नई दिल्ली ।
,,छत्रपाल ठाकुर की कलम से,,
भाजपा और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय पार्टी की अंदरूनी कलह रुकने का नाम नही ले रही,,,,,,,,,,,,
भाजपा और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय पार्टी की अंदरूनी कलह रुकने का नाम नही ले रही है दोनों तरफ ही पार्टी के आला कमान परेशान है इसके चलते कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की सत्ता गवां दी बनी बनाई कमलनाथ के नरेतित्व वाली सरकार 1 साल में गिर गई पार्टी की अंदरूनी कलह जनता समझ रही थी मीडिया ने भी आगाह किया लेकिन पता नही कांग्रेस आलाकमान को क्यों समझ नही आया आखिर सरकार गिर ही गई कारण निर्णय लेने में देरी या चंद वरिस्टो में गिने जाने वाले कांग्रेसी नेताओं का आलाकमान पर दबाव या फिर रजवाड़ों का आपसी मनमुटाव
कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान में भी पिक्चर साफ है यूथ और सीनियर नेताओं के बीच क्या हो रहा है सूत्र की माने तो राजिस्थान में दिग्गज युवा नेतापूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की नाराजगी तो सभी ने देखा
कारण पूरा देश जान रहा है लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने सब कुछ सम्हाल लिया
पंजाब का आयेदिन न्यूज़ चैनलों में कैप्टन और सिधु का राजनीतिक हाल चाल सुनने को मिलता है पंजाब मैं 2022 में चुनाव है
छत्तीसगढ़ में तो अखबार वालों ने सूत्रों के हवाले से सीधा सीधा मुख्यमंत्री बदलने की बात लिख दी अटकलें तो यहां तक लगाई गई कि अगला सी एम,,टी एस बाबा यानी राजा साहब बनेंगे भूपेश का हटना लगभग तय माना जा रहा था इसके जिम्मेदार भी छत्तीसगढ़ के नेता जो सरकार में है वही है ढाई साल का पुड़िया किसने छोड़ा अभी तक इस्पस्ट नही है कांग्रेस तो अपने अंतर कलह को सुलझाने में कामयाब हो गई भाजपा के मंसूबे पर जरूर पानी फिर गया कयोंकि इस मामले को ले कर भाजपा ज्यादा चिंतित दिख रही थी क्योंकि इसका सीधा लाभ आनेवाले चुनाव में भाजपा को मिलना तय था फिर भी छत्तीसगढ़ में आने वाले 2023 के चुनाव में कांग्रेस को कठिन राजनीतिक दौर से गुजरना होगा
भाजपा में भी अंदरूनी कलह भरा है तभी तो भाजपा आलाकमान ने 5 मुख्यमंत्री बदल दिये जितने भी मुख्यमंत्री बदले गए देखने से लगता है सबने हाई कमान के आदेश को सहर्ष स्वीकार किया है बाकी सच्चाई क्या है उनसे बेहतर कोई नही जानता ये वही यदुरप्पा और विजय रूपानी है जो कभी अखबारों और न्यूज़ चैनल की सुर्खी हुआ करते थे
भाजपा आलाकमान ने साबित कर दिया कि पार्टी से बड़ा कोई नही भाजपा के लिए अच्छा संकेत है कि किसीने पार्टी के फैसले का कोई विरोध नही किया सच क्या है आने वाले विधान सभा चुनाव की तारीख तय होने के बाद ही पता चलेगा भाजपा अगर 2022,,23 के चुनाव में जीत का परचम नही लहरा पाएगी तो 2024,का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिये दिल्ली की दूरी बढ़ा देगी फिर अमित शाह का 50 साल राज करने,,,कांग्रेस मुक्त भारत बनाने का सपना टूट जाएगा जो राजनीतिक पार्टी सत्ता से बाहर होती है उनका क्या हस्र होता है ये कांग्रेसियों से बेहतर कौन बता सकता है ये तो कयास है आगे सच तो सामने आ ही जायगा कुछ ही दिनों की बात है फिर ये सत्ता में बैठे लोग सड़कों पर दरवाजे पर हाथ जोड़े खड़े दखाई देंगे लेकिन अब मतदाता समझदार है अपना फैसला स्वयम करना जान चुकी है ।
सी एन आई न्यूज के लिये ब्यूरो रिपोर्ट ।


















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