जबकि खादी से नवागांव घाट जाने के लिए जंगल के रास्ते वर्षों से पुराने है, जबकि जंगल के अंदर खादी का पचास साठ एकड़ खेती भूमि भी है ।
साल्हेवारा ग्रामीणों ने भी अपने चारागाह खार में मवेशियों को चरने से मना कर रहे हैं ।
आखिर खादी के मवेशीय हरे भरे चारे चरे तो कहा प्रदेश सरकार द्वारा गायों के संरक्षण के लिए कई उपाय कर रहे हैं ।
खादी में मवेशियों के निस्तार के लिए अन्य कोई जगह भी नहीं है ।
डिप्टी रेंजर योगेश त्रिपाठी ने बताया कि खादी के कुछ लोग हरे भरे वृक्षों को भी काटकर ले जाते है ।
अंचल के ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए चरने के चारागाह की व्यवस्था की मांग प्रशासन से की है ।


















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