करवा चऊथ के महिमा अपार ।
सुहागिन पत्नी के पति अधार ।।
भुख दुख सहिके पति के उपास ।
पति भला बुरा रहय होय न उदास
जबले चंदा उवे नही करथे इंतजार
आठों अंग मा करके सोला सिंगार
जीवन साथी बर कतका मया दुलार
पति पत्नी के करवा चऊथ कराथे चिंन्हार
करवा माता के निर्जला निराहार
उपवास
पिवरा माटी मा गऊरा बनाके पूजा खास
कातिक महिना अंधियारी पाख मा आथे चऊथ
गहु पिसान गुड़ के पकवान फल फुल चढथे बहुत
करवा माता के पुजा पाठ पति के लंबा उमर मांगथे
चंदा ला अर्ध देके भोजन करके उपास ला तोड़थे
पति के सुख समृद्धि प्रेम के अमर सुहाग
पत्नि के मांग के सिंदुर रक्षा होथे बड़ भाग
पतिवरता नारी अपन पति के खातिर करथे तपस्या
सुख शांति मा दिन पहाथे
नई आये कोनो समस्या
करवा नाम के पतिवरता नदी तीर गांव मा राहय ।
करवा के पति नदी मा नहाये गिस मगर पाव पकड़ाय
करवा करवा चिल्लावन लागिस पत्नि दऊड़े आय
कच्चा धागा मगर ला बाधे
यमराज ला जाके बताय
यमराज ला कहे मोर पति के गोड़ ला मगर पकड़े बताय
गोड़ ला पकड़े के अपराध मा मगर ला नरक दंड दे जाय
यम कहीस अभी मै वोला नई मार सकव बचे हे उमर
कहू तै अइसे नई करबे ता श्राप देहूं उगलहू मै जहर ।
ये सुन यमराज डर्राके पतिवरता संग जाके मगर ला यमपुरी पहुचा दिस ।
करवा के पति ला वोही दिन यमराज लंबा उमर देथे ।
वोही दिन ले सुहागिन करवा चौथ मनाये के व्रत रखथे ।।
सुहागिन नारी मन ला करवा चौथ के बधाई
कविराज चन्द्रभूषण यदु रामपुरिया साल्हेवारा सी एन आई न्यूज रिपोर्टर
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