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Thursday, August 26, 2021

बैहर अनुसूचित क्षेत्र है, इस क्षेत्र से रेत रॉयल्टी से मुक्त करें - सूरज ब्रम्हे ( राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन ).

 बैहर अनुसूचित क्षेत्र है, इस क्षेत्र से रेत रॉयल्टी से मुक्त करें - सूरज ब्रम्हे ( राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन ).


  




                  बिरसा/बालाघाट।बैहर गोंड़वाना भवन में किसान टेक्टर ओनर संघ की हुई बैठक किसान टेक्टर संघ के अध्यक्ष सूरज ब्रम्हे की अध्यक्षता में तथा सेवा निवृत्त प्राचार्य एफ.एस. कमलेश की मुख्य आतिथ्य में एवं आदिवासी नेता बैराग सिंह टेकाम के विशेष आतिथ्य में बैहर,बिरसा एवं परसवाड़ा तहसील किसान टेक्टर ओनर संघ के सदस्यों की उपस्तिथि में बैठक का आयोजन किया गया।  बैठक के पश्चात रैली के रूप में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैहर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लिखा है कि ये तहसील आदिवासी बाहुल्य तहसील है तथा घने जंगलों से घिरा हुआ है। इन तहसीलों का अधिकांश भू-भाग वन विभाग के अंतर्गत आता है। आदिवासी बाहुल्य होने के कारण इस क्षेत्र में 5 वी अनुसूची लागू है

 इन तहसील के निवासी सिर्फ खेती एवं जंगल पर ही निर्भर रहकर अपना और अपने बच्चों का पालन पोषण करते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार के और कोई साधन ना होने से हम बेरोजगर युवाओं ने ट्रेक्टर बैंक से फ़ायनेश करवा कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। हमारे ट्रेक्टर के पीछे दस मजदूरों का परिवार भी अपनी जीविका चलाते हैं। इस तरह इन तीनों तहसीलों में लगभग 10 से 15 हजार  परिवार का भरण पोषण ट्रेक्टर के भरोसे होता है। किन्तु कुछ दिनों से रेत, गिट्टी, मुरुम, मिट्टी आदि ढोने से अधिकारियों द्वारा पकड़ लिया जाता है। और हजारों रुपिया जुर्माना लगाकर छोड़ा जाता है। इस कारण हमारे ट्रेक्टर कई दिनों से खड़े हैं जिससे हजारों परिवार के सामने भूखों मरने की स्तिथि है। महोदय जी हमारा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहां अधिकांश लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंर्तगत बहुत से गरीब परिवार को आवास योजना की राशी स्वीकृत की गई है। किन्तु ट्रेक्टर खड़े होने के कारण रेत नही मिलने से मकान के काम रुके पड़े हैं। जितनी राशी स्वीकृत की जाती है उतनी राशी में डम्फर से रेत बुलाना सम्भव नही है। क्योंकि रॉयल्टी जोड़कर एक डम्फर रेत 26 हजार रुपिया में पड़ता है। जबकि एक ट्रैक्टर रेत मात्र 2 हजार रुपियों आ जाता है। जो इस क्षेत्र के गरीबो के बजट में आता है।                              मांगे - ट्रेक्टर मालिकों के लिए मिट्टी, मुरुम, खद्दान की व्यवस्था कराई जाये। साथ ही इस क्षेत्र को रेत परिवहन पर रॉयल्टी मुक्त किया जाये,                                        5 वी अनुसूचित क्षेत्र को ध्यान में रखते हुवे इस क्षेत्र को रेत की रॉयल्टी मुक्त किया जाये जिससे क्षेत्र के गरीब आदिवासी भाई प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान बनवा सके,                                          कुछ विभाग के छोटे कर्मचारी द्वारा जो ट्रेक्टर पकड़ कर ट्रेक्टर मालिकों से धमका कर रुपिया लिया जाता है। उसमें प्रतिबंध लगाया जाये।      और उन कर्मचारियों पर कार्यवाही किया जाये।

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