अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जगन्नाथपुरी --ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाभाग वेद में सन्निहित ज्ञान विज्ञान को सुलभ कराते हुये सूत्रात्मक रूप से संकेत करते हैं कि विज्ञान का एक सिद्धान्त है मैटर इज नथिंग बट एनर्जी लेकिन वेदादि शास्त्र के अनुसार मैटर इज नथिंग बट एनर्जी , एनर्जी इज नथिंग बट सोल ; सोल इज द सुपर सोर्स एंड बेस ऑफ एनर्जी। इसके आधार पर वाक्य बनता है कि मैटर इज नथिंग बट एनर्जी , एनर्जी इज नथिंग बट सोल (आत्मा ), सोल इज द सुपर सोर्स एंड बेस ऑफ एनर्जी। इस प्रकार वो जो एनर्जी है उसका भी आधार , उसका भी नियामक का नाम आत्मा है । इसलिये सोल इज द सुपर सोर्स एंड बेस ऑफ एनर्जी ,यह वैदिक सिद्धान्त है। हमारा जो यह पुराना वैदिक सिद्धान्त है , यह वैज्ञानिकों को भी दिशा दे सकता है। एक बात स्पष्ट है कि भारत की मेधा शक्ति , रक्षा शक्ति , वाणिज्य शक्ति और श्रम शक्ति का उपयोग भारत में ठीक से हो सके , ऐसी क्षमता स्वतंत्र भारत में नहीं है। परतंत्र भारत में तो लाचारी थी , स्वतंत्र भारत में ऐसी कौन सी लाचारी है कि हमारी मेधा शक्ति , रक्षा शक्ति , वाणिज्य शक्ति और श्रम शक्ति बिकती है विदेशी कंपनी में, यहां बिक जाये या बाहर जाकर बिक जाये। एक विचित्र तथ्य है नासा उपग्रह के माध्यम से श्री रामसेतु कि आयु , मानव निर्मित सेतु की आयु साढ़े सत्रह लाख वर्ष प्राचीन सिद्ध की गई थी और अन्त में कहा गया था कि इतना मजबूत है कि अगर मरम्मत हो जाये तो उसके टूटने कि संभावना हजारों वर्ष तक अभी भी नहीं है और अगर त्रेता युग के प्रारंभ में रामजी का अवतार मानते हैं तो ठीक साढ़े सत्रह लाख वर्ष कि स्थिति होती है। अभी भारत की स्थिति क्या है कि हमारे संस्कृत साहित्य के जानकार, वैदिक वांगमय के गिने चुने जानकार हैं जिनको भारत में सम्मान प्राप्त नहीं है , स्नेह प्राप्त नहीं है , सुविधा प्राप्त नहीं है , पूर्ण उपेक्षित हैं उनको नासा ले जाता है। आविष्कार हमारे मस्तिष्क का , मोहर नासा की , समझ गये, ध्यान गया आपका, आविष्कार हमारे वैदिक विद्वानों के द्वारा होता है मोहर लगाता है नासा। बड़ी विचित्र स्थिति है भारत की अभी क्षमता ऐसी नहीं है कि अपनी मेधा शक्ति , रक्षा शक्ति , वाणिज्य शक्ति , श्रम शक्ति का ठीक ठीक उपयोग कर सके। आज हमने यह संकेत किया कि सचमुच में एनर्जी को आप जड़ कह सकते हैं , एनर्जी का जो नियामक है और एनर्जी अंत में प्रलय की दशा में जिसमें जाकर के विलीन हो जाती है जैसे बुद्धि गाढ़ी नींद में हममें जाकर के विलीन हो जाती है उसी प्रकार महाप्रलय कि दशा में एनर्जी जिसमें लीन हो जाती है वही वास्तव में सोल है , वही वास्तव में आत्मा है , तो सोल इज द सुपर सोर्स एंड बेस ऑफ एनर्जी। इतना सिद्धान्त वैदिकों का और है जिस पर ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता है। अब अगर आज पूछ दें , हमने कहा था ना वह शक्ति क्या है ? ओम प्रणव । अब कभी संयोग लगा तो एक नाम ओम या राम के नाम पर सृष्टि की व्याख्या हम लोग एक हजार घंटे के लिये कर सकते हैं , नहीं तो कम से कम एक दो घंटे में सारांश में पूरी सृष्टि का विज्ञान केवल राम या ओम के आधार पर किया जा सकता है।

















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