*संयुक्त राष्ट्र आदिवासी जन अधिकार घोषणा पत्र के नियम को अमल करे राज्य सरकार :- महेश कुंजाम
सुकमा-09 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस कुकानार व जगंमपाल में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के समस्त मूलनिवासी, आदिवासी उपस्थित होकर हर्सोल्लास के साथ मनाया गया। कुकानार जोन में परगना मांझी बीरसिह बघेल की मुख्य अतिथि में सम्पन हुआ।
इस अवसर पर कुकानार व दन्तेवाड़ा के कटेकल्याण ब्लाक के ग्राम पंचायत जगंमपाल में आदिवासी दिवस में पहुँच कर महेश कुंजाम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ आदिवासी जन अधिकार घोषणा पत्र में यह कहा है कि विश्व मानव अधिकार घोषणा की तरह संयुक्त राष्ट्र संघ आदिवासी जन अधिकार घोषणा एवं कानूनी दस्तावेज है यह आदिवासी जनों के अधिकारों के प्रति राज्यों के कर्तव्य को निश्चित करती है। संयुक्त राष्ट्र ने जनघोषणा पत्र में अनुच्छेद 1 से लेकर 5 में आदिवासी जनों को आत्म निर्णय का अधिकार बताया है,
भारत में इसे संविधान के छठवीं और पांचवी अनुसूची में स्थान दिया गया है ,अनुच्छेद 6 से लेकर 11 मे संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा पत्र में इस बात की पूरी गारंटी देते हुए कहा कि आदिवासियों का नरसंहार बंद हो , उनको जबरदस्ती एक जगह से दूसरे जगह नहीं ले जाने और आदिवासी बच्चों का अपने परिवार और समुदाय से अलग नहीं किया जाने,अनुच्छेद 12 से लेकर 14 में यह बताया है कि उनके इतिहास, मौखिक परंपरा भाषाओं को पुनर्जीवित करने उनका इस्तेमाल करने तथा विकसित करने और भावी पीढ़ियों को स्थानांतरित करने के अधिकार का अमल सुनिश्चित किया जाने के सम्बंध में बताया, अनुच्छेद 15 से 16 में आदिवासियों को अलग से शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने का अधिकार दिया है, अनुच्छेद 17 में यह लिखा है कि बाल श्रम और श्रम मानकों पर अमल के लिए आदिवासियों को विशेष अधिकार दिया गया है, अनुच्छेद 18 से लेकर 24 में घोषणा पत्र में आदिवासियों के विरुद्ध सभी प्रकार की हिंसा और भेदभाव के खिलाफ कार्यवाही की गारंटी देने पर सरकार को निर्देश किया गया है, अनुच्छेद 25 से लेकर 30 में आदिवासी जमीन और अन्य संसाधनों को प्रभावित करने वाली परियोजनाओं के मामलों में पहले उनकी अपनी मर्जी की सहमति लेना होगा, आदिवासी जनों की जमीनों और विभागों से सैनिक गतिविधियों चलाने की मनाई है , अनुच्छेद 35 में घोषणा पत्र में आदिवासी जनों द्वारा अपने समुदाय के महिला एवं पुरुषों की कुशलता अनुसार जिम्मेदारियों को परिभाषित करने का नियुक्ति देने का अधिकार उनके ग्राम सभाओं को दिया गया है, अनुच्छेद 36 और 37 में इस भाग में सीमा के आर पार रहने वाले आदिवासी जनों के सुरक्षा के अधिकारों के बारे में बताया गया है, अनुच्छेद 38 से 46 में इसमें संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा पत्र की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कानून तथा अन्य असरदार उपयोग कदम उठाने राज्यों की जिम्मेदारी के बारे में स्पष्ट निर्देश है कि इसमें राज्य तथा अन्तर्राज्यीय सहयोग से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता पाने के आदिवासी जनों के अधिकार को भी परिभाषित किया गया है।
आॅल इंडिया स्टूडेन्टस् फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष आदिवासी छात्र नेता - महेश कुंजाम ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कहा कि हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि इस घोषणा पत्र पर ईमानदारी से अमल करें संविधान अनुसार आचरण करें। उन्होने आगे कहा कि वर्तमान में प्रदेश व बस्तर में आदिवासियों की जल, जंगल ,जमीन पर जबरन पांचवी अनुसूची पेशा कानून संविधान की अनुच्छेद 244 (1) के उपबंध के विपरीत काम कर रहा है, यह कि आदिवासियों के साथ हमेशा नरसंहार, अत्याचार किया जा रहा है, सुकमा जिले व बीजापुर सीमा में स्थित सिंलगेर गांव में देश को शर्मसार करने वाली गोली कांड घटना राज्य व देश की सरकार की नेतृत्व में हुआ है, 17 मई 2021 को पांचवी अनुसूची पेशा कानून प्रभावी क्षेत्र में पारम्परिक ग्राम सभा के बिना अनुमति के व सहमति के वर्षो खेती करने वाला भूमि पर पुलिस कैम्प स्थापित करने के विरोध में सिलगेर के हजारों आदिवासियों ने सिलगेर विरोध कर रहे निर्दोष आदिवासियों के ऊपर पुलिस ने गोली चला दी, तीन पुरुष उईका पांडू, उरसा भीमा, कवासी वागा, सहित एक महिला ग्रामीणो की जान गया, 18 से ज्यादा ग्रामीण गायल हो गये थे। और एक और घटना सामने आया पुलिस के व्दारा विगत 25 जूलाई 2021 को चिन्तागुफा थाना क्षेत्र पद्दीगुड़ा निवासी कुंजाम भीमा को देर रात घर से पकड़ उठाकर कुछ ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दिया और मुठभेड़ के नाम से प्रचारित करने के कोशिश कर रहे हैं। और छिन्दगढ़ ब्लाक के किकिरपाल पंचायत में टिन खनिज पर जबरन बिना ग्राम सभा के लीज में उत्खनन करने की कोशिश किया जा रहा है। इधर पाकेल पंचायत के बालाटिकरा में खेती भूमि में जबरन अधिग्रहण कर शासकीय भवन बनाया जा रहा है खेती जमीन को बचाने के लिए ग्रामीण विरोध करने पर तीन महिलाओं को स्थानीय प्रशासन ने जेल भेज दिया गया था। इसी तरह एक नहीं अनेक घटनाएं आदिवासियो को फर्जी मुठभेड़ में पकड़कर गोली से हत्या की जा रहा है, निर्दोष आदिवासियों को दिनो दिन जेल भेजा जा रहा है । इन तमाम समस्याओं को सरकार रोक लगाए संयुक्त राष्ट्र संघ के जनघोषणा पत्र के नियम को अमल करने की बात कही।




















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