जावेद की रिपोर्ट
देश मे कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुये कई राज्यों मे लॉक डाउन लगाया गया है। इस दौरान मेडिकल दुकान संचालन को अनिवार्य सेवा मे शामिल किया गया है। अन्य अनिवार्य सेवाओं वालों को प्राथमिकता के साथ कोरोना वैक्सीन की सुविधा दी गई है किन्तु मेडिकल दुकान संचालन करने वालों को 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी इनके लिये वैक्सीन की व्यवस्था नही की गई है।
इस संबंध में मेडिकल सेवा कार्य से जुडे वरिष्ठ जानकार व भाजपा नेता सुरेन्द्र पाण्डेय ने राज्य सरकार के प्रति रोष व्यक्त किया है।
श्री सुरेन्द्र पाण्डेय ने राज्य सरकार की कड़ी निंदा करते हुये कहा कि जब अनिवार्य सेवा लेने का समय आता है तो मेडिकल सेवा से जुड़े लोगों का सहारा लिया जाता है ऐसे मे मेडिकल सेवा से जुड़े संचालन हर सम्भव अपनी सेवा जान जोखिम मे डाल कर दे रहे हैं और सहयोग कर रहे हैं , बावजूद इसके मेडिकल दुकान संचालकों के लिये कोरोना वैक्सीन की डोज दिलाने हेतु राज्य सरकार गम्भीर नही है जिससे संक्रमण का खतरा और अधिक बढ जाता है।
दवाई दुकानदार आवश्यक सेवा की कैटिगरी में आते है लेकिन जब वैक्सिनेशन की बारी आती है तो दवाई दुकान दारों को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है lकोरोना काल मे लॉक डॉउन में भी सबसे ज्यादा रिस्क दवाई वालो को ही है संक्रमण की चेन को तोड़ने में भी दवाई वाले अहम रोल अदा कर सकते हैl लेकिन हमारे व्यापार को तो सभी देखते है लेकिन उसके साथ जो सेवा भाव है उस पर किसी का सकारात्मक दृष्टिकोण नही पड़ता
जबकि अभी सबसे ज्यादा दवाई दुकानदार लोग ही कोरोना से संक्रमित हो रहे है
श्री सुरेन्द्र पाण्डेय ने राज्य के मुखिया का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुये मांग किया है कि जब राज्य सरकार ने इस सेवा को अनिवार्य सेवा माना है तो उनका फर्ज बनता है कि इस सेवा से जुड़े लोगों के लिये प्राथमिकता के साथ कोरोना वैक्सीन लगवाने की दिशा में कार्य करें।


















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