प्राप्त कर पुनः पूर्ववत स्पंदित होने लगते है और रोग मिट जाता है।
दूसरे शब्दों में कहें तो संजीवनी मन्त्र का जाप शरीर के रुधिर में उपस्थित कार्बन को समाप्त कर उसे आक्सीजन से भर देता है। ये अतिरिक्त आक्सीजन के अणु सीधे ही प्राण धारा में रूपांतरित हो जाते है जो सुषुम्ना नाडी में स्थित सभी चक्रों में ऊर्जा का संचार कर देते है।
शिराओ में प्रवाहित अशुद्ध रक्त का संचय रुक जाने से ऊतक नही मरते अर्थात उनका ह्रास नही होता । जब ऊतक या टिश्यू का ह्रास नही होगा तो रोग नही हो सकता।
ये जो कुछ भी परिवर्तन आपके शरीर में हो रहा है ये पूरी तरह से वैज्ञानिक- क्रियात्मक परिवर्तन है इसमें चमत्कार जैसा कुछ भी नही है।
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र जोधपुर राजस्थान
www.the-comforter.org
सी एन आई न्यूज़ जिला ब्यूरो● छोटू यादव रायपुर जिला ब्यूरो●मीनू साहूबालोद जिला ब्यूरो●सुखबली खरेमुंगेली जिला ब्यूरो●अमन शाहबस्तर जिला ब्यूरो ● मोहोम्मद अज़हर हनफ़ीभाटापारा रिपोर्टर●हितेश मानिकपुरी प्रमोटर/रिपोर्टर सी.जी. ●पंकज शर्माक्राइम रिपोर्टर सी.जी.● मुख्य कार्यालय संपर्क नंबर- 0883-9215630● मेल : contact@centralnews-india.com● वेब : www.centralnews-india.com● गूगल प्लेस्टोर : Central News India में सर्च करें और अपने मोबाइल में इंसटाल करे एवं सब्सक्राइब करें
No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.