जांजगीर चांपा - देश में अनादिकाल से भगवान् श्रीराम का प्राकट्य उत्सव मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मदिवस रूप में मनाया जाता हैं। मर्यादित जीवन का सबसे सुंदर उदाहरण हमें श्रीरामचंन्द्र जी के जीवन दर्शन से ही प्राप्त होता हैं। नवमी के दिन भगवान चार भुजाओं को लेकर प्रकट हुये , पुत्र की तरह उन्होंने रूदन किया। गुरूकुल के शिक्षा-दीक्षा से लेकर गुरू आश्रम की रक्षा करने का दायित्व बालक राम ने अच्छे ढंग से निभाया और राजा दशरथनन्दन के ज्येष्ठ पुत्र रत्न के रूप में जीवन धर्म निभाया। आज की पीढ़ी के लिये भगवान श्रीराम के आदर्शों का अनुकरण करना अवश्यंभावी है।
उक्त बातें कोसा , कांसा एवं कंचन की नगरी एवं मां समलेश्वरी की पावन धरा चाम्पा में संगीतमय रामकथा के चतुर्थ दिवस कथावाचक प्रकाश कृष्ण महाराज ने मुख्य यजमान कोमल ममता सोनी सहित श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुये कही। कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुये उन्होंने कहा कि जीवन को सफल बनाना हैं तो मनुष्य को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवनशैली को अपनाना ही होगा। रामचंद्रजी जो भी कार्य करते थे उससे दूसरों का उद्धार होता था , प्रभु ने हमें सन्मार्ग दिखाया। उसी परमात्मा की लीलाओं को हम परोस रहे हैं। उन्होंने कहा रामकथा में कई ऐसे पड़ाव आये जहां श्रवण करने से लोगों को शिक्षा ही शिक्षा मिलती हैं। रामचंद्र जी ने हमेशा-हमेशा बड़े-बुजुर्गों को सम्मान दिया , सामान्य मनुष्य की कद्र की ,पशु-पक्षी ,जानवर सभी को अपना सहयोगी माना और बुराईयों का अंत कर हमेशा ज्ञानघाट के वक्ता बनें रहे।
व्यासपीठ से उन्होंने भक्तजनों को मुख्य संदेश देते हुये कहा स्वार्थ को छोड़ो और परमात्मा को अपनाओं , तन में जब-तक प्राण हैं मन को भगवान की भक्ति में लगाओं। मन की एकाग्रता अगर सही है , ध्यान परमात्मा में लग जाये तो जीवन सफल हो जायेगा । भगवान् की कृपादृष्टि मिलने से ही जीवन सफल हो जाता हैं , जीवन में भोजन और भजन दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने भक्ति और मुक्ति के लिये भजन-कीर्तन को अति आवश्यक बताया। कथा श्रवण करने पहुंचे शशिभूषण सोनी ने बताया कि पंडित वैष्णव जी ने बहुत ही सुंदर ढंग से चतुर्थ दिवस भगवान रामचन्द्र जी के जन्म बाल लीलाओं , अहिल्या उद्धार , जटायु प्रसंग और राम जन्म पर बधाई गीत गाकर सबको भाव-विभोर कर दिया। श्रीराम जन्मोत्सव पर "दो अक्षर का प्यारा नाम , जय श्रीराम जय श्रीराम" की संगीतमयी धुन पर श्रद्धालु थिरकते रहे। आज आकर्षण का केंद्र राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न बने छोटे-छोटे बच्चे रहे। कड़ी ठंड के बावजूद भी सामाजिक , राजनैतिक , धार्मिक स्तर के श्रोतागण कथा विश्राम तक उपस्थित रहते हैं। आज चतुर्थ दिवस श्री रामकथा श्रवण करने विशेष आमंत्रण पर श्रीमद्भागवत कथा विदुषी श्रीमती सविता गोस्वामी , क्षेत्रीय विधायक नारायण चंदेल पहुंचे थे।

















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