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Thursday, December 23, 2021

*पतिव्रत धर्म का आचरण करने बाली स्त्रियो के वश मे होते है तीनो देवता - आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज* *दमोह।* स्थानीय सिविल वार्ड 7 मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस मे कथा वाचक आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि समस्त विवाहित स्त्रियो को पतिव्रत धर्म का आचरण करना चाहिए एवं पति को भी यत्न पूर्वक पत्नी का सम्मान रखना चाहिए श्री शास्त्री ने कहा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता जिस घर मे स्त्रियो का सम्मान होता है वहां देवता स्वयं निवास करते है उन्होने कहा कि माता अनसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की 9 कन्याओं में से एक तथा अत्रि मुनि की पत्नी थीं। उनकी पति-भक्ति अर्थात सतीत्व का तेज इतना अधिक था की उसके कारण आकाशमार्ग से जाते देवों को उसके प्रताप का अनुभव होता था। इसी कारण उन्हें श्सती अनसूयाश् भी कहा जाता है अनसूया ने राम, सीता और लक्ष्मण का अपने आश्रम में स्वागत किया था। उन्होंने सीता को उपदेश दिया था और उन्हें अखंड सौंदर्य की एक ओषधि भी दी थी। सतियों में उनकी गणना सबसे पहले होती है। कालिदास के श्शाकुंतलम्श् में अनसूया नाम की शकुंतला की एक सखी भी कही गई है पंडित रवि शास्त्री ने कहा कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु व महेश उनकी सतीत्व की परीक्षा करने की सोची पतिव्रता देवियों में अनसूया का स्थान सबसे ऊँचा है। वे अत्रि-ऋषि की पत्नी थीं।एक बार ब्रह्माणी, लक्ष्मी और गौरी में यह विवाद छिड़ा कि सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता कौन है अंत में तय यही हुआ कि अत्रि पत्नी श्रीअनसूया ही इस समय सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता हैं। इस बात की परीक्षा लेने के लिये त्रिमूर्ती ब्रह्मा, विष्णु व शंकर ब्राह्मण के वेश में अत्रि-आश्रम पहुँचे। अत्रि ऋषि किसी कार्यवश बाहर गये हुए थे। अनसूया ने अतिथियों का बड़े आदर से स्वागत किया। तीनों ने अनसूयाजी से कहा कि हम तभी आपके हाथ से भीख लेंगे जब आप अपने सभी को अलग रखकर भिक्षा देंगी। सती बड़े धर्म-संकट में पड़ गयी। वह भगवान को स्मरण करके कहने लगी ष्यदि मैंने पति के समान कभी किसी दूसरे पुरुष को न देखा हो, यदि मैंने किसी भी देवता को पति के समान न माना हो, यदि मैं सदा मन, वचन और कर्म से पति की आराधना में ही लगी रही हूँ तो मेरे इस सतीत्व के प्रभाव से ये तीनों नवजात शिशु हो जाँय।ष् तीनों देव नन्हे बच्चे होकर श्रीअनसूयाजी की गोद में खेलने लगे यह पतिव्रत का ही प्रभाव था कि तीनो देवता छोटे छोटे बालक बन गए इसलिए स्त्रियो को यत्न पूर्वक पतिव्रत धर्म का आचरण करना चाहिए।


धर्म का आचरण करने बाली स्त्रियो के वश मे होते है तीनो देवता - आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज

दमोह स्थानीय सिविल वार्ड 7 मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस मे कथा वाचक आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि समस्त विवाहित स्त्रियो को पतिव्रत धर्म का आचरण करना चाहिए एवं पति को भी यत्न पूर्वक पत्नी का सम्मान रखना चाहिए श्री शास्त्री ने कहा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता जिस घर मे स्त्रियो का सम्मान होता है वहां देवता स्वयं निवास करते है उन्होने कहा कि माता अनसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की 9 कन्याओं में से एक तथा अत्रि मुनि की पत्नी थीं। उनकी पति-भक्ति अर्थात सतीत्व का तेज इतना अधिक था की उसके कारण आकाशमार्ग से जाते देवों को उसके प्रताप का अनुभव होता था। इसी कारण उन्हें श्सती अनसूयाश् भी कहा जाता है अनसूया ने राम, सीता और लक्ष्मण का अपने आश्रम में स्वागत किया था। उन्होंने सीता को उपदेश दिया था और उन्हें अखंड सौंदर्य की एक ओषधि भी दी थी। सतियों में उनकी गणना सबसे पहले होती है। कालिदास के श्शाकुंतलम्श् में अनसूया नाम की शकुंतला की एक सखी भी कही गई है पंडित रवि शास्त्री ने कहा कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु व महेश उनकी सतीत्व की परीक्षा करने की सोची पतिव्रता देवियों में अनसूया का स्थान सबसे ऊँचा है। वे अत्रि-ऋषि की पत्नी थीं।एक बार ब्रह्माणी, लक्ष्मी और गौरी में यह विवाद छिड़ा कि सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता कौन है अंत में तय यही हुआ कि अत्रि पत्नी श्रीअनसूया ही इस समय सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता हैं। इस बात की परीक्षा लेने के लिये त्रिमूर्ती ब्रह्मा, विष्णु व शंकर ब्राह्मण के वेश में अत्रि-आश्रम पहुँचे। अत्रि ऋषि किसी कार्यवश बाहर गये हुए थे। अनसूया ने अतिथियों का बड़े आदर से स्वागत किया। तीनों ने अनसूयाजी से कहा कि हम तभी आपके हाथ से भीख लेंगे जब आप अपने सभी को अलग रखकर भिक्षा देंगी। सती बड़े धर्म-संकट में पड़ गयी। वह भगवान को स्मरण करके कहने लगी ष्यदि मैंने पति के समान कभी किसी दूसरे पुरुष को न देखा हो, यदि मैंने किसी भी देवता को पति के समान न माना हो, यदि मैं सदा मन, वचन और कर्म से पति की आराधना में ही लगी रही हूँ तो मेरे इस सतीत्व के प्रभाव से ये तीनों नवजात शिशु हो जाँय।ष् तीनों देव नन्हे बच्चे होकर श्रीअनसूयाजी की गोद में खेलने लगे यह पतिव्रत का ही प्रभाव था कि तीनो देवता छोटे छोटे बालक बन गए इसलिए स्त्रियो को यत्न पूर्वक पतिव्रत धर्म का आचरण करना चाहिए।

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