अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली - माता की भेंट गाने वाले जाने माने गायक नरेंद्र चंचल 80 वर्षीय का निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे जिसके चलते अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। वे अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ ग्रे हैं।
नरेंद्र चंचल ने बचपन मातारानी के भजन गाते हुये बिताया था। उनके भजन घर-घर मशहूर हुये। नरेंद्र चंचल ने बचपन से ही अपनी मां कैलाशवती को मातारानी के भजन गाते हुये सुना मां के भजनों को सुन-सुनकर उन्हें भी संगीत में रुची होने लगी। नरेंद्र चंचल की पहली गुरु उनकी मां थीं , इसके बाद चंचल ने प्रेम त्रिखा से संगीत सीखा, फिर वह भजन गाने लगे थे।बॉलीवुड में उनका सफर राज कपूर के साथ शुरू हुआ , फिल्म 'बॉबी' में 1973 में उन्होंने 'बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो' गाया था। फिल्म बॉबी के बाद नरेंद्र चंचल ने वर्ष 1974 में बेनाम और रोटी कपड़ा और मकान फिल्म के लिये गाने गाये। लता मंगेशकर के साथ नरेंद्र चंचल बाकी कुछ बचा को महंगाई मार गई गाना गया। इसके अलावा उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ 1980 में तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये , वर्ष 1983 में आशा भोसले के साथ चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है और दो घूंट पिला के साकिया, हुये हैं कुछ ऐसे वो हमने पराये जैसे गीत नरेंद्र चंचल ने गाये। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में गाने गाये लेकिन उन्हें फिल्म 'आशा', में गाये माता के भजन 'चलो बुलावा आया है' से पहचान मिली जिसने रातों रात उन्हें मशहूर बना दिया। हाल ही में नरेंद्र चंचल ने कोरोना को लेकर एक गाना गाया था, जो काफी वायरल हुआ था। नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टुबर 1940 को अमृतसर के नमक हांडी में हुआ था। उनका पालन पोषण बहुत ही धार्मिक वातावरण में हुआ था , काफी संघर्ष के बाद उन्हें बॉलीवुड में काम मिला। उन्होंने बॉबी, बेनाम और रोटी कपड़ा और मकान जैसी कई फिल्मों में भी गाने गाये थे। माता वैष्णो देवी को लेकर उनकी खास आस्था थी , वे वर्ष 1944 से लगातार माता वैष्णो देवी के दरबार में आयोजित होने वाली वार्षिक जागरण में हाजिरी लगाते थे, लेकिन इस बार कोरोना की वह से ये संभव नहीं हो पाया था।


















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