8 दिसंबर का पंचांग
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*********|| जय श्री राधे ||*********
🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏
*********ll जय श्री राधे ll*********
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*दिनाँक-: 08/12/2021,बुधवार*
पंचमी, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
""""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल)
तिथि------------ पंचमी 21:25:24 तक
पक्ष-------------------------- शुक्ल
नक्षत्र---------- श्रवण 22:38:50
योग----------------- ध्रुव 13:07:41
करण--------------- बव 10:27:50
करण----------- बालव 21:25:24
वार------------------------ बुधवार
माह----------------------- मार्गशीर्ष
चन्द्र राशि-------------------- मकर
सूर्य राशि------------------ वृश्चिक
ऋतु---------------------------हेमंत
आयन------------------दक्षिणायण
संवत्सर----------------------- प्लव
संवत्सर (उत्तर)--------- आनंद
विक्रम संवत---------------- 2078
विक्रम संवत (कर्तक)---- 2078
शाका संवत----------------- 1943
वृन्दावन
सूर्योदय----------------06:58:48
सूर्यास्त------------------17:23:29
दिन काल---------------10:24:41
रात्री काल---------------13:36:00
चंद्रोदय-----------------10:57:56
चंद्रास्त------------------ 21:47:41
लग्न---- वृश्चिक 22°0' , 232°0'
सूर्य नक्षत्र-------------------- ज्येष्ठा
चन्द्र नक्षत्र-------------------- श्रवण
नक्षत्र पाया----------------------ताम्र
*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*
खू---- श्रवण 11:19:41
खे---- श्रवण 16:57:58
खो---- श्रवण 22:38:50
गा---- धनिष्ठा 28:22:22
*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
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सूर्य=वृश्चिक 22:42 ' ज्येष्ठा , 2 या
चन्द्र =मकर 14°23 ' श्रवण , 2 खू
बुध = वृश्चिक 26°07 ' ज्येष्ठा ' 4 यू
शुक्र=धनु 29°55, उ oषा o ' 1 भे
मंगल=वृश्चिक 02°30 ' विशाखा ' 4 तो
गुरु=मकर 01°30 ' धनिष्ठा , 3 गु
शनि=मकर 14°43 ' श्रवण ' 2 खू
राहू=(व)वृषभ 06°40' कृतिका , 4 ए
केतु=(व)वृश्चिक 06°40अनुराधा , 2 नी
राहू काल 12:11 - 13:29 अशुभ
यम घंटा 08:17 - 09:35 अशुभ
गुली काल 10:53 - 12:11 अशुभ
अभिजित 11:50 -12:32 अशुभ
दूर मुहूर्त 11:50 - 12:32 अशुभ
💮चोघडिया, दिन
लाभ 06:59 - 08:17 शुभ
अमृत 08:17 - 09:35 शुभ
काल 09:35 - 10:53 अशुभ
शुभ 10:53 - 12:11 शुभ
रोग 12:11 - 13:29 अशुभ
उद्वेग 13:29 - 14:47 अशुभ
चर 14:47 - 16:05 शुभ
लाभ 16:05 - 17:23 शुभ
🚩चोघडिया, रात
उद्वेग 17:23 - 19:05 अशुभ
शुभ 19:05 - 20:47 शुभ
अमृत 20:47 - 22:29 शुभ
चर 22:29 - 24:11* शुभ
रोग 24:11* - 25:53* अशुभ
काल 25:53* - 27:35* अशुभ
लाभ 27:35* - 29:18* शुभ
उद्वेग 29:18* - 30:59* अशुभ
💮होरा, दिन
बुध 06:59 - 07:51
चन्द्र 07:51 - 08:43
शनि 08:43 - 09:35
बृहस्पति 09:35 - 10:27
मंगल 10:27 - 11:19
सूर्य 11:19 - 12:11
शुक्र 12:11 - 13:03
बुध 13:03 - 13:55
चन्द्र 13:55 - 14:47
शनि 14:47 - 15:39
बृहस्पति 15:39 - 16:31
मंगल। 16:31 - 17:23
🚩होरा, रात
सूर्य 17:23 - 18:31
शुक्र 18:31 - 19:39
बुध 19:39 - 20:47
चन्द्र 20:47 - 21:55
शनि 21:55 - 23:03
बृहस्पति 23:03 - 24:11
मंगल 24:11* - 25:19
सूर्य 25:19* - 26:27
शुक्र 26:27* - 27:35
बुध 27:35* - 28:43
चन्द्र 28:43* - 29:52
शनि 29:52* - 30:59
*🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩*
वृश्चिक > 05:20 से 07:38 तक
धनु > 07:38 से 09:40 तक
मकर > 09:40 से 11:23 तक
कुम्भ > 11:23 से 12:52 तक
मीन > 12:52 से 14:18 तक
मेष > 14:18 से 16:54 तक
वृषभ > 16:54 से 18:06 तक
मिथुन > 18:06 से 20:04 तक
कर्क > 20:04 से 22:24 तक
सिंह > 22:24 से 00:36 तक
कन्या > 00:36 से 02:59 तक
तुला > 02:59 से 05:16 तक
*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट--------- जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट------ अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट------------ मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट--------बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54-----जैसलमेर -15 मिनट
*नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान-------------उत्तर*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो इलायची अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
5 + 4 + 1 = 10 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
बुध ग्रह मुखहुति
*💮 शिव वास एवं फल -:*
5 + 5 + 5 = 15 ÷ 7 = 1 शेष
कैलाश वास = शुभ कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*
*बिहार पंचमी
*ठाकुर श्री बाँके बिहारी जी प्रादुर्भाव सवारी निधवन जी
* रामजानकी विवाहोत्सव
* विठ्ठल विपुल उत्ससव
*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*
भस्मना शुध्यते कांस्यं ताम्रमम्लेन शुध्यति ।
रजसा शुध्यते नारि नदी वेगेन शुध्यति ।।
।।चा o नी o।।
राख से घिसने पर पीतल चमकता है . ताम्बा इमली से साफ़ होता है. औरते प्रदर से शुद्ध होती है. नदी बहती रहे तो साफ़ रहती है.
*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*
गीता -: विश्वरूपदर्शनयोग अo-11
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया ।,
त्वतः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम् ॥,
क्योंकि हे कमलनेत्र! मैंने आपसे भूतों की उत्पत्ति और प्रलय विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपकी अविनाशी महिमा भी सुनी है॥,2॥,

















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