भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने किसानों की आत्महत्या के मामले में छत्तीसगढ़ के पांचवें स्थान पर पहुंचने के बाद भी अपराध ग्लानिबोध नहीं होने पर प्रदेश सरकार को कोसा।
अब तो किसानों की आत्महत्या मान सरकार, दे 50-50 लाख मुआवजा : भाजपा।
रायपुर :- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने किसानों की आत्महत्या के मामले में छत्तीसगढ़ के पांचवें स्थान पर पहुंचने के बाद भी प्रदेश सरकार और कांग्रेस नेताओं को ग्लानिबोध नहीं होने पर हैरत जताई है। श्री साय ने कहा कि किसानों के नाम पर सियासत करने वाली कांग्रेस की प्रदेश सरकार की बदनीयती ने कदम-कदम पर किसानों को हलाकान किया और कुनीतियों ने किसानों को आत्महत्या के लिए विवश किया।
भाजपा अध्यक्ष श्री साय ने एनसीआरबी के इस संबंध में जारी ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार अब तो यह मान ले कि प्रदेश में 550 किसानों ने आत्महत्या की है। भाजपा इन किसानों को 50-50 लाख रुपए की मुआवजे की मांग प्रदेश सरकार से करती है और यदि किसानों के साथ इसमें प्रदेश सरकार ने कोई छलावा किया तो भाजपा किसानों को साथ लेकर सड़क पर उतरने के लिए संकल्पित है।
श्री साय ने कहा कि उत्तरप्रदेश में वोटों की फसल काटने के लिए छत्तीसगढ़ के आर्थिक संसाधनों को निजी संपदा की तरह उत्तरप्रदेश में लुटाने वाली कांग्रेस सरकार को छत्तीसगढ़ के किसानों की कोई फिक्र तक नहीं है। प्रदेश विधानसभा और कैबिनेट के अनुमोदन और बजट प्रावधान के बिना उत्तरप्रदेश में सियासी लफ्फाजियां करके करोड़ों का मुआवजा देने की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी पुलिस से गोली चलवा कर सिलगेर में किसानों को मरवा रहे हैं, जिन्हें लंबे समय से आंदोलन करने की बाद भी इस नाकारा और किसान विरोधी प्रदेश सरकार ने अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने हैरत जताई कि एनसीआरबी के जारी ताजा आंकड़ों तक को कांग्रेस के लोग झुठला रहे हैं और सिर्फ दो लोगों द्वारा आत्महत्या करने की बात कह कर मृतक किसानों के प्रति भी अपमान का भाव दर्शाकर अपने घोर निंदनीय राजनीतिक आचरण का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें शर्म महसूस करना चाहिये। जबकि पिछले वर्ष 2020 में ही 537 किसानों की आत्महत्या के आंकड़े एनसीआरबी ने जारी किए हैं। कांग्रेस को सिर्फ अपनी सियासी लफ्फाजी और झूठ को ही सच बताने की आदत है। श्री साय ने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि किसानों की आत्महत्या के मामले में भी झूठ का रायता फैलाते उन्हें शर्म क्यों महसूस नहीं होती

















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