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Friday, June 11, 2021

पुरी शंकराचार्यजी का प्रयागराज प्रवास 09 जुलाई तक

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 

प्रयागराज - भगवत्पाद शिवावतार आदि शंकराचार्य जी महाभाग ने ईसा पूर्व पांचवीं सदी में सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना हेतु चार आम्नाय पीठों की स्थापना कर उसमें अपने प्रमुख शिष्यों को प्रथम शंकराचार्य के पद पर प्रतिष्ठित किया। चार मान्य आम्नाय पीठों में से एक पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी उड़ीसा में वर्तमान में शंकराचार्य पद में प्रतिष्ठित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज का शंकराचार्य परंपरा में 145 वां तथा श्रीमन्नारायण परंपरा से 155 वां क्रम है । 

सृष्टि की संरचना से लेकर वैदिक युग तक व्यासपीठ  तथा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित शंकराचार्य परंपरा में आरूढ़ आचार्य शिवस्वरूप प्रतिष्ठित होकर हिन्दुओं के सार्वभौम धर्मगुरु होते हैं तथा उनसे राष्ट्र हर समय स्वस्थ मार्गदर्शन  प्राप्त करता रहा है। श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी के शंकराचार्य महाभाग जहाँ चातुर्मास्य में पुरी में रहकर वेदादि शास्त्रों का अध्यापन करते हैं साथ ही भारत ही नहीं विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से आये हुये जिज्ञासु प्रतिनिधियों के अध्यात्म  , राष्ट्रीय हित, अर्थशास्त्र, वैदिक गणित आदि विषयों से संबंधित शंकाओं का समाधान करते हैं ।

 चातुर्मास्य के पश्चात राष्ट्र रक्षा अभियान में पूरे राष्ट्र तथा नेपाल आदि के प्रवास द्वारा हिन्दुओं को अपने मानबिन्दुओं की रक्षा में तत्पर रहने तथा सुषुप्ता अवस्था छोड़कर जागृत होकर अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा तथा देश की अखण्डता के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने हेतु आह्वान करते हैं ।


पिछले वर्ष जहाँ कोरोना महामारी संकट में राष्ट्र रक्षा अभियान हेतु प्रवास स्थगित रहा परन्तु आधुनिक यांत्रिक विधा के उपयोग द्वारा संगोष्ठियों के माध्यम से अर्थ , विज्ञान , राजनीति से संबंधित विषयों पर विषय विशेषज्ञों की सहभागिता रही , शंकराचार्य जी ने   वेदादि शास्त्रसम्मत सर्वकालीन सर्वहिप्रद सनातन सिद्धांत की उपयोगिता प्रतिपादित किया। वर्तमान में उत्पन्न तथा विश्व में व्याप्त विभिन्न विभीषिकाओं के निवारण हेतु एक सशक्त मंच के रूप में हिन्दू राष्ट्र संघ की अवधारणा को  पुरी शंकराचार्य जी के मार्गदर्शन में मूर्तरूप प्रदान करने के लिये विभिन्न चरणों में विश्व के लगभग 150 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता से विचार मंथन किया गया 
जिसका भविष्य में निश्चित ही सुखद परिणाम दृष्टिगत होगा। वर्तमान कोरोना काल में भी महामारी निवारण तथा सुरक्षात्मक उपाय के रूप में सनातन संस्कृति के अनुरूप जीवनपद्धति अपनाने , प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ से बचने जिससे कि वह दूषित , कुपित तथा क्षुब्ध न हो क्योंकि प्रकृति द्वारा भृकुटि टेढ़ी करने पर ही प्राकृतिक आपदाओं एवं महामारी जैसी विभीषिकाओं का जन्म होता है इस तथ्य का संदेश हरिद्वार कुम्भ प्रवास , विभिन्न प्रदेशों जैसे बिहार , उत्तरप्रदेश , पंजाब , कोलकाता , अयोध्या , लखनऊ , वृन्दावन , होशियारपुर पंजाब , काशी में प्रसारित करते हुये वर्तमान में प्रयागराज में गंगा तटपर पर शिवगंगा आश्रम में निवासरत है।

पूज्यपाद पुरी शंकराचार्य जी शिवगंगा आश्रम प्रयागराज में 09 जुलाई तक प्रवास पर रहेंगे उसके पश्चात रथयात्रा के पूर्व श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी पहुंचने का कार्यक्रम है। इस बीच आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी 07 जुलाई को पुरी शंकराचार्य महाभाग का 79 वाॅं प्राकट्य महोत्सव का पावन अवसर होगा , इस वर्ष यह सौभाग्य प्रयागराज वासियों को होगा।  इसके पूर्व जब से महाराज श्री के प्राकट्य महोत्सव समारोह का आयोजन प्रारंभ हुआ था , इस कार्य को संपादित करने का सुअवसर छत्तीसगढ़ प्रदेश को मिलता रहा है।
पुरी शंकराचार्य जी के प्राकट्य महोत्सव को सभी सनातनी भक्तवृन्द , शिष्यगण , धर्मसंघ पीठपरिषद् , आदित्यवाहिनी -आनन्दवाहिनी के सदस्यगण श्रद्धा एवं उल्लास के साथ राष्ट्रोत्कर्ष दिवस के रूप में आयोजित करते हैं। इस दिन रूद्राभिषेक , पूजन आराधना , वृक्षारोपण , विभिन्न सेवाप्रकल्प का आयोजन पूरे राष्ट्र में होता है। समय की आवश्यकता है कि सभी सनातनी शंकराचार्य जी के मार्गदर्शन में संगठित होकर सनातन संस्कृति के अनुरूप भव्य भारत की संरचना में समर्पित हों , इसमें ही भारत एवं सम्पूर्ण विश्व तथा मानवता का कल्याण सम्भव है।

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