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Sunday, November 28, 2021

सरकार द्वारा पंजीयन में रकबा कम करने अधिकारियों पर दबाव की आशंका संदीप शर्मा

 Date: Nov 28, 2021


सरकार द्वारा पंजीयन में रकबा कम करने अधिकारियों पर दबाव की आशंका संदीप शर्मा



रतनपुर से ताहिर अली की रिपोट

 बिलासपुर : किसानों को धान बेचने के लिए पंजीयन करवाने में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कठिनाइयों को देख कर ऐसा लगता है मानो भूपेश सरकार ने ये तय कर लिया है कि किसानों को हैरान परेशान करके एनकेन प्रकरेण धनहा का रकबा कम कर धान खरीदी से बचा जाय। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी संदीप शर्मा ने उक्त आरोप लगाते हुए कहा कि खरीदी, बिक्री, बटवारा आदि के चलते किसानों के भूमि की रकबा में कमी बढ़ोतरी स्वाभाविक है। वर्तमान सत्र में भी किसानों के रकबा कब और अधिक हुए हैं। जिन किसानों के रकबा  खरीदी, बिक्री , बटवारा के कारण कम हुए हैं ,

पंजीयन रिकार्ड में उनके रकबा भुंइया पोर्टल के आधार "ऑटोमेटिक" कम कर दिए गए हैं, और जिन किसानों के रकबा बढ़े हैं और जो भुइँया पोर्टल में भी साफ साफ दिख रहा है उनके रकबा पंजीयन रिकार्ड में बढ़े हुए नही दिख रहे हैं जबकि किसानों ने अपने बढ़े रकबे की जानकारी,और नए पंजीयन हेतु आवेदन भी सहकारी समितियों में दिए है। समिति के ऑपरेटरों को प्राप्त निर्देशानुसार ऐसे बढ़े रकबों के पंजीयन के लिए, और नए पंजीयन के लिए "एकीकृत किसान पोर्टल" में पृथक से एंट्री भी किया गया था परंतु अब उस पोर्टल में किसानों के पंजीकृत  भूमि गायब दिख रहे हैं इससे न केवल किसान वरन समिति के ऑपरेटर भी परेशान हैं। 

मोर्चा प्रभारी संदीप शर्मा ने इस प्रकार की गड़बड़ी को सीधा सीधा किसानों के साथ षड्यंत्र बताते हुए कहा कि जिन किसानों के दो अलग अलग समितियों में धान बेचने पंजीयन किया गया है उसमें भी भारी गड़बड़ी हुई है किसानों के कृषि भूमि के रकबा दोनों समिति में अलग अलग न दिखाया जा कर किसी एक समिति में ही दिखा रहा है। और यह सब "एकीकृत किसान पोर्टल" के कारण होता प्रतीत ह

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