सुरेन्द्र मिश्रा की रिपोर्ट
कोटा.... कभी पैसों की कमी, कभी रुपये न होना , तो कभी सर्वर की परेशानी, तो कभी घूसखोरी बनी आफत किसान अपने खून पसीने की कमाई लेने के लिए ही सहकारी बैंक कोटा जाता है जहाँ उसे ज्यादातर निराशा ही हाथ लगता है। किसानों द्वारा निरंतर मांग की जा रही है कि जिला सहकारी बैंक की और शाखा खोली जाए भीड़ कम होगी परेशानियां कम होंगी। पर केवल आश्वाशन ही मिलता है। भूपेश सरकार ने न्याय योजना के तहत किसानों को खुशी तो दी परंतु उसे पाने में किसान कितना जद्दोजहद करता है यह जिला केंद्रीय एवं सहकारी बैंक शाखा कोटा में रोज देखा जा सकता है। जिस किसान को रुपये मिल जाते हैं उसकी खुशी देखते बनती है वहीं जिस किसान को नहीं मिल पाता मायूस होकर लौटना पड़ता है । कुल मिलाकर कभी खुशी कभी गम के हालात इन दिनों यहां देखने मिल रही है।किसानों की यह समस्या कब दूर होगी पता नहीं , बहरहाल किसानों को केवल और केवल परेशानी ही मिल रही है।
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