अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
भोपाल - आज तक देश को आजादी की यात्रा में जनजातीय समाज की बड़ा योगदान रहा , जिसे अब तक किसी को नहीं बताया गया। जनजातीय समाज को नजर अंदाज किया गया। राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनाने में जनजातीय समाज का ही योगदान रहा , जीवन का उत्तम ज्ञान आदिवासियों ने आत्मसात किया। आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पूरे देश के जनजातीय समाज की कला , संस्कृति , स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को गौरव के साथ याद किया जा रहा है , उनका सम्मान किया जा रहा है। आज का दिन पूरे देश के लिये , पूरे जनजातीय समाज के लिये बहुत बड़ा दिन है कि आज भारत अपना पहला जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जंबूरी मैदान में अमर शहीद बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस समारोह को संबोधित करते हुये कही। पीएम मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में जय जोहार मध्यप्रदेश , राम-राम , सेवा जोहार , मोर सगा जनजाति भाई-बहन के साथ अपना भाषण शुरू किया। इससे पहले पीएम ने आदिवासियों का उन्हीं की बोली में स्वागत करते हुये कहा- हूं तमारो स्वागत करूं। उन्होंने आदिवासियों को एक मिनट तक उन्हीं की बोली में संबोधित किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं आज यहां मध्यप्रदेश के जनजातीय समाज का आभार भी व्यक्त करता हूं। बीते अनेक वर्षों में निरंतर हमें आपका स्नेह , आपका विश्वास मिला है। ये स्नेह हर पल और मजबूत होता जा रहा है। पीएम ने कहा मैंने अभी आदिवासी गीत के शब्दों को बारीक से सुना , नृत्य से आपने बताया कि शरीर चार दिन में मिट्टी में मिल जायेगा। आदिवासी भाई बहन हमें समझा रहे हैं कि धरती , खेत , खलिहान किसी के नहीं हैं , धन-दौलत यहीं छोड़कर जाना है। संगीत में जो शब्द जंगल में जिंदगी गुजारने वाले आदिवासियों ने जीवन में आत्मसात किया है , इससे बड़ी देश की विरासत और पूंजी क्या हो सकती है ? उन्होंने कहा मेरा यह अनुभव रहा है कि जीवन के महत्वपूर्ण कालखंड को मैंने आदिवासियों के बीच बिताया है। जीवन जीने का कारण , जीवन जीने के इरादे को आदिवासी परंपरा बखूबी प्रस्तुत करती है। उन्होंने आदिवासियों को साधते हुये कहा मुझे खुशी है कि मध्यप्रदेश में जनजातीय परिवारों में तेजी से मुफ्त टीकाकरण भी हो रहा है। दुनियां के पढ़े-लिखे देश में भी टीकाकरण पर सवालिया निशान लगाने को लेकर भी खबरें आती हैं। लेकिन मेरे आदिवासी भाई-बहन टीकाकरण के महत्व को समझते हैं और देश को बचाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं , इससे बड़ी समझदारी और क्या हो सकती है। पढ़े-लिखे लोगों को आदिवासियों से सीख लेना चाहिये। पीएम ने कहा मुझे आज यहां भोपाल आने से पहले रांची में बिरसा मुंडा स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम का लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला। आजादी के नायकों की वीर गाथायें देश के सामने लाना हमारा कर्तव्य है। गुलामी के कालखंड में विदेश शासन के खिलाफ मीजो आंदोलन , कोल आंदोलन समेत कई संग्राम हुये। गौंड महारानी वीर दुर्गावाती का शौर्य हो या फिर रानी कमलापति का बलिदान , देश इन्हें भूल नहीं सकता। वीर महाराणा प्रताप के संघर्ष की परिकल्पना भील बहादुरों के बिना नहीं की जा सकती , जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और बलिदान दिया। हम उनके ऋण तो नही चुका सकते लेकिन उनके बलिदानों को सही मुकाम जरूर दे सकते हैं। जनजातीय सम्मेलन पर कुछ लोगों को हैरानी होती है। ऐसे लोगों को विश्वास ही नहीं होता कि जनजातीय समाज का भारत की संस्कृति को मजबूत करने में कितना बड़ा योगदान रहा। उन्होंने आदिवासियों को अंधेरे में रखने के लिये आजादी के बाद की सरकारों पर निशाना साधते हुये कहा कि आजादी के बाद की सरकारों ने आदिवासियों की समृद्ध विरासत के बारे में देश को नही बताया। देश की आबादी के करीब करीब दस प्रतिशत होने के बावजूद दशकों तक जनजातीय समाज को , उनकी संस्कृति , उनके सामर्थ्य को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया। आदिवासियों का दुःख , उनकी तकलीफ , बच्चों की शिक्षा उन लोगों के लिये कोई मायने नहीं रखती थी। देश को