बेमेतरा/नवागढ़। नगर पंचायत नवागढ़ चुनाव में पार्षद प्रत्याशियों द्वारा पूर्व मंत्री दयालदास बघेल पर भितरघात के आरोप लगाने के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता गण पूर्व मंत्री के कॉन्ग्रेस पार्टी से बढ़ते लगाव को उनकी कॉन्ग्रेस प्रवेश करने के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए देख रहे हैं और पूर्व मंत्री के जल्द शामिल होने की बात भी बात कर रहे है। चूंकि विगत विधानसभा चुनाव के बाद से ही सन्गठन में पुर्व मंत्री की पकड़ काफी हद तक कम होती नजर आयी है, वही पार्टी के पदाधिकारियों ने भी उनका खुला विरोध करना शुरू कर दिया है, ऐसे में नवागढ़ से कांग्रेसी विधायक के साथ बढ़ते मोल जोल को लेकर उनके कांग्रेस प्रवेश की सम्भवनाओँ को नकारा नही जा सकता, अब देखना होगा कि नवागढ़ को राजनीति में कोई बड़ा तूफान आता है कि यह महज बातें ही बनकर रह जायेगी।
नवागढ़ में डीडी बघेल के भाजपा प्रवेश करने के समय साथ रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता लखन महिलांग ने बताया कि हमने उस दौर में भाजपा के लिए काम किया है जब लोग पार्टी का झंडा उठाने को डरते थे, पूरे क्षेत्र में गिनती के कार्यकर्ता थे। पूर्व मंत्री दयालदास बघेल भाजपा में आने के पहले कांग्रेस से राजनीति किया करते थे, उन्होंने कांग्रेस समर्थित होकर अपने निजी ग्राम कुंरा से दो बार सरपंच का चुनाव भी लड़े थे, तब वे अपने मिल में वीडियो दिखाया करते थे। जिसके बाद वर्ष 1993 में डीडी बघेल ने उस समय के दिग्गज कांग्रेसी नेता कुमार धर दीवान के छत्रछाया में उन्होंने विधानसभा की राजनीति की शरुआत की औऱ कांग्रेस से विधानसभा टिकट की मांग किये, लेकिन उन्हें टिकट नही मिला।
वर्ष 1996 में उन्होंने मुखीराम साहू के नेतृत्व में भाजपा में प्रवेश किया, 1998 में उन्हें सांसद ताराचंद साहू के आशीर्वाद से भाजपा से विधायक का टिकट मिला लेकिन वे चुनाव हार गए। वर्ष 2003 में पुनः भाजपा से चुनाव लड़कर विधायक बने, जिसके बाद उन्होंने स्वयं का तानाशाही रवैया अपनाते हुए पार्टी के संस्थापक सदस्यों को ही पार्टी से बाहर करवा दिया। वर्ष 2008 में पूर्व विधायक बनने के साथ हो उन्होंने ताराचंद साहू से दूरी बनाकर अपना स्वार्थवश तत्कालीन सांसद सरोज पांडेय से जुड़े, सरोज पांडेय के आशीर्वाद से वे फिर छत्तीसगढ़ शासन में मंत्री बने, फिर उन्होंने अपना रंग दियाखा औऱ आका बदलते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से नजदीकियां बना ली और 2013 में पुनः विधायक बने, जिसके तो जिला सन्गठन में इनकी लगातार मनमानियां सबको पता है। अब 2018 में चुनाव हारने के बाद पुनः इन्होंने कांग्रेसी नेताओं से नजदीकियां बढ़ाई है।
ताराचंद का उपयोग करते है दयालदास, भाजपा नेताओं पर अत्याचार
