छत्तीसगढ़ के सुकमा बीजापुर सीमा पर जगरगुंडा के सिलगेर में पुलिस शिविर का विरोध कर रहें ग्रामीणों की गोली लगने से मौत
पुलिस शिविर पर ग्रामीणों की आड़ लेकर कथित नक्सली हमले की क्या है सच्चाई?
सिमगा/बलौदा बाजार :- शिवसेना ज़िला अध्यक्ष संतोष यदु ने बातचीत के दौरान बताया है कि छत्तीसगढ़ राज्य के सुकमा - बीजापुर के सिलगेर क्षेत्र में केंद्रीय रक्षित पुलिस बल के निर्माणाधीन शिविर का विरोध कर रहे ग्रामीणों को गोलियों से भूंंजकर मौत के घाट उतार दिया गया था। लेकिन घटना को हुए दो सप्ताह के समय बीतने के पश्चात भी इस विषय पर केंद्र के गृहमंत्री अमित शाह जी व राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू जी की कोई प्रतिक्रिया नही आना बस्तर के साथ उनके असंवेदनशील व भेदभाव पूर्ण रवैय्ये को प्रदर्शित करने के लिए काफ़ी है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षाबल पूर्ण रूप से केंद्रीय शक्तियों के अधीन कार्य करती है, ऐसे में भोलेभाले आदिवासी बस्तरियों के साथ हुए गोलीकांड को लेकर केंद्र व राज्य के गृहमंत्रियों को बस्तर की जनता को समय रहते ही आश्वास्त करना चाहिए था कि मामले में निष्पक्ष जांच होगी। इस गोलीकांड में अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी शामिल हो तब उनके साथ बिल्कुल उसी तरह से क़ानून व्यवहार करेगी जैसे किसी अन्य हत्यारे के साथ किया जाता है। प्रशासनिक रूप से इस घटना को नक्सल हमला बताया जा रहा है। लेकिन गृहमंत्रियों की चुप्पी बस्तर के आदिवासियों के मन मे क़ानून के प्रति विश्वास को कही और कम ना कर दें? यह भी जांच का मूल विषय होना चाहिए कि आख़िर किस अधिकारी ने ग्रामीणों के विरोध को दबाने वहां उपस्थित सुरक्षा बल के जवानों को फायरिंग का आदेश दिया। या नक्सल घटना है तब ग्रामीणों की रक्षा में सुरक्षा तंत्र फ़ैल क्यों हो गया ?
इस आमानवीय घटना को किस अधिकारी के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। शिविर पर नक्सलियों द्वारा हमला किये जाने की बात भी कही जा रही है, तब क्या नक्सलियों से लोहा लेते समय सुरक्षा बलों की बंदूक से निकली गोलियों ने ग्रामीणों को छलनी कर दिया या नक्सलियों की ही गोलियों का शिकार वे हो गए हैं.?
प्रशासन ने अबतक स्पष्ट क्यों नही किया गोलीकांड में कितने लोगों की मौत हुई और वे कौन थे..?
शिवसेना के तेज़तर्रार युवा ज़िला अध्यक्ष ने प्रशासन पर सवाल खड़े करते यह भी पूंछा हैकि घटना के बाद बस्तर संभाग आयुक्त व संबंधित ज़िला प्रशासन के अधिकारियों सहित पुलिस महकमे के आला अधिकारी भी एक बैठक में सम्मिलित हुए थे, जहां उन्होंने ग्रामीणों को शिविर के लाभ बताए व उन्हें शांत करने का प्रयास किया। लेकिन प्रशासन ने अबतक यह स्पष्ट क्यों नही किया हैकि उक्त कथित गोलीकांड में आख़िर कितने ग्रामीणों की मौत हुई कितने घायल हुए और वे कौन लोग थे..? आरंभ में ०३ शवों के बारे में बताया गया फ़िर कुछ लोगों के घायल होने की बात सामने आई। इसके बाद अब कुछ अधिक लोगों के मौत की बात भी सुनाई देती है। हालांकि रिपोर्ट अनुसार सुरक्षा बलों पर ग्रामीणों ने भी जो पथराव किया वह उचित नही है, लेकिन परिस्थितियों के कारण क्या हुआ यह वहां उपस्थित लोगों के अतिरिक्त कौन जानता है.?