अंधेरे में रखा गया , अगर बताया भी गया तो बहुत ही सीमित दायरे में जानकारी दी गई। आजादी के बाद इतने दशक तक सरकार चलाने वालों ने अपने स्वार्थ भरी राजनीति को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने बताया गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने वहां पर जनजातीय समाज में बदलाव के लिये बहुत सारे अभियान शुरू किये। जब देश ने मुझे वर्ष 2014 में आपकी सेवा का मौका दिया तो मैंने जनजातीय समुदाय के हितों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा। आज सही मायने में आदिवासी समाज को देश के विकास में भागीदारी दी जा रही है। पहले की सरकारों में आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिये जरूरी राजनैतिक इच्छाशक्ति नहीं थी , बहुत कम थी। आदिवासी सृजन को बाजार से नहीं जोड़ा गया। पहले की सरकारें सिर्फ आठ - दस वनोपज पर एमएसपी दिया करती थीं , आज हमारी 90 पर दे रही है। हमारी सरकार ने जंगल को लेकर भी संवेदनशील कदम उठाये हैं। राज्य में बीस लाख जमीन के पट्टे देकर जनजातीय भाइयों की चिंता दूर की। आदिवासी बच्चों की शिक्षा पर भी बल दे रही है , हमारा लक्ष्य साढ़े सात सौ एकल्वय मॉडल स्कूल खोलने का है। सात साल पहले हर छात्र पर सरकार करीब 40 हजार खर्च करती थी , जो आज बढ़कर एक लाख से अधिक हो चुका है। इससे जनजातीय छात्र-छात्राओं को अधिक सुविधा मिल रही है। केंद्र सरकार हर साल स्कॉलरशिप भी दे रही है , इसके अलावा उच्च शिक्षा और रिसर्च से जोड़ने के लिये भी अभूतपूर्व काम किया जा रहा है। जनजातीय समाज के बच्चों को एक बहुत बढ़ी दिक्कत भाषा की भी होती थी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पढ़ाई स्थानीय भाषा में होगी , इसका लाभ हमारे बच्चों को मिलना तय है। जनजातीय समाज के आत्मविश्वास के लिये , अधिकार के लिये हम दिन-रात मेहनत करेंगे। हम इस संकल्प को फिर दोहरा रहे हैं कि जैसे हम गांधी जयंती मनाते हैं , सरदार पटेल की जयंती मनाते हैं , वैसे ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती हर साल जनजातीय गौरव दिवस के रूप में पूरे देश में मनायी जायेगी।
भारतीय रेल का भविष्य उज्जवल - पीएम मोदी
आज का दिन देश के लिये गौरवपूर्ण इतिहास और वैभवशाली भविष्य के संगम का दिन है , भारतीय रेल उच्चवल भविष्य की तरफ बढ़ रहा है।भोपाल के इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन का सिर्फ कायाकल्प नहीं हुआ है , बल्कि गिन्नौरगढ़ की रानी का नाम जुड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया है। पहले रेलवे को अलग नजर से देखा जाता था , आज से छह साल पहले तक जिसका भी पाला भारतीय रेल से पड़ता था , वो भारतीय रेल को ही कोसते हुये ज्यादा नजर आता था। स्टेशन पर भीड़ भाड़ गंदगी , खाने-पीने की असुविधा , ट्रेन में गंदगी। सुरक्षा की भी चिंता रहती थी , लोग चैन लेकर बैग में ताला लगाते थे , दुर्घटना का भी डर रहता था।लेकिन आज रेलवे की स्थिति ही बदल गई है पूरे देश की रेलवे का कायाकल्प हो रहा है। पहले स्टेशन से लेकर ट्रेन तक में गंदगी देखी जाती थी , लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। पीएम ने कहा देश का पहला आईएसओ सर्टीफाइड , देश का पहला पीपीपी मॉडल का स्टेशन तैयार है , यहां एयरपोर्ट जैसी सुविधायें मिलेगी। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय रेल का भविष्य कितना उज्ज्वल है , यहां आज दिखने लगा है। जो भी इस रेलवे स्टेशन पर आयेगा उसे यहां हर सुविधा दिखायी देगी। इस स्टेशन का नाम कमलापति पर जुड़ने से इसका गौरव और बढ़ गया है , ये ऐसे समय हुआ है जब देश जनजाति गौरव दिवस मना रहा है। इस कार्यक्रम में भोपाल रानी कमलापति बरखेड़ा लाइन का तिहरी करण का लोकार्पण हुआ है। पीएम ने कहा कि रामायण सर्किट की तरह कुछ और ट्रेन शुरू की जायेंगी , आने वाले दो सालों में 75 नई वंदे मातरम ट्रेनों की शुरुआत होगी।
