अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली -- जस्टिस नथालापति वेंकट रमन्ना भारत के 48वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब 24 अप्रैल को जस्टिस रमन्ना शपथ लेंगे। जस्टिस रमन्ना वर्तमान चीफ जस्टिस एस०ए०बोबड़े के बाद सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम जज हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस०ए० बोबडे ने अपने उत्तराधिकारी यानि अगले सीजेआई की नियुक्ति के लिये 24 मार्च को सरकार को जस्टिस एन०वी० रमना के नाम की सिफारिश भेजी थी। जस्टिस एस०ए० बोबडे का कार्यकाल 23 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
कौन हैं एन०वी० रमना ?
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय में सीनियर जस्टिस एनवी रमना का पूरा नाम नथालपति वेंकट रमण हैं। उनका जन्म 27 अगस्त 1957 को अविभाजित आंध्रप्रदेश के कृष्ण जिले के पोन्नवरम गाँव में एक कृषि परिवार में हुआ था। किसान परिवार से ताल्लुकात रखने वाले शांत और मृदुभाषी स्वभाव के रमना ने साइंस और ला में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट , केंद्रीय प्रशासनिक ट्राइब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में कानून की प्रैक्टिस शुरू की। राज्य सरकारों की एजेंसियों के लिये वो पैनल काउंसिल के तौर पर भी काम करते थे। पहले व दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी थे। उन्होंने आंध्र प्रदेश न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। वे 26 अगस्त 2022 को सेवानिवृत्त होंगे। वे 10 फरवरी, 1983 को वकील बने थे। जस्टिस एन वी रमना ने आंध्रप्रदेश , मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश प्रशासनिक न्यायाधिकरणों और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सिविल , आपराधिक , संवैधानिक , श्रम , सेवा और चुनाव मामलों में उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस की है। उन्हें संवैधानिक , आपराधिक , सेवा और अंतर-राज्यीय नदी कानूनों में विशेषज्ञता हासिल है। वे केंद्र सरकार के लिये अतिरिक्त स्थायी वकील और हैदराबाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में रेलवे के लिये स्थायी वकील के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल के रूप में भी कार्य किया है। उन्हें 27 जून 2000 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। वे 10 मार्च 2013 से 20 मई 2013 तक आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया और भारत और विदेशों में आयोजित और कानूनी महत्व के विभिन्न विषयों पर पेपर्स सबमिट किये। वे दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में वर्ष 2013 को नियुक्त हुये थे। करीब 45 साल का लंबा अनुभव रखने वाले एनवी रमना सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसले सुनाने वाली संवैधानिक बेंच का हिस्सा रहे है। जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की बहाली के रहा है। चीफ जस्टिस के कार्यालय को सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाने का फैसला देने वाली बेंच के भी जस्टिस रमना सदस्य रह चुके हैं।



















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