खैरागढ़
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में नाट्य वि
भाग के ‘रंगमंडल का उद्घाटन समारोह’ 10 जनवरी 2022 छत्तीसगढ़ की राज्यपाल व इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलाधिपति सुश्री अनुसुइया उइके के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
इस मौके पर राज्यपाल सुश्री उइके ने अपने उद्बोधन में कहा कि वह स्वयं भी अपने विद्यार्थी जीवन में रंगकर्म के प्रति रूचि रखती थीं। उन्होंने 'सराय' नामक नाटक में मालकिन की भूमिका निभाने का उल्लेख किया। राज्यपाल सुश्री उइके ने रंगकर्म की प्रतिभाओं को सशक्त मंच देने की दिशा में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के द्वारा किये जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यहाँ की कुलपति पद्मश्री मोक्षदा (ममता) चंद्राकर, जो कि कला के क्षेत्र में स्वयं एक लोकप्रिय नाम हैं, तथा कुलसचिव प्रो आईडी तिवारी और उनकी पूरी टीम के द्वारा किये जा रहे प्रयासों से निश्चित रूप से रंगकर्म और रंगकर्म में रूचि रखने वाली प्रतिभाओं को लाभ मिलेगा।
राज्यपाल सुश्री उइके ने कोविड प्रोटोकॉल का पूर्णतः पालन करते हुए आयोजित इस समारोह के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रशंसा की।
इसके पूर्व इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति पद्मश्री मोक्षदा (ममता) चंद्राकर ने अपने स्वागतीय उद्बोधन में सबसे पहले राज्यपाल और कुलाधिपति सुश्री उइके का विश्वविद्यालय की ओर से अभिनन्दन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति सभ्य मानव समाज की पहचान स्थापित करती हैं, और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय इस पहचान को मजबूत और समृद्ध बनाने की दिशा में सतत रूप से प्रयासरत है। कुलपति पद्मश्री चंद्राकर ने नवगठित रंगमंडल के द्वारा किये जा रहे इस नवाचार के लिए नाट्य विभाग के विभागाध्यक्ष और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश की नई शिक्षानीति ज्ञानार्जन को रोजगारपरक और कौशल उन्नयन में सहायक बनाने की पक्षधर है, जिसके अनुरूप ही इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ द्वारा रंगमंडल का गठन किया गया है। कुलपति पद्मश्री चंद्राकर ने कहा कि ऐसे ही नवाचारों और अनूठे प्रयासों के कारण इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की पहचान न केवल छत्तीसगढ़ और भारतवर्ष में, अपितु पूरे विश्व में प्रतिष्ठित होगी।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो आईडी तिवारी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नाट्य विभाग के रंगमंडल के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारने हेतु छत्तीसगढ़ की राज्यपाल एवं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलाधिपति महोदया का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में राज्यपाल महोदया का आगमन और प्रभास से हमारा उत्साह बढ़ा है। उनके आशीर्वचन से यह विश्वविद्यालय धन्य महसूस करता है। इस विश्वविद्यालय में आपका प्रवास इस विश्वविद्यालय की एक ऐतिहासिक घटना है। आने वाले समय में यह हमें प्रेरणा देता रहेगा। कुलसचिव प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि राजभवन के अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों ने इस विश्वविद्यालय के सीमित साधनों के साथ सामंजस्य बनाते हुए हमारा उत्साह बनाए रखा। इस हेतु यह विश्वविद्यालय हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करता है। उनके सराहनीय व्यवहार से हमने बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी वर्ग ने आदरणीया कुलपति