*कलेक्टर श्री धावड़े के मार्गदर्शन में जिले में नरवा गरवा घुरवा और बाड़ी योजना की बेहतर प्रगति योजनांतर्गत सामुदायिक बाड़ी चेरवापारा में सरस्वती महिला समूह द्वारा काजू कटहल की सुंदर नर्सरी फलोद्यान तैयार....*
कोरिया /मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य शासन की महत्वाकांक्षी नरवाए गरवाए घुरवा और बाड़ी योजना से गांवों की तस्वीर बदल रही है। अब गांव आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन रहे हैं।
नरवा से भूजल रिचार्जिंग की संकल्पनाए गौठान और मल्टीयूटीलिटी सेंटर आजीविका के केंद्र और सामुदायिक बाड़ी में सब्जी उत्पादन और विक्रय से गांव की ज़रूरतें गांव में पूरी होने के साथ स्वसहायता समूह को आय का साधन मिला है। यही नहींए बाड़ी में उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से आर्थिक फायदे के लिए फलोद्यान भी तैयार किए जा रहे हैं।
कलेक्टर श्री श्याम धावड़े के मार्गदर्शन में जिले में योजना के क्रियान्वयन में सकारात्मक प्रगति हो रही है। जिले में उद्यानिकी विभाग द्वारा 67 सामुदायिक बाड़ियों में महिला समूहों द्वारा सब्जी उत्पादन किया जा रहा है। जल्द ही सभी गौठानों में बाड़ी विकास का कार्य किया जाएगा। इसी कड़ी में सामुदायिक बाड़ी योजना के अंतर्गत ग्राम चेरवापारा में लगभग 3 एकड़ में सामुदायिक बाड़ी तैयार की गई हैए जहां 1 एकड़ में पपीता लीची के फलोद्यान भी तैयार किये गए हैं।
बाड़ी की देखरेख महिला स्वसहायता समूह द्वारा की जा रही है। पपीता की पूसा नन्हा नाम की प्रजाति इस बाड़ी में लगाई गई है जिसमें करीबन 2 फ़ीट के पौधों पर ही शानदार फल आने लगे हैं। लीची के पेड़ भी फलोद्यान में शामिल हैं। सहायक संचालक उद्यानिकी ने बताया कि मुजफ्फरपुर लीची की किस्म के 40 पेड़ यहां लगाए गए हैं। फल आने पर 1 पेड़ से ही 2 हज़ार से 5 हज़ार तक आमदनी होने का अनुमान है। जिसका मतलब है कि 80 हजार से 2 लाख तक की आमदनी लीची से होने की संभावना है।
ग्राम चेरवापारा के ही सरस्वती महिला समूह की महिलाएं बाड़ी की देख.रेख का काम कर रही हैं। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में समूह की 6 महिलाओं ने सामुदायिक बाड़ी में काजू अमरूद कटहल की नर्सरी भी तैयार की है। इसके साथ ही उन्होंने गेंदा फूल की सुंदर क्यारी टमाटर और मिर्च की भी खेती है। अब आगे सीजन को देखते हुए उनकी कार्ययोजना आलू और मटर लगाने की है। बाड़ी में महिलाओं ने लकड़ा भाजी भी कुछ हिस्से में लगाई है। समूह की सचिव श्रीमति सुबासो बाई ने बताया कि अभी बाड़ी का रख.रखाव भी समूह की महिलाएं कर रही हैं। काजूए अमरूद और कटहल की नर्सरी तैयार की गई है। और साफ.सफाई का काम भी कर रहे हैं जिसके एवज में मजदूरी भुगतान किया जा रहा है। अब तक 10 से 12 हज़ार तक उनकी आय हो चुकी है। सहायक संचालक उद्यानिकी ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत महिलाओं की मेहनत के लिए उन्हें भुगतान किया जा रहा है।
सामुदायिक बाड़ी में हो रहा ये उत्पादन
सामुदायिक बाड़ी के कुल 3 एकड़ क्षेत्रफल में 1 एकड़ में फलोद्यानए आधे एकड़ में सब्जी उत्पादनए 40 डिसमिल में नर्सरी और 20 डिसमिल में गेंदा फूल उत्पादन किया जा रहा है। इसके साथ ही लगभग आधे एकड़ क्षेत्र में आलू उत्पादन के लिए 3 क्विंटल आलू की खेती की गई है। इससे लगभग 20 क्विंटल उपज होने का अनुमान है। जिससे समूह को 40 हज़ार रुपये तक आमदनी आलू उत्पादन से होगी।
*CNI न्यूज़ से साहिल अंसारी की रिपोर्ट*
*कोरिया, बैकुंठपुर छत्तीसगढ़*

















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