यदु ने कहा कि प्रत्येक कोई चाहता हैकि विकास अंतिम छोर तक पहुंचे यहां तक कि आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की शोसल मीडिया पर आई वीडियो अनुसार वे भी अपने क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल और राशन दुकान जैसे सुविधा चाहते हैं लेकिन किसी तरह नक्सली या पुलिस शिविर के बीच रहकर दोनों पक्ष के आपसी मतभेद से उत्पन्न दहशत में जीवन बिताना नही चाहते हैं। यह भी विचार करना होगा कि आज़ादी के इतने वर्ष पश्चात भी ऐसे माहौल में जब उन्हें प्रशासन पर विश्वास नही है तब केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों द्वारा गोली चलाकर ग्रामीणों की हत्या करने जैसी बात की जा रही है तब कैसे उनके मन में विश्वास बना पाएंगे.? यह चिंतन का विषय है।
प्रशासन व सरकार को चाहिए कि ग्रामीणों को विश्वास में लेकर शिविर निर्माण से होने वाले लाभ की जानकारी पूर्व में ही दी जानी चाहिए थी, जिससे इस तरह की भ्रम न फ़ैलती कि शिविर से उनका कोई नुकसान होने वाला है। सुकमा - बीजापुर के सीमाई क्षेत्र सिलगेर में ग्रामीण दरअसल किसी जानकारी के अभाव में ही पुलिस शिविर का विरोध कर रहे हो ऐसा संभव है। इस तरह तनावपूर्ण वातावरण के बीच यदि पुलिसबल द्वारा गोली चलाकर विरोध कर रहे निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर देने जैसी हुई हो तब क्या यह कार्य ग्रामीणों के मन में सुरक्षा बल व प्रशासन के ख़िलाफ़ अविश्वास उत्पन्न नही करेगा।
शिवसेना, छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रमुख धनजंय सिंह परिहार ने गठित किया जांच दल
विदित होकि बीते दिनों ही शिवसेना छत्तीसगढ़ के माननीय प्रदेश प्रमुख श्री धनंजय सिंह परिहार जी ने भी उच्चस्तरीय बैठक के दौरान आशंका व्यक्त किया कि प्रशासन जल्दबाजी में ऐसा कोई कार्य ना करें जिसका लाभ नक्सलियों या उनके संगठन को पहुंचे। शिवसेना राष्ट्रीय विचारधारा को महत्त्व देने वाली पार्टी है अतः विकास हेतु सदैव उनका समर्थन है, लेकिन विकास के नाम पर जनता पर अत्याचार बर्दाश्त भी नही किया जावेगा। शिवसेना के प्रदेश प्रमुख के निर्देश पर उक्त तथाकथित गोलीकांड की सच्चाई सरकार के सामने लाने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया। इस कमेटी में प्रदेश महासचिव, संभाग प्रभारी चन्द्रमौली मिश्रा सहित सरगिम क़वासी, बस्तर ज़िला अध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् व दंतेवाड़ा ज़िला अध्यक्ष महेश स्वर्ण समिलित थे। यह दल घटना स्थल पर प्रदर्शकारियों व मृतकों के गांव जाकर उनके परिजनों से भेंट कर व प्रत्यक्षदर्शियों व मीडिया प्रतिनिधियों के बीच से जानकारी एकत्रित करने के उद्देश्य से जब जा रही तब रास्ते में उन्हें घटना स्थल पर पहुंचने से पहले ही पुलिसबल द्वारा रोक दिया गया। आगे सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जाने नही दिया गया।
ठीक इसी दौरान इस कथित गोलीकांड की जांच करके आ रहे अधिकारियों से शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल की भेंट हो गई। शिवसेना के प्रतिनिधीमण्डल द्वारा जांच अधिकारियों के समक्ष इस कथित गोलीकांड के संबंध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई गई एवं गोलीकांड में मृत हुए प्रत्येक परिवार को उचित मुआवजा की मांग की गई।
ग़ौरतलब होकि बीते दिनों हुए इस कथित गोलीकांड में ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाकर हत्या का आरोप लगाया था, जबकि प्रशासन के अनुसार कैम्प पर नक्सलियों ने हमला बोल दिया था। लेकिन अब तक इसकी सच्चाई सामने नही है, और घटना में मृतक नक्सल थे या ग्रामीण इसकी भी पुष्टि नही की गई है।
*सेंट्रल न्यूज इण्डिया से प्रकाश पाल *
*Central NEWS India के लिए सिमगा से प्रकाश पाल की खबर*
Central NEWS India
*अब Playstore पर भी उपलब्ध*
Install *Central NEWS India* App & provide Star rating
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.centralnewsindia.centralnewsindia























No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.