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Monday, July 19, 2021

छत्तीसगढ़ में 1 से लागू हो सकता है बिजली का नया दर, नगर सैनिकों के दर्द पर मरहम लगना तो दूर महसूस करने को भी तैयार नहीं सरकार...

  


रायपुर : देश में लगातार बढ़ती महंगाई के साथ ही अब छत्तीसगढ़ में आधे दर पर मिलने वाली बिजली के दामों को बढ़ने की तैयारी नियामक आयोग करने जा रहा है। छत्तीसगढ़ में बिजली की नई दर एक अगस्त से लागू हो सकती है। बिजली वितरण कंपनी के प्रस्ताव के आधार पर इस महीने नियामक आयोग फिर से जनसुनवाई करने जा रहा है। नियामक आयोग को भेजे गए प्रस्ताव में वितरण कंपनी को लगभग 4000 करोड़ रुपए के घाटे में होना बताया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ नगर सेना के सैनिक इतनी महंगाई में 12800 रूपये में अपना गुजारा कर रहे हैं। इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को पत्र लिखने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी सैनिकों के दर्द को महसूस करना भी उचित नहीं समझ रहे हैं।


बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक अभी दर नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों बिजली कंपनी को दिवालिया होने से नहीं रोका जा सकेगा। नियामक आयोग के पूर्व सचिव पीएन सिंह के मुताबिक बिजली की लागत लगभग 5.90 रुपए प्रति यूनिट पड़ रही है।
लेकिन कंपनी अपने उपभोक्ताओं को इससे भी कम दाम पर बिजली दे रही है। छत्तीसगढ़ बिजली अभियंता महासंघ के सचिव अरुण देवांगन के मुताबिक छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को घाटे से उबारने के लिए बिजली की दरों में बढ़ोतरी बहुत जरुरी हो गई है। अब देखना ये है कि नियामक आयोग जनसुनवाई के बाद बिजली की दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी देता है की नहीं।
वहीं राज्य के कर्मचारियों को महंगाई से निजाद दिलवाने सरकार कोई पहल नहीं कर रही है। छत्तीसगढ़ में नगर सेना एक ऐसा विभाग है जहां के कर्मचारी दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर हैं। यही नहीं नगर सेना के जवान पुलिस के जवानों के बारबार काम करते हैं, लेकिन उन्हें पारश्रमिक के रूप में सिर्फ 12800 रूपये ही वेतन प्राप्त होता है। वैसे कहने के लिए नगर सेना के सैनिकों का वेतन 13200 रूपये है।
बताया जा रहा है कि जब मुख्यमंत्री विपक्ष में बतौर विधायक निर्वाचित हुए थे तब उन्होंने स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को नगर सैनिकों का वेतन 27000 रूपये करने पात्र लिखा था, लेकिन सत्ता पर काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगर सेना के सैनिकों की पीड़ा पर परहम लगना तो दूर उनकी पीड़ा को महसूस करना भी उचित नहीं समझा।

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