साल्हेवारा:--जंगल का एक रक्षक मासूम ग्रामीण को जंगल की ऐसी दशा दुर्दशा देखकर इतनी पीड़ा हो रही है कि जितना जंगल विभाग के कर्मचारियों को होना चाहिए ये वीडियो बनाकर भेजने वाला व्यक्ति रह रहकर सी एन आई न्यूज चैनल और हरिभूमि संवाददाता को नियमित जंगल की दुर्दशा व पतन की बात बता बताकर रोज फोन,वीडियो फोटोग्राफ्स के माध्यम से रह रहकर चेता रहा है
कि सर जंगल को नष्ट होने से बचा लो मानो रो रो कर कह रहा है कि बचा लो सर रोज ही उसकी चीख पुकार मची हुई है और जंगल विभाग कुम्भकर्णीय नींद से जाग नही पा रहा है उसकी तन्द्रा ही नही टूट पा रही है जरहा नवागांव का ये जंगल धड़ाधड़ क्षणिक स्वार्थ के लिए कुछ स्वार्थी तत्व के ग्रामीण वनभूमि पट्टा प्राप्त करने की लालच में हरेभरे वृक्षो को काटकाटकर जला जला कर समतल खेत बनाने में लगे हुवे है पता नही किस वन विभाग के कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है
इन ग्रामीणों को कौन सा बीटगार्ड,डिप्टी रेंजर उस जगह पर तैनात है सरकारी नुमाइंदे ही जब अपने बीत की रक्षा संरक्षा न कर सके तो किस आठ की तनख्वाह व ड्यूटी कर रहे है ऐसे कर्मचारी।
आज आक्सीजन की कमी से लोग तड़प तड़प के मर रहे है किसी से भी ये संकट छिपा नही है सैकड़ो हजारों लाखों लोग इस आक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे है एक ओर फारेस्ट व अन्य महकमा लोगो को पेड़ लगाने नसीहत दे रहा है तो दूसरी ओर यही महकमा जिन्हें जंगल को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी प्राप्त है
उसी में खरा नही उतर पा रहा है इन हरे भरे पेड़ो से ही आक्सीजन प्राप्त होती है उन्हें ही नष्ट होने से नही बचा पा रहा है 20 20,30 30 साल पुराने वृक्षो को बेदर्दी के साथ काट दिया जा रहा है। कुछ लोगो की मानवता तो मरी हुई प्रतीत हो रही है वही दूसरी ओर फारेस्ट भी किंकर्तव्यविमूढ़ दिखाई दे रहा है।
सूत्रानुसार प्राप्त जानकारी अनुसार बर्बादी की ओर जा रहे जंगल का केंद्र खारा वनपरिक्षेत्र के अंर्तगत आता है वहां के रेंजर डिप्टी रेंजर को क्या इस बात की खबर नही होगी,
तेज तर्रार वनमण्डलाधिकारी दिलराज प्रभाकर व वनमंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री माननीय मोहम्मद अकबर व रेगाखार के रेंजर व खारा वन परिक्षेत्र का प्रभार शायद राजेश भास्करन रेंजर का पड़ता है उन्ही की नाक के नीचे इतना बड़ा जंगल का बदस्तूर कटना समझ से परे है।
कोरोना संक्रमण की मार झेल रहा सम्पूर्ण विश्व मे राजनांदगाँव व कवर्धा जिला भी लॉक है लोगो का बाहर निकलना मना है बाहर मौत खड़ी है फिर लोग बाहर कैसे निकल रहे है शासन प्रसासन लगातार निगरानी कर रहा है आपदा में अवसर तलाश कर लोग मनमाने ढंग से वनभूमि पट्टा व अन्य लालच में जंगल को काट रहे है।इसकी सच्चाई तो फारेस्ट ही बता सकता है कि ऐसा क्या है कि वनविभाग मौन है क्या वह फारेस्ट की सर जमी नही है या राजस्व का एरिया है हमारे ज्ञानानुसार तो हमे जंगल ही दिखाई दे रहा है।गम्भीर जांच का विषय है??
मानव जीवन बेहद संकटापन्न है आक्सीजन पर्याप्त यात्रा में जनजीवन को सुरक्षित रखने हेतु अति आवश्यक है उपरोक्त कट रहे जंगल पर तुरन्त संज्ञान लेते हुवे निष्पक्ष जांच की जाना आवश्यक है।
क्यों हो रहा है ऐसा?किसकी शह पर कट रहा है जंगल?क्या कर रहा है वनविभाग?क्यो नही हो रही है कार्यवाही?क्या है इस धड़ल्ले से कटते जंगल की सच्चाई?और भी ढेरों प्रश्न उत्तपन्न होते इन तमाम प्रश्नों पर शीघ्र ही इसकी सच्चाई का पता लगाकर एक जांच एजेंसी द्वारा जांच शीघ्र ही कराया जाना आवश्यक होगा।।
इस संबंध में और जानकारी प्राप्त करने हेतु रेगाखार रेंजर व खारा वनपरिक्षेत्राधिकारी भास्करन से बात करना चाहा गया लेकिन उन्होने फोन रिसीव नही किया व मैसेज भी छोड़ा गया फिर भी उनकी कोई रिप्लाई अभी तक प्राप्त नही हो पाई है।।
गम्भीर जांच का विषय??
आखिर देखना ये है की सी एन आई न्यूज की खबर लगने के बाद प्रशासन की नींद जाग कर इस मामले पर क्या कार्यवाही कर रही है ।
सी एन आई न्यूज साल्हेवारा से दिलीप शुक्ला की रिपोर्ट ।





















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