महोदया के निर्देशन में यथाशक्ति प्रयास किया है। इस हेतु मैं आदरणीया कुलपति महोदय को धन्यवाद देता हूं। कुलसचिव प्रोफेसर तिवारी ने राजनांदगांव जिले के समस्त अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, नगरीय प्रशासन, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया के पत्रकार बंधुओं के साथ ही समारोह में उपस्थित सभी जन व समारोह को सफल बनाने में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नाट्य विभाग इस विश्वविद्यालय का अपेक्षाकृत नया विभाग है, पर यह विभाग भी विश्वविद्यालय के अन्य विभागों की भांति नूतन प्रयोगों एवं नवाचार की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। रंगमंडल छत्तीसगढ़ की नाट्य परंपरा को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होगा। 'बड़े भाई साहब' इस रंगमंडल की प्रथम प्रस्तुति है। इसकी सफल प्रस्तुति हेतु मैं रंगमंडल के प्रथम प्रमुख डॉक्टर योगेंद्र चौबे एवं समस्त कलाकारों को बधाई देता हूं। भरतनाट्यम विभाग द्वारा प्रस्तुत 'अरपा पैरी के धार' में छत्तीसगढ़ की आत्मा का संगीत है। इस गीत को प्रथम आवाज देने वाली स्वनामधन्य गायिका एवं इस नृत्य प्रस्तुति को वर्तमान कलेवर में लाने वाली इस विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया को मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।
उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नवगठित रंगमंडल द्वारा मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन किया गया। नाट्य विभाग के प्रमुख डॉ योगेंद्र चौबे के निर्देशन में धीरज सोनी, रोहित श्रीवास्तव, सोमनाथ साहू, रोहन जंघेल, अयान रजा, हिमांशु कुमार, विक्रम लोधी, रूपेश कुमार ने इसका मंचन किया। मंच के परे डॉक्टर परमानंद पांडे, जितेंद्र वर्मा, धीरज सोनी, सचिन कुमार भारती, भूपेंद्र पटेल, तन्मय शर्मा, रोहित श्रीवास्तव, सोमनाथ साहू, लखविंदर सिंह, श्रद्धा क्षेत्री, ख्याति विश्वकर्मा, डॉक्टर चैतन्य आठले, सागर गुप्ता, सौरभ मिश्रा ने उल्लेखनीय योगदान दिया।
कुलगीत की प्रस्तुति में विनोद उपाध्याय, किशन प्रकाश, स्वाति शर्मा, अंजली टंडन, प्रथा रामटेके, विवेक कुमार, दुष्यंत यादव, किशन गवेल ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी तरह अरपा पैरी के धार गीत पर नृत्य में भरतनाट्यम विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर शेख मेदिनी होम्बल के निर्देशन पर नृत्य रचना की प्रस्तुति में छात्र-छात्राएं कुमारीइज़्ज़ु श्रावणी, कुमारी द्रोपती मानिकपुरी, कुमारी तोशिता असाटी, कुमारी श्रद्धा सोनवानी, कुमारी वसुधा श्रीवास्तव, आसिफ हुसैन, राजेंद्र कुमार, मुस्कान सिंह ने अपनी प्रतिभा का शानदार और मनमोहक प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलपति पद्मश्री मोक्षदा ममता चंद्राकर, कुलसचिव प्रोफेसर आईडी तिवारी, डीन कला संकाय प्रोफेसर मृदुला शुक्ला ने कुलाधिपति का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। इस प्रवास दौरान राज्यपाल व कुलाधिपति सुश्री अनुसुइया उइके ने विश्वविद्यालय के समस्त फैकल्टीज एवं टीचर से मुलाकात की। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर योगेंद्र चौबे ने किया। इस अवसर पर प्रो. नीता गहरवार अधिष्ठाता (नृत्य संकाय), डाॅ. हिमांशु विश्वरूप अधिष्ठाता (संगीत संकाय), प्रो. काशीनाथ तिवारी अधिष्ठाता (लोक संगीत एवं कला संकाय), प्रो. एस. पी. चौधरी अधिष्ठाता (दृश्य संकाय) सहित समस्त विश्व विद्यालय परिवार उपस्थित था।
*सीएनआई खैरागढ़ सोमेश कुमार की रिपोर्ट*

















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