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Tuesday, September 28, 2021

महालक्ष्मी पूजा पर विशेष मुकेश श्रीवास्तव प्राचार्य

 महालक्ष्मी पूजा पर विशेष मुकेश श्रीवास्तव प्राचार्य


सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर 



रतनपुर से ताहिर अली की रिपोट


रतनपुर....वर्तमान मे देश मे श्राद्ध पक्ष होने के कारण पितरो के लिए तर्पण का कार्य चल रहा है। हिंदू धर्म मे मान्यता के अनुसार सारे शुभ कार्य  वर्जित होते हैं। लेक‍िन इसी दौरान पड़ने वाले अष्टमी तिथि कोे  देवी महालक्ष्मी की पूजा करने का विशेष विधान है।मान्यता अनुसार राधाअष्टमी से प्रारंभ होने वाले 16दिवसीय व्रत का अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को समापन किया जाता है।


इसे गजलक्ष्‍मी व्रत भी कहा जाता है।इस दिन सोना खरीदने का विशेष महत्व है।श्राद्ध पक्ष के दौरान यह एक ऐसा पर्व है जिस दिन हम सभी तरह के शुभ कार्य करते हुए नये सामान भी खरीद सकते है।इसे गजलक्ष्‍मी व्रत के अलावा महालक्ष्मी व्रत, और हाथी पूजा व्रत भी कहते हैं।गजलक्ष्‍मी व्रत का विधि अत्यंत ही श्रद्धा भक्ति और कठोर अनुशासन का व्रत है इस दिन प्रातः काल को व्रती द्वारा 16दुर्वा की एक गठान के हिसाब से 16-16 दुर्वा की बनी 16 गठानो से युक्त दूर्वा से शरीर के प्रत्येक अंगो मे जल का सिंचन करते हुए इस मंत्र का जाप करते हुए व्रत का संकल्प करती है।


करिष्यsहं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा

तदविघ्नेन में यातु समप्तिं स्वत्प्रसादत:


अर्थात्- हे देवी, मैं आपकी सेवा में तत्पर होकर आपके इस महाव्रत का पालन करूंगी  मेरा यह व्रत निर्विघ्न पूर्ण हो। मां लक्ष्मी से यह कहकर अपने हाथ की कलाई में 16 गठानो युक्त लाल डोरा बांधती है ।इसके  बाद घर पर ही माता के नैवेद्य केे लिए 16 प्रकार के पकवान बनाये जाते है,कोशिश की जाती है की जो भी सामाग्री माताजी को अर्पित किया जाये उसकी मात्रा 16 की अंको मे हो.जैसे 16 प्रकार के फूल, पत्तिया ऋतु फल,मिष्ठान आदि


शाम के समय सजेगा माताजी का फूलहरा


संध्या काल मे माता महालक्ष्मी के लिए विषेश  रुप से फूलहरा सजाकर हाथो से बनाई गई हाथी के प्रतिरूप का पूजा किया जाता है।  केसर मिले चंदन से अष्टदल बनाकर  माता लक्ष्मी की मूर्ति रखी जाती है। तत्पश्चात ब्राह्मण देवता द्वारा माता जी का षोषडोपचार पूजा कराकर।गजलक्ष्‍मी व्रत का कथा सुनाया जाता है।

व्रती द्वारा उपस्थित सभी सुहागिनो का हल्दी कुमकुम करके सुहाग का समान उपहार एवं माता जी का भोग प्रसाद  देकर विदा करते है


रात्रि जागरण से पूरी होती है मनोकामना


माता जी के पूजन के पश्चात रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है। इसलिए व्रतीयो द्वारा भजन किर्तन के द्वारा जगराता करके माताजी को प्रसन्न किया जाता है।।महालक्ष्मी माता सबकी मनोकामनाएं पूरी करे

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