अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली -- कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इन कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगाकर मामले को सुलझाने हेतु चार सदस्यीय कमेटी बनायी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्मित कमेटी के सदस्य और भाकियू के प्रधान भूपेंद्र सिंह मान ने कमेटी की सदस्यता छोड़़ दी है। इससे किसानों और सरकार के बीच सुलह कराने की सुप्रीम कोर्ट की कोशिश को करारा झटका लगा है। इसके साथ ही 15 जनवरी को होने वाली वार्ता पर भी संकट छा गया है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में शामिल भूपेन्द्र सिंह मान ने कमेटी से खुद को अलग कर लिया है। हालाँकि ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य ने दावा किया है कि भूपेन्द्र सिंह मान और उनके परिवार को विदेशों से फोन पर धमकियाँ दी जा रही है। भूपिंदर सिंह मान ने लिखित वक्तव्य में कमेटी में शामिल करने के लिये सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुये आगे लिखा है कि एक किसान और संगठन का नेता होने के नाते मैं किसानों की भावना जानता हूंँ। मैं अपने किसानों और पंजाब के प्रति वफादार हूंँ। इन के हितों से कभी कोई समझौता नहीं कर सकता। मैं इसके लिये कितने भी बड़े पद या सम्मान की बलि चढ़ा सकता हूंँ। मैं कोर्ट की ओर से दी गई जिम्मेदारी नहीं निभा सकता , मैं खुद को इस कमेटी से अलग करता हूंँ।
कौन हैं भूपेंद्र सिंह मान
पंजाब प्रांत के बटाला जिला निवासी भूपेंद्र सिंह मान (81 वर्षीय) भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। 15 सितंबर 1939 को गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में पैदा हुये सरदार भूपिंदर सिंह मान को किसानों के संघर्ष में योगदान के लिये भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 1990 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था। वे वर्ष 1990 से 1996 तक राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य रह चुके हैं। वे कांग्रेस का वर्ष 2012 , 2017 विधानसभा और 2019 में लोकसभा चुनावों में समर्थन कर चुके हैं। उनके पिता अनूप सिंह इलाके के एक प्रमुख जमींदार थे। इस बार वे केंद्र के कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे थे।गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगाते हुये कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी मेंभारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह मान भी थे। कमेटी में अनिल धनवत कमिटी में शामिल दूसरे किसान नेता हैं , जो शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं। प्रमोद कुमार सुप्रीम कोर्ट द्वार गठित कमिटी के तीसरे सदस्य हैं. जो राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन के पूर्व निदेशक हैं। भारतीय कृषि अर्थशास्त्र का समाज, इंडिया सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग पर उन्होंने फेलोशिप की है , उत्तराखंड के अल्मोड़ा में उनका जन्म हुआ था। चौथे सदस्य अशोक गुलाटी हैं , जो कृषि अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ हैं। वे भारत सरकार के पूर्व सलाहकार हैं , कई फसलों के एमएसपी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं।



















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