सामाजीकरण का मूल आधार संचार ही है। मानव-शिशु संसार में पशु की आवश्यकताओं से युक्त एक जैविकीय प्राणी के रूप में जन्म लेता है तथा समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा सामाजिक प्राणी बनता है। इस प्रक्रिया के बिना न तो समाज जीवित रह सकता है, न तो संस्कृति बच सकती है और न तो सामाजिक मनुष्य का निर्माण हो सकता है। समाजीकरण की प्रक्रिया में संचार माध्यमों की भूूमिका महत्वपूर्ण होती है।
आधुनिक संचार माध्यमों के विकास के साथ-साथ समाजीकरण की प्रक्रिया में भी बदलती रहती है। इन परिवर्तनों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि संचार माध्यमों के सामाजिक दायित्वों की जहां बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं आधुनिक समाज भी संचार माध्यमों पर ही पूरी तरह से आश्रित हो गया है। प्रारंभ में जब संचार माध्यमों का विकास नहीं हुआ था, तब समाजीकरण का एक माध्यम साधन मौखिक संचार था, जिसमें परिवार नामक प्राथमिक समूह के सदस्य भाग लेते थे।
यह प्रक्रिया काफी सीमित थी। मुद्रण तकनीकी के विकास से लोगों को पुस्तकों की सुविधा मिली, जिसके कारण ज्ञान के क्षेत्र विस्तृत हुआ। समाचार पत्र, पत्रिका रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल, इंटरनेट इत्यादि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के आगमन से सीखने की प्रक्रिया में ढेरों सूचना संदेश उपलब्ध हो सके।
उपाध्यक्ष श्री राजू देव पाल ने भी संचार माध्यम की भूमिका को बताया-
लोकतंत्र में संचार माध्यमों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। बदलते बिगड़ते हालात में समाज को सचेत करने तथा सरकारों पर अंकुश लगाने के लिए वर्तमान में संचार माध्यमों की भूमिका और भी बढ़ गई है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद सोशल मीडिया का विकास स्वागत योग्य है,
बालोद बाजार जिला प्रमुख व शिव सेना ब्लॉक उपाध्यक्ष श्री प्रकाश पाल ने साहित्य जगत और दूरसंचार के संबंधों को बताया-
संचार माध्यमों के सिद्धांतों और उनको समझने का कार्य सबसे पहले साहित्य जगत के चिंतकों–विचारकों ने ही शुरू किया। भाषा, संचार की प्राथमिक तकनीकों में सबसे महत्त्वपूर्ण रही है, यही कारण है कि आज भी साहित्य,भाषा और संचार के बीच सीधा और साफ संबंध दिखाई देता है। संचार माध्यमों ने एक नयी स्थिति का भी निर्माण किया है। यह है–समाजीकरण में उसकी भूमिका का वर्चस्व। पहले यह जिम्मेदारी साहित्य और कलाओं के पास थी,लेकिन अब इसका मानों हस्तांतरण हो गया हो। लेकिन; संचार,समाज और साहित्य के बीच आज भी एक जटिल,जीवंत और जुझारू रिश्ता बना हुआ है जिसके चलते यह विषय महत्त्वपूर्ण हो जाता है। इसी विषय को संबोधित करती है
प्रदेश माह सचिव दिनेश पाल ने वर्तमान में समाज मे दूरसंचार के महत्व को सामाजिक विकाश के लिए उपयोगी बताया-
समाज है तो संचार माध्यम है। संचार माध्यम है तो समाज है। विचारों का विनिमय और सूचनाओं का साझाकरण इस सामाजिक संरचना की महत्वपूर्ण देन है। सामाजिक जीवन के अच्छे-बुरे कर्म के निर्वाह में संचार माध्यम की अनदेखी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। संचार माध्यम के जिन चयनित आयामों जैसे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, दूरदर्शन, आकाशवाणी, टेलीविज़न चैनल और सोशियल मीडिया पर चर्चा की गई है
वे प्रत्यक्ष रूप से समाज से जुड़े हैं। मीडिया एक सामाजिक व्यवस्था है जो समाज का, समाज के लिए, समाज द्वारा संचालित है। देश की शासन और न्याय प्रणाली में इसका अमूल्य योगदान है। उक्त वर्णित सभी माध्यम स्वयं में साधन और साध्य है जिनका एकमात्र उद्देश्य सतर्कता लाना है।
प्रदेश सचिव श्री भूपेंद्र पाल ने कहा-
आधुनिक युग में संचार का प्रमुख कार्य लोगों को सूचित करना है। इस कार्य को समाचार पत्र, पत्रिका, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, ई-मेल, इंटरनेट, टेलीफोन, मोबाइल, सोशल नेटवर्किंंग साइट्स, यू-ट्यूब, वेब पोर्टल्स इत्यादि के माध्यम से किया जा रहा है। अत: लोगों को सूचित करना संचार का प्रमुख कार्य है।


















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