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Monday, August 9, 2021

दुर्ग भिलाई - अगस्त क्रांति के अवसर पर संयुक्त यूनियनों ने मोमबत्ती व मशाल जलाकर राष्ट्रीय संपत्ति रक्षा की ली शपथ निकाली रैली .....

  लुकेश साहू.....

भारत गणराज्य मानचित्र के सामने मोमबत्ती व मशाल जलाकर राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा की ली शपथ

9 अगस्त, अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर आज भिलाई में संयुक्त यूनियनों द्वारा इक्विपमेंट चौक,सेक्टर-1 से सेक्टर-9 अस्पताल चौक तक रैली निकाली गई। 

तत्पश्चात सेक्टर-9 अस्पताल परिसर स्थित अगस्त क्रांति के स्मारक

 पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया ।

शाम को सभी युनियनों द्वारा बेरोजगार चौक (परिवार चौक), सिविक सेंटर पर भारत गणराज्य का मानचित्र रखकर मशाल एवं मोमबत्ती जलायी गयी एवं 

राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा के साथ भारत के गणराज्य स्वरूप को बचा कर रखने के प्रति अपना समर्पण व्यक्त किया गया । आज के कार्यक्रम में एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, इस्पात श्रमिक मंच, स्टील वर्कर्स यूनियन, लोईमू शामिल थे।
 

इस अवसर पर यूनियन नेताओं द्वारा चारों श्रम संहितायें वापस लेने, तीनों कृषि कानून निरस्त करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के आउट सोर्सिंग, बिक्री या निजीकरण पर रोक लगाने, बिजली बिल 2021 वापस लेने, महँगाई पर रोक लगाने से संबंधित माँगो को लेकर नारे लगाए गए।

 मालिकपरस्त श्रम संहिताओं से छिन जाएंगे कर्मचारियों के अधिकार

2021के मानसून सत्र में सरकार ने 29 श्रम कानूनों को सरलीकृत करने के नाम पर 4 श्रम संहिताओं में समाहित कर श्रमिकों के अधिकारों को छीन लिया 

जो वास्तव में कारपोरेट घरानों के हित में कर्मियों को गुलाम बनाने की योजना है |
फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट के प्रावधान के तहत 

प्रबंधन के पास यह अधिकार होगा कि 

वह 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु के लिए नियुक्ति ना कर अल्पावधि के लिए कर्मियों की नियुक्ति करें एवं 300 से कम कर्मियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान के नियोक्ताओं को ले आफ, छटनी, तालाबंदी के लिए किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी ।

₹18000 प्रति माह से अधिक वेतन प्राप्त करने वाले सुपरवाइजर कर्मियों को वर्कर नहीं माना जाएगा । ऐसे कर्मी संहिता के अधिकांश प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले अधिकारों से वंचित रहेंगे।

किसी कर्मी द्वारा अनाधिकृत अनुपस्थित होने पर नियोक्ता को उनके1 दिन की अनुपस्थिति पर 8 दिन का वेतन काटने का अधिकार दिया गया है । 
श्रम अधिकारी द्वारा कर्मचारी के पक्ष में 

दिए गए वेतन संबंधी निर्णय के खिलाफ नियोक्ता या प्रबंधन, संबंधित निर्णय के  तहत भुगतान की जाने वाली राशि जमा किए बिना अपील पर जा सकता है । 

इससे न्यायिक प्रक्रिया में होने वाले विलम्ब से पीड़ित कर्मी परेशान होगा ।

महिला कर्मियों को रात्रि पाली में नियुक्ति करने का नियोक्त को छूट दी गई है | 

मजदूरों या ट्रेड यूनियनों की शिकायत पर कारखाना निरीक्षक बिना उपयुक्त सरकार की अनुमति के निरीक्षण हेतु कार्य करने में प्रवेश नहीं कर सकते हैं ।

सामाजिक सुरक्षा कोड के तहत कर्मचारी पेंशन योजना में अंशदान को 12% से घटाकर 10% कर दिया गया है 