गौरतलब है कि अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भोपाल पहुंचे , एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने स्टेट हैंगर पर उनकी अगुवानी की। यहां से पीएम मोदी ने कार्यक्रम स्थल जंबूरी मैदान पहुंचकर आदिवासियों के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाओं द्वारा लगाये गये स्टॉल पर उनके द्वारा बनायी गईं वस्तुओं एवं उत्पादों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने मंच पर भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया। यहां आदिवासी कलाकारों ने ढोल , नगाड़े , मांदर की थाप और तुरही की तान पर पारंपरिक नृत्य के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने भाजपा के वयोवृद्ध नेता लक्ष्मीनारायण गुप्ता का सम्मान किया , जो हिंदू महासभा से मप्र की पहली विधानसभा के सदस्य चुने गये थे। मंच पर प्रधानमंत्री को झाबुआ से लायी गई आदिवासियों की पारंपरिक जैकेट और डिंडोरी से लाया गया आदिवासी साफा पहनाया गया। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री और आदिवासी नेता ओमप्रकाश धुर्वे ने स्वागत के दौरान उनके पैर छूने की कोशिश की तो प्रधानमंत्री ने उन्हें रोक दिया। मंच पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम मोदी को गोंडवाना का गौरव रानी कमलापति की प्रतिमा स्मृति चिन्ह स्वरूप भेंट की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री को पद्ममश्री भूरीबाई ने चित्र भेंट की , वहीं प्रख्यात गोंड़ चित्रकार भज्जू सिंह श्याम ने अपनी बनायी पेंटिंग भेंट की। सीएम चौहान ने मध्यप्रदेश के 23 जिलों के 75 रणबांकुरों की पुण्यभूमि से एकत्रित की गई पावन मिट्टी का अमृत कलश पीएम मोदी को भेंट किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पीएम का बैगा माला , पगड़ी , शाल , तीर और धनुष देकर अभिनंदन किया। इस मंच से पीएम ने मंडला लक्ष्मी नारायण रमतणीया को अनाज वाहन की चाबी देकर प्रधानमंत्री राशन आपके द्वार योजना के साथ ही जनजातीय समुदाय से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का भी शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने दो आदिवासी युवाओं को वाहनों की चाबी प्रदान की। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आलीराजपुर के चीना धुर्वे और झाबुआ के मनीष परमार को जेनिटिक सिकल सेल कार्ड देकर हिमोग्लोबिनोपैथी मिशन का शुभारंभ किया। मिशन को सिकल सेल एनीमिया , थैलेसीमिया और अन्य हेमोग्लोबिनोपैथी से पीड़ित रोगियों की जांच , प्रबंधन और इन बीमारियों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिये विकसित किया गया है , जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश के जनजातीय समुदाय पर अधिक गहरा देखा जाता है। प्रधानमंत्री ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पचास एकलव्य माडल आवासीय विद्यालयों की आधारशिला भी रखी।राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने सिवनी के विजय भारती और पिंकी सहरिया को शिक्षक नियुक्ति पत्र प्रदान किया।आदिवासी नेता ओमप्रकाश धुर्वे, बिसाहूलाल साहू आदि ने अभिनंदन किया। मंच पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल , मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर , ज्योतिरादित्य सिंधिया , प्रहलाद पटेल समेत सांसद , विधायक मौजूद रहे।
जंबूरी मैदान कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी हेलीकॉप्टर से बीयू कैम्पस स्थित हेलीपैड पहुंचे। यहां से वे होशंगाबाद रोड से होते हुये रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पहुंचे , उनके मोदी के स्वागत के लिये आधे किलोमीटर में तीस मंच बनाये गये थे। इस दौरान लोग पीएम की झलक पाने के लिये उत्सुक नजर आये , उन्होंने हर हर मोदी - घर घर मोदी के नारे भी लगाये। यहां पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 करोड़ की लागत से निर्मित वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया। रेलवे स्टेशन का लोकापर्ण करने के बाद उन्होंने उज्जैन - इंदौर और इंदौर - उज्जैन मेमू ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर शुरूआत की। मेमू ट्रेन सेवा प्रारंभ होने से क्षेत्र के औद्योगिक विकास को गति मिलने के साथ ही क्षेत्र का चहुंमुखी विकास भी सुनिश्चित होगा और यात्री सुविधाओं में भी बढ़ोत्तरी होगी। इससे पहले करीब पंद्रह मिनट तक पीएम ने वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का अवलोकन कर भोपाल की रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की जमकर तारीफ भी की।

















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