15 लाख की पटेल समरस्ता भवन, जहां लटक बीम में छड़ डालना भूल गए नव सिखा ठेकेदार।
बेलगहना बैजनाथ पटेल- पंचायत कोटा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोंनचरा में पटेल समरस्ता भवन-निर्माण कार्य की गति कछुए की चाल की भांति चल रही है जो विगत 3 वर्ष पूर्व निर्माण कार्य प्रारंभ की गई है। जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाया है इससे कार्य एजेंसी की निष्क्रियता स्पष्ट दिखाई दे रही है।प्राप्त जानकारी अनुसार 2017 में पटेल समाज द्वारा मुख्यमंत्री कार्यक्रम का आयोजन कराया गया था जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के द्वारा 15 लाख रुपए की सामाजिक समरस्ता भवन का घोषणा किया था। समरसता भवन निर्माण कार्य धीमी व अवरुद्ध गति से की जा रही है।निर्माणाधीन भवन का कार्य प्रारंभ किया गया है। आप को बता दें भवन में हाल की लंबाई 40 फीट एवं चौड़ाई 27 फीट जिसमें 3 लटक बीम है।प्रत्येक बीम में जहां 16 एम एम की छड़ क्रैंक सहित 8 -8 नग डालना था तो वहीं मात्र 4 -4 नग छड़ ठेकेदार द्वारा लगाकर बीम ढलाई की संपूर्ण तैयारी कर ली गई थी, बस बीम में कंक्रीट मसाला डालने ही वाले थे की ऐन वक्त पर ग्रामीण निगरानी हेतु पहुंच गए जहां एस्टीमेट के विरुद्ध ठेकेदार के द्वारा कार्य करते पाया गया। जिस पर तत्काल प्रभारी इंजीनियर एवं ग्राम सरपंच को फोन के माध्यम से मौके पर बुलाकर दिखाया गया।
जिसमें मौके पर उपस्थित इंजीनियर द्वारा भी कहा गया कि वास्तव में छड़ कम डाला गया है इसमें और छठ की जरूरत है। अगर एन वक्त पर ग्रामीणों ने इंजीनियर को अवगत नहीं कराए होते तो ठेकेदार मनमानी तौर तरीके से कम छड़ लगाकर ही बीम की ढलाई कर दिए होते।जबकि कोई भी भवन की मजबूती भवन की बीम और कालम पर निर्भर करता है अगर बीम ही कमजोर है तो भवन की अस्तित्व ही खत्म है ।क्या ठेकेदार अपने स्वयं के मनमर्जी से ऐसा कर रहा था या फिर निर्माण एजेंसी की मिलीभगत से। सोचने वाली बात तो यह है कि जहां शासन अच्छे गुणवत्ता हेतु एस्टीमेट के अनुसार भवन निर्माण की इजाजत देती है तो वही ठेकेदार व निर्माण एजेंसी द्वारा एस्टीमेट की धज्जियां उड़ाई जाती है। शासन को इस प्रकार की निर्माण कार्यों पर ध्यान देते हुए इंजीनियर की मौजूदगी एवं निरीक्षण उपरांत ही कार्य कराने की अनुमति दी जानी चाहिए।

















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