बंजरनदी (रानीधार) से उत्खनन करने वालो पर चलेगा प्रशासन का डंडा
बालाघाट। बिरसा जनपद के ग्राम भीमजोरी से प्रवाहित होने वाली रानीधार बंजर नदी से अब रेत का खनन करने वाले लोगों की खैर नहीं रहेंगी। नदी से रेत निकालने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई करने की तैयारी शुरू हो गई है, इसके लिए बिरसा तहसीलदार ने एक आदेश जारी किया है। इधर रविवार को वन परिक्षेत्र अधिकारी व सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी ने भी मौके पर पहुंचकर रेत ठेकेदारों को समझाइश देकर रेत और मुरम वन परिक्षेत्र सीमा से खनन पर रोक लगाने के साथ ही नहीं मानने वालों पर कार्रवाई की बात कही है।
बिरसा तहसील के तहसीलदार देवंती परते द्वारा आदेश निकालने के बाद रविवार को पूर्व सामान्य बैहर के वन परिक्षेत्र अधिकारी सुनील कुमार पन्द्रे ने सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी रूपेश गमने और वन अमले के साथ कक्ष क्रमांक 1131 रानीधार बंजर नदी किनारे पहुंचे। जहां पर भीमजोरी समेत आसपास गांवों के 20 से 25 रेत ठेकेदारों को बुलाए। साथ ही वन परिक्षेत्र से रेत व मुरम खनन नहीं करने के निर्देश दिए।रेत व मुरम खनन करते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।जिससे रेत ठेकेदारों ने रानीधार बंजर नदी से रेत नहीं निकालने के लिए वन विभाग को आश्वस्त किया है।
नदी किनारे किया पौधारोपण
महाराजा संग्राम शाह ग्राम संगठन अध्यक्ष भीमजोरी ने बताया कि रानीधार बंजर नदी का अस्तित्व बचाने के लिए महाराजा संग्राम शाह ग्राम संगठन के 70 सदस्यों, मूल निवासी समिति के 30 सदस्यों की संयुक्त समिति बनाई है और वन समिति के जरिए नदी किनारे नीम, आंवाल, जामुन, आम, गुलमोहर, करंज, पीपल, महुआ के पौधे लगाए गए ताकि नदी किनारे हरा भरा जंगल रहे।लेकिन कुछ लोगों द्वारा रेत खनन चालू कर दिया गया था। जिसकी शिकायत राजस्व विभाग में किए जाने पर तहसीलदार ने रेत व मुरम खनन पर रोक लगवा दी है।इससे नदी का अस्तित्व बचा रहेगा।नदी को बचाने दोनों समितियों द्वारा एकजुट होकर माह में दो बार बैठक भी कराई जाती है।जिसका परिणाम यह है कि नदी में रेत खनन व मुरम खनन पर अंकुश लगाने में कामयाबी मिल रही है।दो दिन पूर्व रेत खनन करने वालों के फावड़ा घमेला भी जब्त कराए थे।
इनका कहना
रानीधार बंजर नदी भीमजोरी से रेत व मुरम खनन पर रोक लगवा दी गई है। वन क्षेत्र से रेत व मुरम खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 20 से 25 रेत ठेकेदारों को बुलाकर समझाइश दे दी है। इसके लिए एक आदेश तहसीलदार ने भी जारी कर दिया है।वन क्षेत्र से प्रवाहित होने वाले नदी नालों की तरफ वन अमला हमेशा गश्त करते रहता है।जो वन समितियां बनाई गई है उनसे भी जानकारी ली जाती है ताकि वन एवं वन्यप्राणी संरक्षित किया जा सके।
सुनील कुमार पन्द्रे, वन परिक्षेत्र अधिकारी, पूर्व सामान्य बैहर।

















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