इसी तरह ईएसआई में भी अंशदान घटा दिया गया है ताकि मालिकों को लाभ पहुंचाया जा सके । 

बिजलीसंशोधन विधेयक 2021 से बिजली होगी महंगी

बिजली संशोधन विधेयक 2021 के पारित होने के पश्चात निजी कंपनियों को भी विद्युत वितरण का अधिकार होगा । 

वर्तमान में अधिकांश राज्यों में विद्युत वितरण कंपनी राज्य सरकार के स्वामित्व में है। 

एक बार निजी कंपनियों को विद्युत वितरण का अधिकार प्राप्त हो जाएगा तो वे उपभोक्ताओं से मनमानी वितरण शुल्क वसूल करेंगे 

और इसका   असर  सभी वर्गों पर पड़ेगा । इससे न केवल औद्योगिक बिजली महंगी होगी बल्कि कृषि पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा 

इससे  न केवल महंगाई में वृद्धि बल्कि आम जनता को भी ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा । 

कोरोना महामारी से एक तरफ लोगों के रोजगार छीन गए है और कई लोगो के वेतन में कटौती की गयी है | 

साथ ही पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दामों में वृद्धि ने लोगो के आर्थिक भार को पहले ही बढ़ा दिया है |

 जब बिजली की पुरानी दरो से बिजली वितरण कंपनी मुनाफे में चल रही है तब बिजली दरों में वृद्धि समझ से परे है | 

उद्योगों एवं कृषि उत्पादन में इस वृद्धि से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर होगा | 

मजदुर एवं आम जनता को लामबंद होकर इसका विरोध करना होगा | 
 

तीनों कृषि कानूनों से कृषि पर कारपोरेट घरानों का होगा कब्जा

तीनों कृषि कानून यदि वापस नहीं हुए तो,पूर्व से तैयार कॉरपोरेटों के विशाल भंडारण कक्ष (SILOS) में अनाज 

सहित अन्य खाद्य सामग्रियों की जमाखोरी होगी ।

 किसानों के खेतों पर कारपोरेट्स का नियंत्रण होगा, किसान उचित मूल्य से वंचित होंगे

 एवं जनता महंगाई  से परेशान होगी । अनाज एवं खाद्य पदार्थों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर रखा जाना वास्तव में 

भारत में पूरे कृषि क्षेत्र पर कारपोरेट घरानों की एकाधिकार कायम करवाने की योजना का हिस्सा है।

सरकार का यह कहना कि अब किसान देश में कही पर भी अपना अनाज बेच सकता है

 पूरी तरह से भ्रमित करने वाला ब्यान है क्योकि भारत में अधिकतर छोटे किसान है 

जो इस स्थिति में नहीं है कि वे अपने अनाज को 1000 किमी दूर 

किसी अन्य राज्य मे लाभ कमाने के लिए ले जा सके |  

इससे सरकार को अनाज का न्यूनतम मूल्य भी घोषित करने से छुट मिल जाएगी | 

इन सभी का हमारे देश के किसान विरोध कर रहे है | 

सरकार केवल मुहं जबानी अनाज का न्यूनतम मूल्य घोषित करने की बात कर रही है 

लेकिन उसे कानूनी जामा पहनाने के लिए तैयार नहीं है |

इन कानूनों के लागू होने से आम जनता की क्रय शक्ति में भारी कमी आएगी । 

उपभोक्ता सामग्री बनाने वाले उद्योग मंदी के शिकार होंगे,

 औद्योगिक मंदी  से हमारा इस्पात उद्योग, कोयला उद्योग, बिजली उत्पादन उद्योग सहित  

सभी ढांचागत उद्योग, व्यापार, व्यवसाय  प्रभावित होगा ।  

अतः तीनों कृषि कानून के विरोध में  किसानों का आंदोलन, 

राष्ट्र एवं हम सबके हित के लिए आंदोलन  है ।

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