बेमेतरा नवागढ़ - मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला मे बकस्वाहा जंगल की नीलामी कर दी गई है जिसके कारण करीब औषधीय वृक्षों सहित 230000 {दो लाख तीस हजार} हरे भरे वृक्षों को काटा जाएगा । बेमेतरा नवागढ़ जिले के किशोर राजपूत ने का कहना है की एक स्वस्थ वृक्ष से प्रतिदिन 230 लीटर ऑक्सीजन मिलता है जिससे 07 लोगों को प्राणवायु प्राप्त होता है । आकलन करें तो 5,29,00,000 लीटर ऑक्सीजन प्रतिदिन हम मानवों को मिलता है जिससे प्रतिदिन कुल वृक्षों की संख्या से औसतन 75,57,142 नागरिकों को ऑक्सीजन प्राप्त हो रहा है । जंगल की कटाई से सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा और तापमान मे काफी वृद्धि होगी । इस तापमान को संतुलन करने मे कम से कम 50 वर्ष तक लग सकता है ।
ज्ञात हो की विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी का हमारा देश वर्तमान समय मे covid19 के कारण विश्व ऑक्सीजन की समस्या से जूझ रहा है । संकट गहराता जा रहा है । हम सभी जानते हैं कि देश के विकास और रोजगार के क्षेत्र में अहम योगदान रहा है और पर्यावरण के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य किया जाता रहा है।
उन्होंने पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है की बकस्वाहा जंगल की नीलामी रद्द करते हुए पर्यावरण और मानव जीवन सहित, जीव - जन्तु, पशु – पक्षी को संरक्षित करने के लिए सकारात्मक पहल करने की आशा की हैं।
क्या है मामला क्यों हो रहा है विरोध
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा के जंगल की जमीनमें 3.42 करोड़ कैरेट हीरे दबे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि यहां देश का सबसे बड़ा हीरा भंडार है। लेकिन इन्हें निकालने के लिए 382.131 हेक्टेयर का जंगल खत्म करने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग ने इतने क्षेत्र में पेड़ों की गिनती की है। यहां 2,25,875 पेड़ हैं। इन सभी पेड़ों को काटा जाएगा।
बताया जा रहा है कि इनमें से 40 हजार पेड़ सागौन के हैं, इसके अलावा कई औषधीय पेड़ भी हैं। बता दें कि अभी तक का देश का सबसे बड़ा हीरा भंडार मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बकस्वाहा में पन्ना से 15 गुना ज्यादा हीरे निकलेंगे।
इस स्थान का सर्वे 20 साल पहले बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुआ था। दो साल पहले प्रदेश सरकार ने इस जंगल की निलामी की थी। इसमें आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेस माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सबसे ज्यादा बोली लगा कर टेंडर हासिल किया था। यह जमीन 50 साल के लिए लीज में दी जा रही है।
इस जंगल में 62.64 हेक्टेयर क्षेत्र हीरे निकालने के लिए चिन्हित किया गया है। यहीं पर खदान बनाई जाएगी। इसके लिए कंपनी ने 382.131 हेक्टेयर का जंगल मांगा है। बाकि जमीन का उपयोग कंपनी मलबा डंप करने में करेगी। इस काम के लिए कंपनी 2,500 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है।
हीरे निकालने के लिए पेड़ काटे जाएंगे। जिससे जंगल खत्म होगा और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचेगा। इसके साथ ही वहां रहने वाले वन्य जीवों पर भी संकट आने का खतरा है। बता दें कि मई 2017 में पेश की गई जियोलॉजी एंड माइनिंग मध्यप्रदेश रियोटिंटो कंपनी की रिपोर्ट में तेंदुआ, बाज, भालू, बाहरसिंगा, हिरण और कई जानवर इस जंगल पर होना पाया गया था। लेकिन 5 सालों में ही यह रिपोर्ट बदल गयी। नइ रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इस इलाके में संरक्षित वन्यप्राणी के आवास नहीं है।
इस जंगल के बदले बकस्वाहा तहसील में ही 382.131 हेक्टेयर राजस्व जमीन को वनभूमी में बदला जाएगा। इसको विकसित करने पर आने वाली लागत का भुगतान एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी करेगी।


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.