भिलाई। 12 नवंबर को राज्य निर्वाचन आयोग की बैठक है। खबर है कि बैठक में दुर्ग जिले के चारों निकायों के चुनाव को लेकर चर्चा होनी है।
इसके तीन दिन बाद 15 नवंबर को महापौर आरक्षण को लेकर अंतिम सुनवाई है। उसी दिन फैसला भी आ जाएगा। यदि फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में आया तो
भिलाई चरोदा व रिसाली निगम का महापौर आरक्षण फिर से होगा। नतीजा चुनाव नए साल के लिए टल जाएगा।
बता दें कि दुर्ग जिले के भिलाई निगम, रिसाली निगम, भिलाई चरोदा निगम तथा जामुल पालिका के चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। चुनाव को लेकर सारा कुछ 15 नवंबर के फैसले पर टिका है।
भिलाई चरोदा निगम व रिसाली निगम के महापौर पद के आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिसकी अंतिम सुनवाई 15 नवंबर को है।
उस दिन यदि फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में आया तो दोनों निगमों का महापौर आरक्षण बदलना पड़ सकता है।
यदि फैसला सरकार के पक्ष में आया तो 20 नवंबर तो आचार संहिता की घोषणा कर 30 दिसंबर तक चुनाव करा लिए जाने की चर्चा है।
याचिकाकर्ता अली हुसैन सिद्दीकी ने इस तर्क के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है कि भिलाई चरोदा निगम में एससी वर्ग की संख्या 15 प्रतिशत है।
तथा रिसाली नगर निगम में एससी वर्ग 17 प्रतिशत है। इसलिए रिसाली निगम को एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए,
वहीं भिलाई चरोदा निगम में एससी वर्ग के कम प्रतिशत को देखते हुए इसे ओबीसी वर्ग के लिए अथावा सामान्य किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट में इसे लेकर बीते एक साल से सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ता के वकील तथा सरकार के वकील अपना पक्ष रख चुके हैं।
15 नवंबर को अंतिम सुनवाई होनी है। उसी दिन इस पर हाइकोर्ट का फैसला भी आ जाएगा।
हाईकोर्ट ने यदि याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया तो भिलाई चरोदा व रिसाली निगम का आरक्षण उलट जाएगा।
ऐसी स्थित में फिर से आरक्षण की प्रक्रिया में एक महीने का समय लग सकता है। यदि फैसला सरकार के पक्ष में आया तो 20 नवंबर तक आचार संहिता तथा 30 दिसंबर तक चुनाव तय है।

















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