अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
अहमदाबाद -- किसी राष्ट्र का भविष्य तभी उज्ज्वल होता है जब वो अपने अतीत के अनुभवों और विरासत के गर्व से पल पल जुड़ा रहता है। भारत के पास तो गर्व करने के लिये अथाह भंडार है , समृद्ध इतिहास है , चेतनामय सांस्कृतिक विरासत है। हमारे यहां नमक को कभी उसकी कीमत से नहीं आंका गया। हमारे यहां नमक का मतलब है- ईमानदारी . हमारे यहां नमक का मतलब है- विश्वास . हमारे यहां नमक का मतलब है- वफादारी।हम आज भी कहते हैं कि हमने देश का नमक खाया है. ऐसा इसलिये नहीं क्योंकि नमक कोई बहुत कीमती चीज है बल्कि ऐसा इसलिये क्योंकि नमक हमारे यहां श्रम और समानता का प्रतीक है। आज भी भारत की उपलब्धियां सिर्फ हमारी अपनी नहीं हैं, बल्कि ये पूरी दुनियां को रोशनी दिखाने वाली हैं , पूरी मानवता को उम्मीद जगाने वाली हैं। भारत की आत्मनिर्भरता से ओतप्रोत हमारी विकास यात्रा पूरी दुनियां की विकास यात्रा को गति देने वाली है। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में ये हमारे सामने प्रत्यक्ष सिद्ध भी हो रहा है। मानवता को महामारी के संकट से बाहर निकालने में , वैक्सीन निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता का आज पूरी दुनियां को लाभ मिल रहा है।आज दुनिया के देश भारत का धन्यवाद कर रहे हैं, भारत पर भरोसा कर रहे हैं। यही नए भारत के सूर्योदय की पहली छटा है। यही हमारे भव्य भविष्य की पहली आभा है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ को समर्पित " आजादी के अमृत महोत्सव" के आगाज करते हुये कही। पीएम मोदी ने कहा कि यह महोत्सव वैश्विक शांति और राष्ट्र के विकास का महोत्सव है। इस महोत्सव की शुरुआत दांडी मार्च की वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है। हम सभी का सौभाग्य है कि हम आजाद भारत के इस ऐतिहासिक कालखंड के साक्षी बन रहे हैं। आज दांडी यात्रा यात्रा की वर्षगांठ पर हम बापू की इस कर्म स्थली पर इतिहास बनते भी देख रहे हैं और इतिहास का हिस्सा भी बन रहे हैं। अहमदाबाद के साबरमती आश्रम आज एक बार फिर उस दांडी मार्च का गवाह बन रहा है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सबसे बड़े संघर्ष की मजबूत नींव तैयार की थी। बारह मार्च साल 1930 में महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी. आज उस संघर्ष को याद करने के लिये प्रतीकात्मक रुप से यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा मैं इस पुण्य अवसर पर बापू के चरणों में अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। मैं देश के स्वाधीनता संग्राम में अपने आप को आहूत करने वाले, देश को नेतृत्व देने वाली सभी महान विभूतियों के चरणों में आदरपूर्वक नमन करता हूं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत की उपलब्धियां आज सिर्फ हमारी अपनी नहीं हैं, बल्कि ये पूरी दुनियां को रोशनी दिखाने वाली हैं, पूरी मानवता को उम्मीद जगाने वाली हैं। भारत की आत्मनिर्भरता से ओतप्रोत हमारी विकास यात्रा पूरी दुनिया की विकास यात्रा को गति देने वाली है। उन्होंने पांच स्तंभों का किया जिक्र करते हुये कहा कि पांच स्तम्भ आजादी की लड़ाई के साथ साथ आजाद भारत के सपनों और कर्तव्यों को देश के सामने रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे। इन पांच स्तंभों में स्वतंत्रता संग्राम , 75 साल पर विचार , 75 साल पर उपलब्धियां , 75 पर एक्शन और 75 पर संकल्प शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'आजादी का अमृत महोत्सव यानि- आजादी की ऊर्जा का अमृत , आजादी का अमृत महोत्सव यानि - स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणाओं