असामयिक वर्षा से लाखों कुंटल धान सोसायटी ओं में भीगा। धान खरीदी बंद । मात्र 10 दिन ही शेष बचा धान खरीदी के लिए। राज्य सरकार धान खरीदी की तिथि में इजाफा करें- (शशिकांत द्विवेदी)
महेंद्र शर्मा बंटी छत्तीसगढ़ रिपोर्टर भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशि कांत द्विवेदी ने कहा है कि असामयिक वर्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए शासन से धान खरीदी की तिथि एक माह अतिरिक्त अर्थात 28 फरवरी तक बढ़ाने की मांग की है। श्री द्विवेदी ने कहा कि गत 28_ 29 दिसंबर को हुई बेमौसम बारिश के चलते लगभग एक सप्ताह तक धान खरीदी पूरे प्रदेश में प्रभावित रही ।पुनः बारिश होने से पूरे प्रदेश में धान खरीदी बंद हो गई है ।यदि मौसम साफ रहा तो 17 जुलाई से पुनःधान खरीदी प्रारंभ हो सकती है।ऐसी स्थिति में शेष बचे मात्र दस दिन में शेष बचे हुए किसानों व लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीदी किया जाना संभव नहीं हो सकता । अतः सरकार इसे संज्ञान में लेते हुए किसानों के हित में धान खरीदी की समय सीमा एक माह अतिरिक्त बढ़ाते हुए 28 फरवरी तक खरीदी किए जाने हेतु आवश्यक निर्देश जारी करे।।श्री द्विवेदी ने आगे कहा कि धान बेचने की प्रत्याशा में किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी है क्योंकि धान बेचने के लिए दिए जाने वाले टोकन के नाम पर सोसाइटीयों में भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है। किसानों को टोकन के नाम पर बार-बार परेशान किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को ओने पौने दाम पर अपनी उपज को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ।अतः किसानों के साथ न्याय करते हुए सरकार धान खरीदी की समय सीमा एक माह बढ़ा कर 28 फरवरी तक धान खरीदी सुनिश्चित करें। श्री द्विवेदी ने कई समितियों के औचक निरीक्षण पर पाया कि शासन की लचर व्यवस्था व अधिकारियों की मनमानी के चलते अनेकों धान खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से कई गुना ज्यादा धान पड़ा हुआ है। जिसका समयावधि में उठाव नहीं होने के कारण इस वर्ष भी बारिश से खराब होने व शॉर्टेज आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता । श्री द्विवेदी ने बताया कि अभी तक पूरे प्रदेश में लगभग 68.28लाख मी0 टन धान खरीदी की जा चुकी है जिसमें से मात्र 32 लाख मी0टन धान का उठाव हो पाया है ।इस तरह अभी भी धान खरीदी केंद्रों में लगभग 36 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा धान पड़ा हुआ है। जिसका उठाव यदि समयावधि में नहीं किया गया तो गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारी मात्रा में धान सड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। अतः खरीदी नीति के अनुरूप बफर लिमिट से ज्यादा धान भंडारण किए जाने पर तत्काल उसका उठाव सुनिश्चित किया जावे वरना शोर्टेज की स्थिति में सोसाइटी प्रबंधन जिम्मेदार नहीं होगा ।श्री द्विवेदी ने धान खरीदी केंद्रों के अवलोकन में पाया कि मार्कफेड द्वारा निम्न गुणवत्ता की प्लास्टिक बोरियों की आपूर्ति धान खरीदी के लिए की गई हैं जिसकी जांच किया जाना आवश्यक है।

















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