भाजपा एससी मोर्चा जिलाध्यक्ष देवादास चतुर्वेदी ने कहा कि ये वही ताराचंद जांगड़े जो नगर पंचायत चुनाव में भाजपा के लिए जयचन्द बने थे। दयालदास बघेल के करीबी जिनका पूर्व मंत्री ने हर बुरे दिन में उपयोग करता है। आज सन्गठन ने इनकी तानाशाही रवैये को नकार दिया है तो अपनी पूछपरख बढ़ाने के लिए फिर उनसें बिना तथ्य के बयानबाजी करा रहे है। अगर जांगड़े सच्चा भाजपा का निष्ठावान नेता थे तो दयालदास के कहने पर मंडी के चुनाव 2005-2006 में क्यो पार्टी अधिकृत प्रत्याशी पक्का चंतुर्वेदी उसलापुर के खिलाफ चुनाव लड़े। फिर वही ताराचंद ने दयालदास मंत्री के सामने कितना जलील अपमानित किया यही नही उस प्रत्याशी पर ताराचंद ने कैसे पूर्व मंत्री के सामने हाथ छोड़ा और मंत्री मजा लेते रहे।
पूर्व मंत्री बघेल से निवेदन है करीबियों से बिना तथ्य के बयान क्यों दिलवाते और उकसाते है।पूर्व मंत्री नवागढ़ नगर पंचायत चुनाव के सम्बन्ध में पार्टी के शिर्ष नेता को पत्र लिख कर निष्पक्ष जांच के लिए मांग करें। ताकि दूध का दूध और पानी अलग हो जाये।
स्वयं के कारनामे देखें ताराचंद, चाचा - भतीजावाद से आम भाजपा कार्यकर्ता परेशान
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश महामंत्री दयावंत धर बांधे ने कहा कि सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज की ओर।
पार्टी सिंबल के विरुद्ध चुनाव लडने वाले लोग भाजपा पदाधिकारियों को भाजपा का सिद्धांत सीखा रहे हैं। पूर्व मंत्री दयालदास एवं उनके कथित समर्थक पार्टी के खिलाफ खुले आम निर्दलीय पार्षद चुनाव लडने वाले को, चुनाव के तुरंत बाद डॉ रमन सिंह से मिलाने को लेकर जाने में कोई हिचक नहीं हुई इन लोगों को। पूर्व मंत्री डीडी बघेल के कांग्रेसी विधायक बंजारे से चाचा -भतीजा सम्बन्ध किसी से छुपा नही है। चाचा ने जनपद पंचायत चुनाव में भतीजे को आशीर्वाद देते हुए भाजपा समर्थित जनपद सदस्य होते हुए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का प्रत्याशी लड़ने नही दिया, वही बदले में विधायक से अपने पुत्र अंजू बघेल के खिलाफ जिला पंचायत क्षेत्र क्र.06 से कांग्रेस से अंजू के मामा लखन कुर्रे को अधिकृत करवाया। ताकि पुत्र आसानी से जीत जाए।
भाजपा से बनाई दूरी, कांग्रेसियों से नजदीकियां
पूर्व नगर पंचायत नवागढ़ अध्यक्ष गिरेन्द्र महिलांग ने कहा कि पूर्व मंत्री डीडी बघेल एवं उनके पुत्र अंजू बघेल ने नगर पंचायत नवागढ़ चुनाव में 15 में से 11 वार्डों में पार्टी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया है, जिसके पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध है। वही क्या जरूरत हुई कि चुनाव के दौरान लगातार विरोधी पार्टी के विधायक से मिलते रहे है। उनके पंडाल में जाकर बैठे। सत्ता के आदि बघेल ने हार के बाद विपक्ष के बजाय दूसरी पार्टी की सत्ता की ओर रुख किया और विधायक को चुनाव में सहयोग किया, जिसके बाद अपना निजी काम करवाते रहे। जिसका प्रमाण अपने खेत, रेस्ट हाउस की पास भूमि, बिजली खम्भे का काम आदि प्रत्यक्ष उदाहरण है, वही पूर्व मंत्री ने घरेलू कार्यक्रम में भी भाजपा से कही अधिक कांग्रेसी मंत्री, विधायक एवं नेताओ को प्राथमिकता से बुलाया था। आजकल की उनके पार्टी विरोधी गितिविधियो को देखकर लगता है जल्द कांग्रेस में प्रवेश करेंगे।


















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