का अमृत , आजादी का अमृत महोत्सव यानि - नये विचारों का अमृत , नये संकल्पों का अमृत. आजादी का अमृत महोत्सव यानि - आत्मनिर्भरता का अमृत। पीएम मोदी ने कहा कि आज आजादी के अमृत महोत्सव का प्रारंभ हो रहा है। अमृत महोत्सव 15 अगस्त, 2022 से 75 सप्ताह पूर्व आज प्रारंभ हुआ है जो 15 अगस्त 2023 तक चलेगा। उन्होंने आजादी से जुड़ी विभूतियों को भी नमन किया। पंडित नेहरू, बाबा साहेब अंबेडकर , मौलाना आजाद , सरदार पटेल के सपनों के भारत को बनाने के लिये हम आगे बढ़ रहे हैं। देश के इतिहास में ऐसे कई संघर्ष हैं, जिनका नाम आज नहीं लिया जाता है लेकिन हर किसी का अपना एक महत्व रहा है। पीएम मोदी बोले कि भक्ति आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया और पूरे देश में आजादी के महोत्सव को जन-जन तक पहुंचाया।
इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद हवाई। अड्डा उतरने के बाद साबरमती आश्रम पहुंचे। जहां हृदय कुंज में महात्मा गांधी की तस्वीर को माला अर्पित की। इस दौरान उन्होंने 'आजादी के अमृत महोत्सव' की वेबसाइट को भी लॉन्च किया , साथ ही कार्यक्रम स्थल में एक बड़े चरखे का अनावरण किया। इसके अलावा साबरमती आश्रम के विजिटर बुक में अपना संदेश भी लिखा। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका में लिखा है कि यह महोत्सव हमारे स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति श्रद्धांजलि है। साबरमती आश्रम आकर और बापू की प्रेरणा से राष्ट्र निर्माण का मेरा दृढ़ निश्चय और भी मजबूत हुआ है। ‘महात्मा गांधी ने आत्म निर्भरता और आत्म विश्वास का संदेश यहीं से दिया था। आजादी का अमृत महोत्सव हमारे लोगों द्वारा हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और स्वाधीनता संग्राम को श्रद्धांजलि है। इस समारोह के दौरान देश आजादी की लड़ाई के समय की न केवल सभी महत्वपूर्ण उपलब्धियों और महत्वपूर्ण कालखंड को याद करेगा बल्कि हमारे भविष्य के विकास के लिये नई ऊर्जा भी प्राप्त करेगा। मुझे विश्वास है कि बापू के आर्शीवाद से हम भारतीय अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे और इस अमृत महोत्सव के दौरान तय किये लक्ष्यों को भी प्राप्त करेंगे। बता दें दांडी मार्च को भी 91 बरस हो रहे हैं। पीएम मोदी साबरमती आश्रम से एक यात्रा का आगाज किया जो दांडी मार्च की याद में की जा रही है , ये यात्रा कुल 386 किमी. की होगी।अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभय घाट के पास एक डिजिटल प्रदर्शिनी का भी जायजा लिया। इस प्रदर्शिनी में प्रधानमंत्री मोदी ने फोटो, मैगजीन और दूसरी महत्वपूर्ण भंडार की गई चीजों को देखा और उनका आनंद लिया।
क्या है आजादी का अमृत महोत्सव ?
आजादी का अमृत महोत्सव भारत के स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिये भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला है। महोत्सव जन भागीदारी भावना के साथ जन उत्सव के रूप में मनाया जायेगा। स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों के बारे में नीतियों और योजनाओं को तैयार करने के लिये गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।
दांडी मार्च यात्रा का इतिहास
राष्ट्रपिता महात्मागांधी ने दांडी मार्च का आयोजन अंग्रेजों द्वारा नमक के ऊपर कर लगाये जाने के खिलाफ किया था। साबरमती आश्रम से 390 किमी दूर स्थित दक्षिणी गुजरात के दांडी गांव तक की यात्रा उन्होंने 78 लोगों के साथ 25 दिन में पूरी की थी। उन्होंने 06 अप्रैल 1930 को नमक हाथ लेकर नमक विरोधी कानून तोड़ा था।


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.