महेंद्र शर्मा बंटी
आदर्श बौद्ध महासभा नागसेन बुद्ध विहार डोंगरगढ़ के तत्वधान में संविधान निर्माता भारतरत्न डॉ बाबा साहब आम्बेडकर जी की 130 वी जयंती 14 अप्रैल को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हर्ष उल्लास के साथ ही शासन के नियमानुसार मनाये जाना निश्चित किया गया था परन्तु कोरोना महामारी के कारण शासन के द्वारा दिये गये आदेशानुसार जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यकमों को स्थगित कर दिया गया है आयोजन समिति के प्रजेश सहारे ने सूचना देते हुए बताया कि इस वर्ष आयोजित किये गए सभी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम व रैली के कार्यक्रमो को परिस्थिति सामान्य होते तक के लिए स्थगित कर दिया गया है व स्थिति सामान्य होने पर जोर शोर मनाये जाने की बात कही वही साथ ही अपील ही की सभी अपने अपने घरों को लाइटो से सजाये व जयंती के दिन शाम को मोमबत्ती जला कर घरो को रोशन करे व वंदना कर सभी के मंगल की कामना करें|
*सन 1976 में पहली बार निकली गई थी रैली*
डोंगरगढ़ में सर्व प्रथम बौद्ध समाज द्वारा रैली निकालने की शुरुआत की गई जिसमें मुख्य भूमिका शिवनाथ टेम्भूरकर सुखलाल टेम्भूरकर गुहन लाल कचरु सहारे गीताराम सहारे हेतराम जनबन्धु आदि ने निभाई उस समय रिक्शा में फोटो लगा कर बैंड बाजा की धुन में रैली निकाली गई थीं |
*हर वर्ष ऐसे होता था आयोजन*
आदर्श बौद्ध महासभा नागसेन बुद्ध विहार के तत्वधान में हर वर्ष 2 दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था जिसमे 13 अप्रैल को विशाल मोटरसाइकिल रैली व रात को महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के कलाकारों के द्वारा प्रस्तुति दी जाती थी वही रात 12 बजे केक काटकर व आतिशबाजी के साथ जयंती की शुरुआत की जाती थी, 14 अप्रैल को सुबह बुद्ध विहार में परित्राण पाठ कर तहसील परिसर में स्थित बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया जाता था साथ ही नगर पालिका परिसर, रेल्वे मजदूर कांग्रेस द्वारा आयोजित रेल्वे परिसर में कार्यक्रम में शामिल होने के पश्चात शाम 5 बजे नगर के सबसे विशाल रैली की शुरुआत होती थी जिसमे नगर के सभी गणमान्य नागरिक के साथ विशाल डीजे व समाज के ओर्केस्ट्रा कलाकरों के साथ गाने के धुन मे बौद्ध उपासक उपासिका, दुर्ग व राजनांदगांव के कारीगरों द्वारा निर्मित झाँकी व छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करते कलाकारो के साथ पूरे नगर का भ्रमण कर वापस बुद्ध विहार में पहुँच कर जयंती का समापन किया जाता हैं |
*सर्व धर्म एकता की दिखती है झलक*
नगर भ्रमण के दौरान नगर का भाईचारा देखते ही बनता है जगह जगह पर सभी धर्मों के लोगो के द्वारा बाबा साहब की मूर्ति का माल्यापर्ण स्वागत किया जाता हैं व जगह जगह विभिन्न समितियों के द्वारा जलपान की व्यवस्था कि जाती है |



















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